हिमाचल प्रदेश: एम्स बिलासपुर में मानसिक रोगियों के लिए अब नई तकनीक, 195 सवाल करेंगे रोग का निदान
एम्स बिलासपुर के मनोरोग विभाग में जल्द ही आधुनिक मनोवैज्ञानिक व्यक्तित्व परीक्षण प्रणाली मिलियन क्लीनिकल मल्टीएक्सियल इनवेंटरी-4 (एमसीएमआई-4) स्थापित की जाएगी। तकनीक उपलब्ध होने के बाद मनोरोग विशेषज्ञों को मरीजों की मानसिक स्थिति, व्यवहार और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं का आकलन करने में मदद मिलेगी।
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मानसिक रोगों की पहचान और उपचार को अधिक सटीक बनाने की दिशा में एम्स बिलासपुर में नई तकनीक शुरू होने जा रही है। संस्थान के मनोरोग विभाग में जल्द ही आधुनिक मनोवैज्ञानिक व्यक्तित्व परीक्षण प्रणाली मिलियन क्लीनिकल मल्टीएक्सियल इनवेंटरी-4 (एमसीएमआई-4) स्थापित की जाएगी। यह सुविधा शुरू होने से मानसिक रोगों के निदान की प्रक्रिया और वैज्ञानिक व सटीक हो जाएगी।
तकनीक उपलब्ध होने के बाद मनोरोग विशेषज्ञों को मरीजों की मानसिक स्थिति, व्यवहार और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं का आकलन करने में मदद मिलेगी। साथ ही मरीजों को भी जिला स्तर पर ही विश्वस्तरीय मनोवैज्ञानिक जांच की सुविधा मिल सकेगी। इस परीक्षण प्रणाली में मरीज को 195 सही या गलत प्रकार के सवालों के जवाब देने होंगे। ये सवाल व्यक्ति के व्यवहार, सोच, भावनात्मक स्थिति और सामाजिक संबंधों से जुड़े होते हैं। मरीज के सभी जवाब पूरे होते ही सॉफ्टवेयर खुद उनका विश्लेषण कर विस्तृत व्याख्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर देगा।
इस रिपोर्ट में मरीज के व्यक्तित्व पैटर्न, मानसिक स्थिति और संभावित मनोवैज्ञानिक समस्याओं का विवरण शामिल होगा। इससे डॉक्टरों को मरीज की समस्या को समझने और उपचार की दिशा तय करने में आसानी होगी। यह प्रणाली मानसिक स्वास्थ्य के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम करती है और डीएसएम -5-टीआर के नवीनतम दिशानिर्देशों पर आधारित है। दुनिया के कई चिकित्सा संस्थानों में क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए इसका उपयोग होता है।
एम्स बिलासपुर में यह तकनीक उपलब्ध होने से प्रदेश के मरीजों को भी आधुनिक मानसिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल सकेगी। केवल सामान्य मानसिक तनाव, चिंता या अवसाद ही नहीं व्यक्तित्व से जुड़े जटिल मानसिक विकारों की पहचान भी संभव होगी।
इस प्रणाली के माध्यम से मरीज की जांच 15 व्यक्तित्व पैमानों, सात क्लीनिकल सिंड्रोम पैमानों और तीन गंभीर क्लीनिकल सिंड्रोम पैमानों पर की जाएगी। इन पैमानों के आधार पर डॉक्टर यह समझ सकेंगे कि मरीज के व्यवहार में बदलाव का वास्तविक कारण क्या है और उसके लिए किस प्रकार का उपचार उपयुक्त रहेगा। एम्स प्रशासन ने इस तकनीक की आपूर्ति के लिए 24 मार्च 2026 तक कोटेशन आमंत्रित किए हैं। आपूर्ति आदेश जारी होने के बाद करीब 15 दिनों के भीतर इस तकनीक को मनोरोग विभाग में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पूरी प्रक्रिया मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष और सह आचार्य की देखरेख में पूरी की जा रही है। एम्स बिलासपुर में यह सुविधा शुरू होने से प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी और मरीजों को अधिक सटीक जांच व बेहतर उपचार मिल सकेगा।
बिलासपुर। हृदय रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स बिलासपुर में कार्डियोवैस्कुलर सर्जरी (हृदय संबंधी ऑपरेशन) की सुविधाओं को और मजबूत किया जा रहा है। संस्थान में ऐसे अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनकी कमी के कारण अब तक मरीजों को चंडीगढ़, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।
नई सुविधाओं के जुड़ने से एम्स बिलासपुर में दिल से जुड़ी जटिल बीमारियों का इलाज पहले की तुलना में अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। इससे न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश में हृदय रोगों के उपचार की व्यवस्था भी मजबूत होगी। संस्थान में मैकेनिकल हार्ट वाल्व और विशेष प्रकार के ग्राफ्ट्स मंगवाए जा रहे हैं। इन उपकरणों की मदद से हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट और बाईपास सर्जरी जैसे जटिल ऑपरेशन अब स्थानीय स्तर पर ही संभव हो पाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार इन उपकरणों के उपलब्ध होने से ऑपरेशन की गुणवत्ता और सफलता दर में भी सुधार होगा। एम्स मरीजों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों को भी शामिल कर रहा है।
अस्पताल में नीडल-फ्री यानी बिना सुई वाले सिस्टम और आधुनिक सैंपलिंग किट उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनकी मदद से मरीजों से रक्त या अन्य नमूने लेने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और आसान होगी। इससे बार-बार सुई चुभाने से होने वाला दर्द कम होगा और अस्पताल में होने वाले संक्रमण का खतरा भी काफी हद तक घटेगा।