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Bilaspur News: पूर्व सैनिक कैप्टन प्रेम लाल का निधन, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
Mon, 05 Jan 2026 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 05 Jan 2026 11:57 PM IST
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पूर्व सैनिक कैप्टन प्रेम लाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते पूर्व सैनिक कल्याण समिति के पदाधिकारी।
-1971 भारत-पाक युद्ध में निभाई अहम भूमिका, 8 डोगरा रेजिमेंट में दीं सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। उपमंडल सदर बिलासपुर की ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा के गांव रघुनाथपुरा निवासी पूर्व सैनिक कैप्टन प्रेम लाल का शनिवार को दिल्ली में निधन हो गया। रविवार को गोबिंद सागर झील के पास स्थित श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनकी बेटी मीना देवी और बेटे अरुण कुमार ने उन्हें अंतिम विदाई देते हुए कंधा दिया।
पूर्व सैनिक कल्याण समिति हिमाचल प्रदेश ने कैप्टन प्रेम लाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। कैप्टन प्रेम लाल की यूनिट 8 डोगरा (विक्टोरिया क्रॉस) की ओर से सूबेदार संजय कुमार और सूबेदार विक्रम ने पुष्प चक्र अर्पित किया, जबकि जनरल ऑफिसर कमांडिंग, पश्चिमी कमांड चंडीमंदिर की ओर से सूबेदार संदीप घोष ने श्रद्धांजलि दी। कैप्टन प्रेम लाल का जन्म पिता बसंता राम और माता पार्वती देवी के एक साधारण परिवार में हुआ। उन्होंने 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और फरवरी 1970 में भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट में भर्ती हुए। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद उनकी तैनाती 8 डोगरा में हुई। उन्होंने भारत–पाक युद्ध 1971 में भाग लिया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें आर्मी कमांडर मेडल से सम्मानित किया गया। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर (जम्मू-कश्मीर) और नेफा (अरुणाचल प्रदेश) जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दीं।
मध्यप्रदेश के महू स्थित भारतीय सेना के प्रशिक्षण संस्थान में दो कार्यकाल मिलाकर लगभग 10 वर्ष तक मुख्य प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने हजारों अधिकारियों, जेसीओ और जवानों को प्रशिक्षित कर सेना की विभिन्न रेजिमेंटों में भेजा। निस्वार्थ सेवा, ईमानदारी और उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई सैन्य सम्मानों से नवाजा गया। 15 अगस्त 1997 को उन्हें ऑनरेरी कैप्टन की रैंक प्रदान की गई। समिति के चेयरमैन कैप्टन संजय कुमार, कर्नल संदीप, कैप्टन धनी राम, सूबेदार चमन लाल, हवलदार कृष्ण चंद, सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक सुरेश नड्डा, सूबेदार संजय कुमार, सूबेदार विक्रम, सुरेश, हवलदार कृष्ण चंद, पूर्व प्रधान प्यारे लाल, कृष्ण लाल, छोटा राम सहित सैकड़ों पूर्व सैनिक और स्थानीय नागरिक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
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बरठीं (बिलासपुर)। उपमंडल सदर बिलासपुर की ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा के गांव रघुनाथपुरा निवासी पूर्व सैनिक कैप्टन प्रेम लाल का शनिवार को दिल्ली में निधन हो गया। रविवार को गोबिंद सागर झील के पास स्थित श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनकी बेटी मीना देवी और बेटे अरुण कुमार ने उन्हें अंतिम विदाई देते हुए कंधा दिया।
पूर्व सैनिक कल्याण समिति हिमाचल प्रदेश ने कैप्टन प्रेम लाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। कैप्टन प्रेम लाल की यूनिट 8 डोगरा (विक्टोरिया क्रॉस) की ओर से सूबेदार संजय कुमार और सूबेदार विक्रम ने पुष्प चक्र अर्पित किया, जबकि जनरल ऑफिसर कमांडिंग, पश्चिमी कमांड चंडीमंदिर की ओर से सूबेदार संदीप घोष ने श्रद्धांजलि दी। कैप्टन प्रेम लाल का जन्म पिता बसंता राम और माता पार्वती देवी के एक साधारण परिवार में हुआ। उन्होंने 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और फरवरी 1970 में भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट में भर्ती हुए। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद उनकी तैनाती 8 डोगरा में हुई। उन्होंने भारत–पाक युद्ध 1971 में भाग लिया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें आर्मी कमांडर मेडल से सम्मानित किया गया। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर (जम्मू-कश्मीर) और नेफा (अरुणाचल प्रदेश) जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दीं।
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मध्यप्रदेश के महू स्थित भारतीय सेना के प्रशिक्षण संस्थान में दो कार्यकाल मिलाकर लगभग 10 वर्ष तक मुख्य प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने हजारों अधिकारियों, जेसीओ और जवानों को प्रशिक्षित कर सेना की विभिन्न रेजिमेंटों में भेजा। निस्वार्थ सेवा, ईमानदारी और उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई सैन्य सम्मानों से नवाजा गया। 15 अगस्त 1997 को उन्हें ऑनरेरी कैप्टन की रैंक प्रदान की गई। समिति के चेयरमैन कैप्टन संजय कुमार, कर्नल संदीप, कैप्टन धनी राम, सूबेदार चमन लाल, हवलदार कृष्ण चंद, सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक सुरेश नड्डा, सूबेदार संजय कुमार, सूबेदार विक्रम, सुरेश, हवलदार कृष्ण चंद, पूर्व प्रधान प्यारे लाल, कृष्ण लाल, छोटा राम सहित सैकड़ों पूर्व सैनिक और स्थानीय नागरिक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
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