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जीएसटी सुधार से आम आदमी और छोटे व्यापारियों को मिली राहत :डॉ. ऋतिक
Sun, 21 Sep 2025 11:07 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 21 Sep 2025 11:07 PM IST
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-टैक्स स्लैब सरल और जनहितैषी, रोजमर्रा की चीजें सस्ती, हानिकारक वस्तुएं महंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। सोमवार से पूरे देश में लागू हुआ जीएसटी 2.0, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरल, पारदर्शी और जनता के हित में बनाने का प्रयास किया गया है। डॉ. ऋतिक शर्मा, प्रांत अध्यक्ष अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन, ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि यह आम आदमी की जेब में वास्तविक राहत लेकर आएगा। जीएसटी के पुराने जटिल स्लैब 5, 12, 18 और 28 को खत्म कर केवल दो स्लैब 5 और 18 कर दिए गए हैं। वहीं सिगरेट, पान मसाला, शराब और विलासिता की वस्तुओं पर 40 फीसदी टैक्स लागू किया गया है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि आम आदमी की जरूरतें सस्ती होंगी और हानिकारक वस्तुएं महंगी। इस बदलाव का असर सीधे हर घर पर पड़ रहा है। साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की चीजें अब पांच फीसदी पर उपलब्ध होंगी। आटा, दालें, घी, मक्खन, पनीर, दूध उत्पाद और पैकेज्ड खाद्य सामग्री की कीमतें भी कम हुई हैं। बच्चों की कॉपियां, किताबें और स्टेशनरी पर टैक्स बोझ घट गया है। डॉ. ऋतिक शर्मा ने कहा कि इससे रसोई का खर्च हल्का होगा। छोटे व्यापारियों और उद्योगों को भी इस सुधार से राहत मिलेगी। जटिल नियमों की जगह सरल ढांचा होने से कारोबार में आसानी होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। एमएसएमई क्षेत्र, जो भारत की रीढ़ है, इससे मजबूती पाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। सोमवार से पूरे देश में लागू हुआ जीएसटी 2.0, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरल, पारदर्शी और जनता के हित में बनाने का प्रयास किया गया है। डॉ. ऋतिक शर्मा, प्रांत अध्यक्ष अखिल भारतीय चिकित्सक एसोसिएशन, ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि यह आम आदमी की जेब में वास्तविक राहत लेकर आएगा। जीएसटी के पुराने जटिल स्लैब 5, 12, 18 और 28 को खत्म कर केवल दो स्लैब 5 और 18 कर दिए गए हैं। वहीं सिगरेट, पान मसाला, शराब और विलासिता की वस्तुओं पर 40 फीसदी टैक्स लागू किया गया है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि आम आदमी की जरूरतें सस्ती होंगी और हानिकारक वस्तुएं महंगी। इस बदलाव का असर सीधे हर घर पर पड़ रहा है। साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की चीजें अब पांच फीसदी पर उपलब्ध होंगी। आटा, दालें, घी, मक्खन, पनीर, दूध उत्पाद और पैकेज्ड खाद्य सामग्री की कीमतें भी कम हुई हैं। बच्चों की कॉपियां, किताबें और स्टेशनरी पर टैक्स बोझ घट गया है। डॉ. ऋतिक शर्मा ने कहा कि इससे रसोई का खर्च हल्का होगा। छोटे व्यापारियों और उद्योगों को भी इस सुधार से राहत मिलेगी। जटिल नियमों की जगह सरल ढांचा होने से कारोबार में आसानी होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। एमएसएमई क्षेत्र, जो भारत की रीढ़ है, इससे मजबूती पाएगा।