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मरीजों को नहीं मिल रही है अल्ट्रासाउंड, ईसीजी जैसी सुविधाएं
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बरठीं(बिलासपुर)। बरठीं क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दस साल पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला था लेकिन दस साल बाद भी लोगों को अस्पताल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर की ही सुविधाएं मिल रही हैं। बीते दस वर्षों में न ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण हुआ और न ही सिविल अस्पताल के स्तर की मशीनरी लगाई गई। इसके कारण लोगों में खासा रोष है।
उल्लेखनीय है कि बरठीं क्षेत्र की पच्चीस पंचायतों की हजारों की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाले स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा भले ही सिविल अस्पताल कर दिया हो लेकिन उसमें लोगों को सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर मिल रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन के कमरों में ही जैसे-तैसे सिविल अस्पताल का कार्य चलाया जा रहा है। वर्तमान में इस अस्पताल में चिकित्सकों सहित बारह कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं पचास विस्तर की जगह मात्र बारह ही विस्तर हैं। इस कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को सिविल अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल में कमरों के अभाव के कारण भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड, ईसीजी जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
बताते चलें कि बरठीं में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को साल 2010 में सिविल अस्पताल का दर्जा मिला था लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बाद भी अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन में ही चल रहा है। अस्पताल में चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों के पद नहीं भरे गए हैं। यह अस्पताल मात्र कहने के लिए ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना है बाकि की सुविधाएं सब प्राथमिक स्तर की मिल रही हैं।
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लोगों को अपना इलाज करवाने के लिए कई किलोमीटर दूरी तय कर बिलासपुर या घुमारवीं आना पड़ता है। मजबूरी वश निजी अस्पतालों का रुख करने वालों से मोटी रकम वसूली जा रही है जिससे लोगों में भारी रोष है। उधर कार्यकारी बीएमओ डॉ. अरविंद टंडन ने बताया कि यह सरकार के ध्यान में है और जल्दी ही सभी समस्याओं का निपटारा कर दिया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि बरठीं क्षेत्र की पच्चीस पंचायतों की हजारों की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाले स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा भले ही सिविल अस्पताल कर दिया हो लेकिन उसमें लोगों को सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर मिल रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन के कमरों में ही जैसे-तैसे सिविल अस्पताल का कार्य चलाया जा रहा है। वर्तमान में इस अस्पताल में चिकित्सकों सहित बारह कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं पचास विस्तर की जगह मात्र बारह ही विस्तर हैं। इस कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को सिविल अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल में कमरों के अभाव के कारण भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड, ईसीजी जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
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बताते चलें कि बरठीं में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को साल 2010 में सिविल अस्पताल का दर्जा मिला था लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बाद भी अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन में ही चल रहा है। अस्पताल में चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों के पद नहीं भरे गए हैं। यह अस्पताल मात्र कहने के लिए ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना है बाकि की सुविधाएं सब प्राथमिक स्तर की मिल रही हैं।
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लोगों को अपना इलाज करवाने के लिए कई किलोमीटर दूरी तय कर बिलासपुर या घुमारवीं आना पड़ता है। मजबूरी वश निजी अस्पतालों का रुख करने वालों से मोटी रकम वसूली जा रही है जिससे लोगों में भारी रोष है। उधर कार्यकारी बीएमओ डॉ. अरविंद टंडन ने बताया कि यह सरकार के ध्यान में है और जल्दी ही सभी समस्याओं का निपटारा कर दिया जाएगा।