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Bilaspur News: पुलकित लोहड़ी की भोर में, चहचहाते पंछियों के शोर

Sun, 14 Jan 2024 11:15 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2024 11:15 PM IST
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In the morning of Pulkit Lohri, the sound of chirping birds
- घुमारवीं में आयोजित हुई लेखक संघ की संगोष्ठी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। लेखक संघ बिलासपुर की मासिक बैठक और संगोष्ठी का आयोजन घुमारवीं में किया गया। बैठक की अध्यक्षता डॉ. रविंद्र ठाकुर ने की। इस दौरान डॉ. अनेक राम सांख्यान के पहाड़ी काव्य संग्रह हिम काव्य लहरें किताब का विमोचन किया गया।

संगोष्ठी में साहित्यकारों ने विभिन्न प्रस्तुतियां दी। कांगड़ा की प्रतिभा शर्मा ने छैल मता लिखेया तू पढ़ी कर दिख पहाड़ी रचना प्रस्तुत की। प्रीति शर्मा मगर मेरा नहीं कुछ भी, शीला सिंह ने राम के चरित्र और सिद्धांतों को अपनाना ही श्रेष्ठ कविता प्रस्तुत की। कविता सिसोदिया विरक्त ने एहसास जन्म मरण का, कुसुम लता ने अब मुझको भी सम्मान मिले, अनीता रानी ने सुणो सुणो भलयो लोको सुणो, रचना चंदेल ने राम हुए हैं कितने और प्रमाण दे कविता प्रस्तुत की। जसवंत सिंह चंदेल ने नववर्ष की शुभकामनाएं, डॉ.रविंद्र ठाकुर ने पुलकित लोहड़ी की भोर में, चहचहाते पंछियों के शोर ने, बलदेव सांख्यान ने पहाड़ी गाना तू बाहीं रे सरहाने देख्यां सौंदी, देख्यां मेरी याद औंदी प्रस्तुत किया। ललिता कश्यप ने गरजे बरसे दिन रेन सदा, जब सावन नाद बजावत है, देवेंद्र ठाकुर ने मकर संक्रांति आई सबके चेहरे पर खुशियां लाई, डॉ. लेखराम शर्मा ने करसानी छड़ी ने खेत खिले पाई ते, रविंद्र कुमार शर्मा ने चंडीगढ़ मनाली फोरलेन बणया, लक्खां ते करोड़ां दा क्लेम बणया प्रस्तुति दी। कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने उत्तर मिला होते रहते हैं जी ऐसे हादसे, डॉ. अनेक राम संख्या ने उद्धव से हमें ज्ञान दिलाओ राधा गोपालन को दर्श दिखाओ कविता प्रस्तुत की। वीणा वर्धन ने औरत तेरे संघर्षा री कहाणी, मीना चंदेल ने तब समझना समझदार हो गए, सुशील पुंडीर परिंदा कविता प्रस्तुत की। डॉ. अभिलाषा शर्मा ने अपनी मधुर आवाज में पहाड़ी लोक गीत आंगण साडे च अंबे दा बूटा, हेठ बैठया काला काग प्रस्तुत किया। भीम सिंह नेगी ने बूंद बूंद को तरसेंगे, रविंद्र साथी ने आवा अज्ज नानियां दादियां रा, जमाना करिए याद। डॉ. प्रकाश चंद ने भ्यागा तड़के कुकड़े दिति चाहंग और संसार चंद कुटलैहडिय़ा ने नया वर्ष पर अपनी रचना प्रस्तुत की। शिमला से आई वसुंधरा धर्माणी ने वह ठिठुरती सिमटी बच्चे को शाल में बांधती, रविंद्र चंदेल कमल ने पहाड़ों की शान है प्रकृति, कण-कण चहुं ओर, हेमराज शर्मा ने आज राम अयोध्या आए जग रही दीप माला, मास्टर शिवाय ने लोहड़ी पंज पंज दस, आगे मिली बस, बृजलाल लखनपाल ने मेरीये नमाणिए जिंदे, बुनी लया मकड़ी जाल, नरैनू राम हितैषी ने आओ मिलके गायें मोहब्बत के अफसाने कविता प्रस्तुत की। रवींद्र कुमार शर्मा ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित, डॉ. लेखराम शर्मा, डॉ. राजेश चौहान, और बृजलाल लखनपाल मौजूद रहे।
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