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गुरमत शहीदी समागम में जत्थों ने शबद कीर्तन से संगत को किया निहाल
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बिलासपुर। दशमेश पिता श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चारों साहिबजादे व माता गूजर कौर जी का शहीदी समागम डिबडिबा गुरुद्वारे में मनाया गया। समागम में विभिन्न जत्थों ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। कथावाचक भाई करमजीत सिंह ने कहा के गुरु का नाम लेने से ही सारे दु:ख खुद ही खत्म हो जाते हैं।
दशमेश सेवा सोसाइटी व समूह साध संगत डिबडिबा के तत्वावधान में ग्राम डिबडिबा स्थित गुरुद्वारा कलगीधर खालसा दरबार में शुक्रवार शहीदी समागम श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह नित नेम का पाठ व आसा दी वार का कीर्तन हुआ। इसके बाद श्री गुरु महाराज की पालकी सजाई गई और परंपरागत ढंग से स्थापना की गई। इसके बाद समागम में पहुंचे भाई दलजीत सिंह खालसा के कविशरी जत्थे, भाई फतेहजीत सिंह के रागी जत्थे, भाई हरजीत सिंह के हजूरी रागी जत्थे ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। इसके बाद रुद्रपुर से आए हजूरी कथावाचक भाई करमजीत सिंह ने शहीदों के इतिहास को दोहराया और संगत को इतिहास की जानकारी दी। इस दौरान गुरु का अटूट लंगर भी बरताया गया। व्यवस्था में दशमेश सेवा सोसाइटी के सेवादारों के साथ ही कुलबंत सिंह रब जी, दलजीत सिंह गोराया, जोगेंद्र सिंह, सुखदीप सिंह चरमा, मिठ्ठू चीमा, गुरसेवक सिंह, देवेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि मुख्य रहे। संवाद
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दशमेश सेवा सोसाइटी व समूह साध संगत डिबडिबा के तत्वावधान में ग्राम डिबडिबा स्थित गुरुद्वारा कलगीधर खालसा दरबार में शुक्रवार शहीदी समागम श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह नित नेम का पाठ व आसा दी वार का कीर्तन हुआ। इसके बाद श्री गुरु महाराज की पालकी सजाई गई और परंपरागत ढंग से स्थापना की गई। इसके बाद समागम में पहुंचे भाई दलजीत सिंह खालसा के कविशरी जत्थे, भाई फतेहजीत सिंह के रागी जत्थे, भाई हरजीत सिंह के हजूरी रागी जत्थे ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। इसके बाद रुद्रपुर से आए हजूरी कथावाचक भाई करमजीत सिंह ने शहीदों के इतिहास को दोहराया और संगत को इतिहास की जानकारी दी। इस दौरान गुरु का अटूट लंगर भी बरताया गया। व्यवस्था में दशमेश सेवा सोसाइटी के सेवादारों के साथ ही कुलबंत सिंह रब जी, दलजीत सिंह गोराया, जोगेंद्र सिंह, सुखदीप सिंह चरमा, मिठ्ठू चीमा, गुरसेवक सिंह, देवेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि मुख्य रहे। संवाद
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