{"_id":"6a9b0fdb00077e8635063241","slug":"ghumarwin-court-grants-relief-regarding-delay-in-filing-written-reply-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-166987-2026-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: लिखित जवाब में देरी पर घुमारवीं अदालत ने दी राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: लिखित जवाब में देरी पर घुमारवीं अदालत ने दी राहत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहा- मामला तकनीकी आधार पर नहीं, गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं ने एक मामले में प्रतिवादी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को स्वीकार करते हुए समय बढ़ाने का आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि न्याय का उद्देश्य मामले का फैसला केवल तकनीकी आधार पर करना नहीं, बल्कि उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना है।
प्रतिवादी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 1 के तहत आवेदन दायर कर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। आवेदन में देरी को जानबूझकर नहीं, बल्कि वास्तविक और सद्भावना के आधार पर हुई बताया गया। वादी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए आवेदन खारिज करने की मांग की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की न्यायाधीश सिमरनजीत कौर ने आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि सिविल न्याय व्यवस्था में प्रक्रिया न्याय का साधन है। न्यायहित में आवेदन स्वीकार करना उचित है, ताकि मामला केवल तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गुण-दोष के आधार पर तय हो। अदालत ने दर्ज किया कि लिखित जवाब पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद है। अब वादी पक्ष को रिप्लिकेशन दाखिल करने के लिए 6 अक्तूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं ने एक मामले में प्रतिवादी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को स्वीकार करते हुए समय बढ़ाने का आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि न्याय का उद्देश्य मामले का फैसला केवल तकनीकी आधार पर करना नहीं, बल्कि उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना है।
प्रतिवादी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 1 के तहत आवेदन दायर कर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। आवेदन में देरी को जानबूझकर नहीं, बल्कि वास्तविक और सद्भावना के आधार पर हुई बताया गया। वादी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए आवेदन खारिज करने की मांग की।
विज्ञापन
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की न्यायाधीश सिमरनजीत कौर ने आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि सिविल न्याय व्यवस्था में प्रक्रिया न्याय का साधन है। न्यायहित में आवेदन स्वीकार करना उचित है, ताकि मामला केवल तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गुण-दोष के आधार पर तय हो। अदालत ने दर्ज किया कि लिखित जवाब पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद है। अब वादी पक्ष को रिप्लिकेशन दाखिल करने के लिए 6 अक्तूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
विज्ञापन