फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Five former officials face charges for embezzling Rs 8.12 crore through fraud.

Bilaspur News: गड़बड़ी कर 8.12 करोड़ का गबन, पांच पूर्व पदाधिकारी कटघरे में

Sat, 06 Jun 2026 11:56 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 06 Jun 2026 11:56 PM IST
विज्ञापन
Five former officials face charges for embezzling Rs 8.12 crore through fraud.
एक्सक्लूसिव
विज्ञापन

द करलोटी ग्राम सेवा सहकारी सभा समिति लिमिटेड पपलाह का मामला
2020 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी, अभियोजन स्वीकृति के बाद दाखिल हुई चार्जशीट
27 लाख की 17 फर्जी एफडीआर से शुरू हुआ था करोड़ों रुपये का खेल
नीरज महाजन
भराड़ी (बिलासपुर)। द करलोटी ग्राम सेवा सहकारी सभा समिति लिमिटेड, पपलाह में हुए करोड़ों रुपये के गबन मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (विजिलेंस) ने विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में सामने आया है कि जाली एफडीआर तैयार कर, वित्तीय अभिलेखों में हेराफेरी कर और जमाकर्ताओं की राशि का दुरुपयोग करते हुए 6.42 करोड़ रुपये का गबन किया गया, जो ब्याज सहित बढ़कर 8.12 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
मामले में शिकायतकर्ता प्यार सिंह की शिकायत पर 3 नवंबर 2020 को विजिलेंस थाना बिलासपुर में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विस्तृत जांच और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ब्यूरो ने अमानत में खयानत, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत अदालत में चालान पेश किया है। आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं, बिलासपुर से 12 दिसंबर 2025 को अभियोजन स्वीकृति प्राप्त होने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई। जांच में वर्ष 2008 से 2013 तक कार्यरत प्रबंधक समिति के तत्कालीन प्रधान नरेंद्र कुमार, उपप्रधान प्रकाश चंद शर्मा, सदस्य विक्रम सिंह, केशवानंद और सुरेश कुमार को आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस के अनुसार इन पदाधिकारियों ने समिति के धन और अभिलेखों की निगरानी संबंधी अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया, जिससे वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। जांच के दौरान किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया और सभी को नोटिस देकर जांच में शामिल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि समिति का तत्कालीन सचिव शशि कुमार, जो वर्ष 1998 से अगस्त 2018 में अपनी मृत्यु तक इस पद पर रहा, समिति के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों और दैनिक रोकड़ बही पर पूर्ण नियंत्रण रखता था। विजिलेंस के अनुसार वित्तीय गड़बड़ियों की पूरी साजिश उसी ने रची। उसकी मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उसका नाम चार्जशीट के स्तंभ-12 में रखा गया है। चार्जशीट के अनुसार 25 मई 2009 को शशि कुमार ने रिकॉर्ड में 27 लाख रुपये की राशि को हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की गुम्मा मोहड़ा शाखा में 17 एफडीआर के रूप में जमा दर्शाया।
विज्ञापन

जांच में बैंक ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई एफडीआर कभी जारी नहीं की गई थी और रिकॉर्ड में दर्ज खाता संख्या भी फर्जी थी। विजिलेंस को यह भी पता चला कि जिस दिन 27 लाख रुपये की एफडीआर दर्शाई गई, उस दिन समिति के पास इतनी राशि उपलब्ध ही नहीं थी। बैंक खाते में वास्तविक जमा राशि करीब डेढ़ लाख रुपये थी, जबकि अन्य भुगतान भी दर्ज थे। इसके बावजूद रिकॉर्ड में वित्तीय स्थिति को मजबूत दिखाया जाता रहा। बाद में कराए गए विशेष लेखा परीक्षा में घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आई। जांच में पाया गया कि सचिव ने अलग-अलग समय पर कुल 18 फर्जी एफडीआर तैयार कर रखी थीं। वर्ष 2015 में इनका कथित नवीनीकरण दिखाकर और पूर्व की राशि जोड़कर रिकॉर्ड में निवेश की रकम 5.32 करोड़ रुपये से अधिक दर्शा दी गई, जबकि यह पूरा वित्तीय रिकॉर्ड फर्जी था। विजिलेंस जांच के अनुसार वर्ष 2016 और 2017 में जमा के विरुद्ध ऋण के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि निकाली गई और बाद में उसे सचिव की पत्नी रीता देवी के निजी बचत खाते में स्थानांतरित कर दिया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि इसी तरह विभिन्न वित्तीय लेन-देन के माध्यम से कुल 6.42 करोड़ रुपये का गबन किया गया। चार्जशीट में केवल तत्कालीन सचिव को ही जिम्मेदार नहीं माना गया है। विजिलेंस ने हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाएं नियम, 197, समिति की नियमावली का हवाला देते हुए कहा है कि धन के निवेश, सुरक्षा और रिकॉर्ड के सत्यापन की जिम्मेदारी प्रबंधक समिति की भी थी। जांच एजेंसी के अनुसार तत्कालीन पदाधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का समुचित पालन नहीं किया, जिसके कारण यह वित्तीय अनियमितता वर्षों तक जारी रही। विजिलेंस ने अदालत को बताया है कि मामले के मुख्य सूत्रधार शशि कुमार और तत्कालीन लेखा परीक्षक धर्मपाल की मृत्यु हो चुकी है। हालांकि जीवित पांचों पदाधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य उपलब्ध हैं। अब अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान आरोप तय होने के बाद नियमित परीक्षण शुरू होगा। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन



इनसेट



लेखा परीक्षा में नहीं पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
वर्ष 2009-10 के दौरान समिति का सरकारी लेखा परीक्षा तत्कालीन सहकारी निरीक्षक धर्मपाल ने किया था। जांच में सामने आया कि एफडीआर की बैंक से स्वतंत्र पुष्टि किए बिना ही उन्हें सही मान लिया गया। विजिलेंस का मानना है कि यदि उस समय उचित सत्यापन किया जाता तो घोटाले का खुलासा काफी पहले हो सकता था। धर्मपाल की वर्ष 2018 में मृत्यु हो चुकी है।



इनसेट

पत्नी के खाते में पहुंची रकम
जांच के अनुसार 17 जुलाई 2016 को 70 लाख रुपये और 9 अप्रैल 2017 को 40 लाख रुपये की राशि को जमा के विरुद्ध ऋण के रूप में दर्शाया गया। बाद में यह रकम सचिव की पत्नी रीता देवी के निजी बचत खाते में स्थानांतरित कर दी गई। विजिलेंस ने इसे गबन की साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed