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बड़गांव प्रधान के पारित प्रस्तावों को एसडीएम झंडूता ने किया रद्द
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बरठीं(बिलासपुर)। विकास खंड झंडूता की ग्राम पंचायत बड़गांव की प्रधान ने पद का दुरुपयोग करते हुए कार्रवाई रजिस्टर पर कोरे पन्नों पर सदस्यों के हस्ताक्षर करवाकर बाद में प्रस्ताव डाले। इससे संबंधित सभी मामलों को उपमंडल अधिकारी विकास शर्मा ने जांच के बाद खारिज कर दिया है। एसडीएम ने शिकायकर्ता के हक में फैसला दिया है। वहीं आगामी कार्रवाई के लिए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है।
उल्लेखनीय है की ग्राम पंचायत बड़गांव में कई दिनों से चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत के कार्रवाई रजिस्टर पर सभी सदस्यों के हस्ताक्षर लिए जाते थे। वहीं प्रस्ताव भी अपनी मर्जी से बाद में डाले जाते थे। जिनकी किसी को जानकारी नहीं होती थी। पंचायत के पूर्व प्रधान ओकार सिंह चंदेल, भूपेंद्र गुलेरिया, करण चंदेल, सीमा चंदेल, सुखदेव गुलेरिया ने चालू वर्ष में आरटीआई के माध्यम से इस बात का खुलासा किया है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत द्वारा गत वर्ष किए गए कामों में अथाह खर्चा कर दिया गया। वर्ष 2016 में ग्राम उदय से भारत उदय में खाने पर भारी गड़बड़ी की गई। टेंट और कुर्सियां लगाने की एवज में भी ज्यादा पैसों का बिल बनवा कर टेंट वाले से पैसे वापस ले लिए गए, जिसके जांच के बाद साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
पूर्व प्रधान ने कहा कि बाल्मीकि पुरस्कार योजना के तहत फर्जी को कोटेशन देकर सरकारी पैसे को चपत लगाई है। वहीं जाली प्रस्ताव डलवाए गए। जिसकी जांच एसडीएम झंडूता विकास शर्मा ने करते हुए उन प्रस्तावों को रद्द कर दिया है। उन्होंने आगामी कार्रवाई के लिए इन्हें उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। बड़गांव की वर्तमान प्रधान पर आरोप हैं कि इसने 30 वर्षों से चल रही सड़क पज्याल जख से बल्ह को भी जबरन रोक दिया गया। गुलेरिया पोटर्स सोसायटी जिसमें मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ट्रेनिंग दी जाती है, के रास्ते के लिए डेढ़ लाख रुपये जिलाधीश बिलासपुर द्वारा दिए गए थे। जिस कार्य को भी पंचायत प्रधान और उसके पति द्वारा रोक दिया गया। जिसके लिए आया हुआ सीमेंट भी खराब हो गया। इसके अलावा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है। जिस पर राजस्व अधिकारियों ने पंचायत प्रधान को नोटिस भी भेजा है। इन सभी उपरोक्त मामलों में लगे आरोप विकास खंड अधिकारी झंडूता, तहसीलदार झंडूता, उपमंडलाधिकारी झंडूता और जिला पंचायत अधिकारी द्वारा जांच में आरोप सही पाए गए हैं। पंचायत प्रधान पर अभी तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। इस संबंध में एसडीएम झंडूता विकास शर्मा ने बताया कि उपरोक्त मामलों में पंचायती राज के अंतर्गत धारा 188 आई हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट 1994 के तहत पंचायत ने जो रेजुलेशन डाले थे, उनको रद्द कर दिया है। आगामी कार्रवाई के लिए जिलाधीश बिलासपुर को भेज दिया गया है।
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उल्लेखनीय है की ग्राम पंचायत बड़गांव में कई दिनों से चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत के कार्रवाई रजिस्टर पर सभी सदस्यों के हस्ताक्षर लिए जाते थे। वहीं प्रस्ताव भी अपनी मर्जी से बाद में डाले जाते थे। जिनकी किसी को जानकारी नहीं होती थी। पंचायत के पूर्व प्रधान ओकार सिंह चंदेल, भूपेंद्र गुलेरिया, करण चंदेल, सीमा चंदेल, सुखदेव गुलेरिया ने चालू वर्ष में आरटीआई के माध्यम से इस बात का खुलासा किया है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत द्वारा गत वर्ष किए गए कामों में अथाह खर्चा कर दिया गया। वर्ष 2016 में ग्राम उदय से भारत उदय में खाने पर भारी गड़बड़ी की गई। टेंट और कुर्सियां लगाने की एवज में भी ज्यादा पैसों का बिल बनवा कर टेंट वाले से पैसे वापस ले लिए गए, जिसके जांच के बाद साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
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पूर्व प्रधान ने कहा कि बाल्मीकि पुरस्कार योजना के तहत फर्जी को कोटेशन देकर सरकारी पैसे को चपत लगाई है। वहीं जाली प्रस्ताव डलवाए गए। जिसकी जांच एसडीएम झंडूता विकास शर्मा ने करते हुए उन प्रस्तावों को रद्द कर दिया है। उन्होंने आगामी कार्रवाई के लिए इन्हें उच्चाधिकारियों को भेज दिया है। बड़गांव की वर्तमान प्रधान पर आरोप हैं कि इसने 30 वर्षों से चल रही सड़क पज्याल जख से बल्ह को भी जबरन रोक दिया गया। गुलेरिया पोटर्स सोसायटी जिसमें मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ट्रेनिंग दी जाती है, के रास्ते के लिए डेढ़ लाख रुपये जिलाधीश बिलासपुर द्वारा दिए गए थे। जिस कार्य को भी पंचायत प्रधान और उसके पति द्वारा रोक दिया गया। जिसके लिए आया हुआ सीमेंट भी खराब हो गया। इसके अलावा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है। जिस पर राजस्व अधिकारियों ने पंचायत प्रधान को नोटिस भी भेजा है। इन सभी उपरोक्त मामलों में लगे आरोप विकास खंड अधिकारी झंडूता, तहसीलदार झंडूता, उपमंडलाधिकारी झंडूता और जिला पंचायत अधिकारी द्वारा जांच में आरोप सही पाए गए हैं। पंचायत प्रधान पर अभी तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। इस संबंध में एसडीएम झंडूता विकास शर्मा ने बताया कि उपरोक्त मामलों में पंचायती राज के अंतर्गत धारा 188 आई हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट 1994 के तहत पंचायत ने जो रेजुलेशन डाले थे, उनको रद्द कर दिया है। आगामी कार्रवाई के लिए जिलाधीश बिलासपुर को भेज दिया गया है।
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