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सहकारी सभा में करोड़ों के गोलमाल मामले का चलान किया कोर्ट में पेश
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बरठीं(बिलासपुर)। करीब सवा सौ करोड़ का कारोबार करने वाली सहकारी सभा में हुए भ्रष्टाचार मामले की जांच पूरी हो गई है। पुलिस ने व्यापक छानबीन के बाद कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। जांच के आधार पर सभा के तत्कालीन सचिव और उनके सहयोगियों पर फर्जी हस्ताक्षर कर बेनाम लोगों के नाम पर करोड़ों रुपये गबन करने का आरोप तय किया गया है। अन्य मदों से भी करोड़ों की गड़बड़ी की बात चालान में है। पुलिस ने सभा के तत्कालीन सचिव राजेश पटियाल, दंपती अश्वनी और निर्मला सहित प्रबंधन समिति के दस पूर्व सदस्यों के खिलाफ चालान पेश किया है। प्रवर्तन निदेशालय भी करोड़ों रुपये हड़पने के मामले में जांच कर रहा है। जांच एजेंसियों को शक है कि उक्त पैसा सोने के व्यापार में भी लगाया होगा।
उल्लेखनीय है कि विकास खंड झंडूता के तहत आने वाली दी तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा में हुए करोडों रुपये के घोटाले के उजागर होने के बाद पिछले साल 16 मार्च को सभा सचिव पर धोखाधड़ी व जालसाजी करने पर मामला दर्ज किया गया था। 27 मार्च को जिला पंजीयक अधिकारी बिलासपुर के आदेशानुसार सचिव को अपने पद से हटा दिया गया। पुलिस ने मामले की गहनता से छानबीन की और सचिव को 15 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद घोटाले में अहम भूमिका निभाने वाले दो बाहरी प्रदेश के व्यक्तियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था। संघर्ष समिति के दबाव व पुलिस के हत्थे लगे कुछ सुरागों के तहत तत्कालीन प्रबंध समिति के दस अन्य लोगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। सभी आरोपी पहले पुलिस हिरासत में और 13 सितंबर के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे। हालांकि समिति के दस सदस्य फिल्हाल जमानत पर बाहर आ गए हैं। लेकिन तत्कालीन सभा सचिव लगभग 11 माह से जेल में बंद है। उधर, थाना प्रभारी सतपाल शर्मा ने मामले की पुष्टि की है।
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उल्लेखनीय है कि विकास खंड झंडूता के तहत आने वाली दी तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा में हुए करोडों रुपये के घोटाले के उजागर होने के बाद पिछले साल 16 मार्च को सभा सचिव पर धोखाधड़ी व जालसाजी करने पर मामला दर्ज किया गया था। 27 मार्च को जिला पंजीयक अधिकारी बिलासपुर के आदेशानुसार सचिव को अपने पद से हटा दिया गया। पुलिस ने मामले की गहनता से छानबीन की और सचिव को 15 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद घोटाले में अहम भूमिका निभाने वाले दो बाहरी प्रदेश के व्यक्तियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था। संघर्ष समिति के दबाव व पुलिस के हत्थे लगे कुछ सुरागों के तहत तत्कालीन प्रबंध समिति के दस अन्य लोगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। सभी आरोपी पहले पुलिस हिरासत में और 13 सितंबर के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे। हालांकि समिति के दस सदस्य फिल्हाल जमानत पर बाहर आ गए हैं। लेकिन तत्कालीन सभा सचिव लगभग 11 माह से जेल में बंद है। उधर, थाना प्रभारी सतपाल शर्मा ने मामले की पुष्टि की है।
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