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Bilaspur News: 448 स्वस्थ, 406 क्षय रोगियों का उपचार जारी
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टीबी मुक्त पंचायत पहल में छह संकेतकों पर खरा उतरने वाली पंचायतें होंगी सम्मानित
जिले में 2023 में हुई 23,377 अनुमानित टीबी के मामलों की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में 2023 में कुल 23,377 अनुमानित टीबी के मामलों की जांच विभाग की ओर से की गई। 854 क्षय रोग के मामले मिले, जिनका उपचार जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में चलाया गया। इनमें से 448 पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 406 क्षय रोगियों का उपचार जारी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला बिलासपुर डॉक्टर प्रवीण कुमार ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी मुक्त पंचायत पहल प्रधानमंत्री ने शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत हर पंचायत को मुख्य 6 संकेतकों पर आंका जाएगा। जो पंचायत 6 संकेतकों पर खरी उतरती है, उसको उपायुक्त की ओर से 24 मार्च को जिलास्तर पर सम्मानित किया जाएगा। पहले वर्ष पंचायत को महात्मा गांधी की कांस्य की प्रतिमा देकर सम्मानित किया जाएगा। दूसरे वर्ष यदि पंचायत टीबी मुक्त स्थिति के लिए सफलतापूर्वक सत्यापित की जाती है तो उसे महात्मा गांधी की रजत की प्रतिमा से सम्मानित किया जाएगा। तीसरे वर्ष यदि पंचायत टीबी मुक्त स्थिति के लिए सफलतापूर्वक सत्यापित की जाती है तो उसे महात्मा गांधी की स्वर्ण की प्रतिमा से सम्मानित किया जाए। यदि पंचायत चौथे वर्ष में टीबी मुक्त स्थिति के लिए सफलतापूर्वक सत्यापित की जाती है तो पंचायत को टीबी मुक्त स्थिति से सम्मानित किया जाएगा। इन संकेतकों में प्रत्येक एक हजार लोगों पर संभावित टीबी रोग परीक्षण दर 30 से अधिक होना चाहिए। प्रत्येक एक हजार जनसंख्या पर एक या उससे कम टीबी रोगी होने चाहिए। पंचायत में कुल टीबी रोगियों में से 85 प्रतिशत टीबी रोगियों द्वारा अपना इलाज सफलतापूर्वक पूरा किया जाना चाहिए। बलगम की जांच द्वारा टीबी पॉजिटिव पाए गए सभी रोगियों में से 60 प्रतिशत की यूडीएसटी जांच होनी चाहिए। ग्राम पंचायत में टीबी का इलाज ले रहे सभी टीबी रोगियों को कम से कम एक किस्त निक्षय पोषण योजना के तहत प्राप्त होनी चाहिए। ग्राम पंचायत में सहमति दिए हुए सभी टीबी रोगियों को निक्षय मित्रों द्वारा पोषण सहायता प्राप्त होनी चाहिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर ने लोगों से जिले को टीबी मुक्त बनाने में अपना सहयोग देने, कोई भी लक्षण महसूस होने पर अपनी व अपनों की जांच करवाने की अपील की। टीबी के लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना, दो सप्ताह तक बुखार रहना, खांसी में खून आना, थकान, सीने में दर्द, सांस फूलना, वजन घटना, रात में पसीना आना शामिल हैं।
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इनसेट
जिले की हर पंचायत को इन छह संकेतकों पर पंचायतीराज विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंका गया है। इसमें जिले की 30 पंचायतें खरी उतरी हैं। स्वास्थ्य और पंचायतीराज विभाग हिमाचल प्रदेश के सहयोग से इन पंचायतों की टीबी मुक्त स्थिति के लिए सत्यापन प्रक्रिया फरवरी 2024 से शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य और पंचायतीराज विभाग के सहयोग से एक जिला सत्यापन टीम का गठन किया गया है। इसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अध्यक्ष, जिला क्षय रोग अधिकारी को संयोजक, जिला पंचायतराज कार्यालय या उनके प्रतिनिधि को सदस्य, जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी बनाम राज्य चिकित्सा संघ के एक प्रतिनिधि को सदस्य, सामुदायिक चिकित्सा विभाग का एक प्रतिनिधि, मेडिकल कॉलेज एम्स बिलासपुर भी शामिल हैं।
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जिले में 2023 में हुई 23,377 अनुमानित टीबी के मामलों की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में 2023 में कुल 23,377 अनुमानित टीबी के मामलों की जांच विभाग की ओर से की गई। 854 क्षय रोग के मामले मिले, जिनका उपचार जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में चलाया गया। इनमें से 448 पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 406 क्षय रोगियों का उपचार जारी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला बिलासपुर डॉक्टर प्रवीण कुमार ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी मुक्त पंचायत पहल प्रधानमंत्री ने शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत हर पंचायत को मुख्य 6 संकेतकों पर आंका जाएगा। जो पंचायत 6 संकेतकों पर खरी उतरती है, उसको उपायुक्त की ओर से 24 मार्च को जिलास्तर पर सम्मानित किया जाएगा। पहले वर्ष पंचायत को महात्मा गांधी की कांस्य की प्रतिमा देकर सम्मानित किया जाएगा। दूसरे वर्ष यदि पंचायत टीबी मुक्त स्थिति के लिए सफलतापूर्वक सत्यापित की जाती है तो उसे महात्मा गांधी की रजत की प्रतिमा से सम्मानित किया जाएगा। तीसरे वर्ष यदि पंचायत टीबी मुक्त स्थिति के लिए सफलतापूर्वक सत्यापित की जाती है तो उसे महात्मा गांधी की स्वर्ण की प्रतिमा से सम्मानित किया जाए। यदि पंचायत चौथे वर्ष में टीबी मुक्त स्थिति के लिए सफलतापूर्वक सत्यापित की जाती है तो पंचायत को टीबी मुक्त स्थिति से सम्मानित किया जाएगा। इन संकेतकों में प्रत्येक एक हजार लोगों पर संभावित टीबी रोग परीक्षण दर 30 से अधिक होना चाहिए। प्रत्येक एक हजार जनसंख्या पर एक या उससे कम टीबी रोगी होने चाहिए। पंचायत में कुल टीबी रोगियों में से 85 प्रतिशत टीबी रोगियों द्वारा अपना इलाज सफलतापूर्वक पूरा किया जाना चाहिए। बलगम की जांच द्वारा टीबी पॉजिटिव पाए गए सभी रोगियों में से 60 प्रतिशत की यूडीएसटी जांच होनी चाहिए। ग्राम पंचायत में टीबी का इलाज ले रहे सभी टीबी रोगियों को कम से कम एक किस्त निक्षय पोषण योजना के तहत प्राप्त होनी चाहिए। ग्राम पंचायत में सहमति दिए हुए सभी टीबी रोगियों को निक्षय मित्रों द्वारा पोषण सहायता प्राप्त होनी चाहिए।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर ने लोगों से जिले को टीबी मुक्त बनाने में अपना सहयोग देने, कोई भी लक्षण महसूस होने पर अपनी व अपनों की जांच करवाने की अपील की। टीबी के लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना, दो सप्ताह तक बुखार रहना, खांसी में खून आना, थकान, सीने में दर्द, सांस फूलना, वजन घटना, रात में पसीना आना शामिल हैं।
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जिले की हर पंचायत को इन छह संकेतकों पर पंचायतीराज विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंका गया है। इसमें जिले की 30 पंचायतें खरी उतरी हैं। स्वास्थ्य और पंचायतीराज विभाग हिमाचल प्रदेश के सहयोग से इन पंचायतों की टीबी मुक्त स्थिति के लिए सत्यापन प्रक्रिया फरवरी 2024 से शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य और पंचायतीराज विभाग के सहयोग से एक जिला सत्यापन टीम का गठन किया गया है। इसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अध्यक्ष, जिला क्षय रोग अधिकारी को संयोजक, जिला पंचायतराज कार्यालय या उनके प्रतिनिधि को सदस्य, जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी बनाम राज्य चिकित्सा संघ के एक प्रतिनिधि को सदस्य, सामुदायिक चिकित्सा विभाग का एक प्रतिनिधि, मेडिकल कॉलेज एम्स बिलासपुर भी शामिल हैं।