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Bilaspur News: जिप वार्डों के पुनर्सीमांकन पर पूर्व मंत्री गर्ग ने उठाए सवाल
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कहा, एक वार्ड में 15-15 पंचायतों का बोझ डालना नहीं उचित
जिला परिषद के एक वार्ड में हों अधिकतम 8-9 पंचायतें
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। जिला परिषद वार्डों के पुनर्सीमांकन को लेकर पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तैयार किया गया प्रारूप अव्यवस्थित है, जिससे न सिर्फ प्रशासनिक दिक्कतें पैदा होंगी, बल्कि जनप्रतिनिधित्व की भावना भी प्रभावित होगी।
राजेंद्र गर्ग ने कहा कि वार्डों का गठन इस तरह होना चाहिए कि एक वार्ड में अधिकतम 8 से 9 पंचायतें ही हों। वर्तमान प्रारूप में 15-15 पंचायतों को एक वार्ड में शामिल करना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक। घुमारवीं क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र के एक छोर पर स्थित कपाहड़ा, करलोटी, छत, संडयार, पलासला, पपलाह और कोटलू-ब्राहम्णां पंचायतों को एक-दो और पंचायतों के साथ मिलाकर अलग वार्ड बनाया जाना चाहिए था। वहीं, गतवाड़ पंचायत को कुठेड़ा वार्ड में शामिल करना भी तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने ननावां वार्ड का भी उल्लेख किया, जिसमें सदर और घुमारवीं विधानसभा क्षेत्रों की पंचायतों को मिलाया गया है। इससे क्षेत्रीय असंतुलन और भ्रम की स्थिति बन रही है। गर्ग ने बताया कि उपायुक्त बिलासपुर द्वारा जारी प्रारूप अधिसूचना पर आपत्तियां दर्ज करवाने की अंतिम तिथि 17 मई तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने जनता से अपील की है कि समय रहते अपनी आपत्तियां दर्ज करवाएं, ताकि परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी और संतुलित हो सके।
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जिला परिषद के एक वार्ड में हों अधिकतम 8-9 पंचायतें
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। जिला परिषद वार्डों के पुनर्सीमांकन को लेकर पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तैयार किया गया प्रारूप अव्यवस्थित है, जिससे न सिर्फ प्रशासनिक दिक्कतें पैदा होंगी, बल्कि जनप्रतिनिधित्व की भावना भी प्रभावित होगी।
राजेंद्र गर्ग ने कहा कि वार्डों का गठन इस तरह होना चाहिए कि एक वार्ड में अधिकतम 8 से 9 पंचायतें ही हों। वर्तमान प्रारूप में 15-15 पंचायतों को एक वार्ड में शामिल करना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक। घुमारवीं क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र के एक छोर पर स्थित कपाहड़ा, करलोटी, छत, संडयार, पलासला, पपलाह और कोटलू-ब्राहम्णां पंचायतों को एक-दो और पंचायतों के साथ मिलाकर अलग वार्ड बनाया जाना चाहिए था। वहीं, गतवाड़ पंचायत को कुठेड़ा वार्ड में शामिल करना भी तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने ननावां वार्ड का भी उल्लेख किया, जिसमें सदर और घुमारवीं विधानसभा क्षेत्रों की पंचायतों को मिलाया गया है। इससे क्षेत्रीय असंतुलन और भ्रम की स्थिति बन रही है। गर्ग ने बताया कि उपायुक्त बिलासपुर द्वारा जारी प्रारूप अधिसूचना पर आपत्तियां दर्ज करवाने की अंतिम तिथि 17 मई तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने जनता से अपील की है कि समय रहते अपनी आपत्तियां दर्ज करवाएं, ताकि परिसीमन की प्रक्रिया पारदर्शी और संतुलित हो सके।
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