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Bilaspur News: घुमारवीं क्षेत्र में सड़क किनारे अस्थिर पहाड़ियों से बढ़ रहा खतरा

Thu, 09 Oct 2025 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 09 Oct 2025 11:13 PM IST
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In Ghumarwin area, unstable hills along the road are increasing the danger.
घुमारवीं में पहाड़ी से हुआ भूस्खलन। संवाद
भल्लू बस हादसे के बाद लोगों के मन में बैठा डर
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जोल–बरोटा–लदरौर सड़क पर हादसों का खतरा

संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल के तहत आने वाली कई सड़कों के किनारे मौजूद अस्थिर पहाड़ियां अब आम जनता के लिए भय का कारण बन चुकी हैं। भल्लू पुल हादसे के बाद लोगों के मन में यह डर और गहरा गया है। बरठीं के समीप भल्लू पुल पर हुए दर्दनाक हादसे ने लोगों के दिलों में ऐसा डर बैठा दिया है कि अब जहां-जहां पहाड़ियां सड़क के करीब हैं, वहां से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं लगता।

लढ़याणी के समीप सड़क पर लगातार मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह सड़क भराड़ी क्षेत्र को घुमारवीं-बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ती है, जिस पर रोजाना दर्जनों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। हर दिन यहां की स्थिति और अधिक खतरनाक होती जा रही है। बारिश के मौसम में तो हालात और बिगड़ जाते हैं, जब पहाड़ियां ढीली होकर सड़क पर भारी मात्रा में मलबा गिरा देती हैं। कई बार स्थानीय लोगों ने इस बारे में प्रशासन को सूचित भी किया, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबा गिरने की घटनाएं अब सामान्य हो गई हैं। जब भी हल्की बारिश होती है, सड़क पर मिट्टी और पत्थर गिरने लगते हैं। वाहन हर दिन इस सड़क से गुजरते हैं, लेकिन अब डर के साथ सफर करना मजबूरी बन गया है। डंगार के नजदीक जोल–बरोटा–लदरौर सड़क की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। इस मार्ग पर लगातार ल्हासे गिर रहे हैं। यह सड़क वैसे ही काफी संकरी है और एक ओर गहरी खाई और दूसरी ओर पहाड़ी। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी चूक भी बड़े हादसा करा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर सड़क इतनी तंग हो गई है कि दो वाहनों का एक साथ निकलना मुश्किल हो जाता है। घुमारवीं-कुठेड़ा मार्ग भी खतरों भरा हो चुका है। इस सड़क पर भी मलबा लगातार सड़क पर गिरता जा रहा है। भगेड़-पनोल सड़क के हालात भी डरावने बने हुए हैं। वहीं पनोह-हरलोग सड़क पर भी कई ऐसे स्पॉट हैं जो हादसों का कारण बन सकते हैं। वाहन चालकों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द इन पहाड़ियों की कटाई या सुरक्षात्मक दीवारें बनवानी चाहिए। भूस्खलन इलाकों में कई जगह चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं। कई जगहों पर तो हालात ऐसे हैं कि चालक को पहले से खतरे का अंदाजा तक नहीं होता। वहीं, कुछ स्थानों पर सड़क के किनारे गिरे पत्थरों को हटाने के लिए कोई नियमित व्यवस्था नहीं की गई है। यह सब मिलकर दुर्घटनाओं की संभावनाओं को और बढ़ा देते हैं।
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अधीक्षण अभियंता जीत सिंह ठाकुर ने बताया कि विभाग इस समस्या से निपटने के लिए कार्य कर रहा है।
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