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गाय की सेवा से गोबिंद होते हैं प्रसन्न : विजय
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- श्रीमद्भागवत कथा में सुनाई श्रीराम और श्रीकृष्ण की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। श्रीराधे-कृष्णा कामधेनु गोशाला करयालग सोहणी देवी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करवाते हुए कथा वाचक पंडित विजय शर्मा ने गाय की महत्ता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जहां गो माता है वहां गोबिंद हैं और गाय की जब-जब सेवा होती है तब-तब गोबिंद प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने कहा कि गोग्रास नियमित रूप से जो व्यक्ति निकलेगा उसे पुण्य की प्राप्ति होगी। प्रभु केवल प्रेम के भूखे हैं। कर्मयोगी बनें और अपना दायित्व निभाते हुए प्रभु की भक्ति करें। सात्विकता का भाव मन में रखें और इसका आचरण करें। पंडित शर्मा ने कहा कि धर्म की राह में कितनी भी विपत्ति आए आप अडिग रहें। प्रभु आपका कल्याण जरूर करेंगे। उन्होंने गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन के साथ ही प्रभु के मोहिनी अवतार, वामन अवतार, राम अवतार और श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई गई। पंडित शर्मा ने कहा कि मनुष्य के अच्छे और बुरे का प्रमाण आईना होता है। आईने में अपना चेहरे देखते ही पाप-पुण्य दोनों स्मरण हो जाते हैं। पाप करते समय आंखों में पट्टी बंध जाती है। पाप करने की प्रवृत्ति जब हावी होती है तो मनुष्य को कुछ भी नजर नहीं आता। बाहर से सात्विक और अंतर्मन में राक्षसी प्रवृत्ति रहेगी तो उस मानव को राहु की तरह श्री हरि विष्णु दंड देंगे। अमृत का पान करने के लिए देवता का रूप धारण कर कतार में बैठे राहु की सच्चाई जानते ही श्री हरि ने सुदर्शन चक्र से गर्दन काट दी थी। उन्होंने कहा कि संसार में परोपकार करने के लिए भगवान कोई भी स्वरूप धारण कर लेते हैं। प्रभु को भक्ति और देवत्व अति प्रिय हैं। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन में 14 रत्न निकले पहले विष निकला उसके बाद अमृत। जगत के कल्याण के लिए विष को अपने कंठ में धारण कर भगवान शिव ने अमृत देवों को दिया इसलिए वह नीलकंठ देवाधिदेव कहलाए। इस मौके पर गोशाला के प्रबंधक अश्विनी कपिल, प्रधान रतन चंद्र डोगरा, उपाध्यक्ष जगदीश चंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष जोगेंद्र पाल, मुख्य संरक्षक अमी चंद्र शास्त्री सहित अन्य मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। श्रीराधे-कृष्णा कामधेनु गोशाला करयालग सोहणी देवी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करवाते हुए कथा वाचक पंडित विजय शर्मा ने गाय की महत्ता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जहां गो माता है वहां गोबिंद हैं और गाय की जब-जब सेवा होती है तब-तब गोबिंद प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने कहा कि गोग्रास नियमित रूप से जो व्यक्ति निकलेगा उसे पुण्य की प्राप्ति होगी। प्रभु केवल प्रेम के भूखे हैं। कर्मयोगी बनें और अपना दायित्व निभाते हुए प्रभु की भक्ति करें। सात्विकता का भाव मन में रखें और इसका आचरण करें। पंडित शर्मा ने कहा कि धर्म की राह में कितनी भी विपत्ति आए आप अडिग रहें। प्रभु आपका कल्याण जरूर करेंगे। उन्होंने गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन के साथ ही प्रभु के मोहिनी अवतार, वामन अवतार, राम अवतार और श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई गई। पंडित शर्मा ने कहा कि मनुष्य के अच्छे और बुरे का प्रमाण आईना होता है। आईने में अपना चेहरे देखते ही पाप-पुण्य दोनों स्मरण हो जाते हैं। पाप करते समय आंखों में पट्टी बंध जाती है। पाप करने की प्रवृत्ति जब हावी होती है तो मनुष्य को कुछ भी नजर नहीं आता। बाहर से सात्विक और अंतर्मन में राक्षसी प्रवृत्ति रहेगी तो उस मानव को राहु की तरह श्री हरि विष्णु दंड देंगे। अमृत का पान करने के लिए देवता का रूप धारण कर कतार में बैठे राहु की सच्चाई जानते ही श्री हरि ने सुदर्शन चक्र से गर्दन काट दी थी। उन्होंने कहा कि संसार में परोपकार करने के लिए भगवान कोई भी स्वरूप धारण कर लेते हैं। प्रभु को भक्ति और देवत्व अति प्रिय हैं। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन में 14 रत्न निकले पहले विष निकला उसके बाद अमृत। जगत के कल्याण के लिए विष को अपने कंठ में धारण कर भगवान शिव ने अमृत देवों को दिया इसलिए वह नीलकंठ देवाधिदेव कहलाए। इस मौके पर गोशाला के प्रबंधक अश्विनी कपिल, प्रधान रतन चंद्र डोगरा, उपाध्यक्ष जगदीश चंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष जोगेंद्र पाल, मुख्य संरक्षक अमी चंद्र शास्त्री सहित अन्य मौजूद रहे।
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