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गोबिंद सागर में पाई जाने वाली मछली पूरी तरह से ऑर्गेनिक
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बिलासपुर। सदर विधायक सुभाष ठाकुर ने कहा कि कोल जलाशय में मछली का उत्पादन इस बार भरपूर होगा। मछुआरों के हितों को देखते हुए मत्स्य विभाग की ओर से इस बार जलाशय में कॉमन मछली का 1.30 लाख बीज डाला है।
वीरवार को कसोल में जनसभा को संबोधित करते हुए विधायक ने यह जानकारी दी। उन्होंने 12 मछुआरों को अनुदान सहायता के रूप में जाल भी वितरित किए।
उन्होंने कहा कि गोबिंद सागर जलाशय में 36 सहकारी सभाओं के माध्यम से लगभग 2,737 तथा कोल जलाशय में पांच मत्स्य सहकारी सभाओं के माध्यम से लगभग 254 मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। मछुआरों के कल्याण के लिए मत्स्य विभाग ने नीली क्रांति योजना के अंतर्गत 254 मछुआरों को आवास निर्माण के लिए 75 हजार व एक लाख तीस हजार की दर से लगभग तीन करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की।
सुभाष ठाकुर ने कहा कि कोल जलाशय तथा गोबिंद सागर में पाई जाने वाली मछली पूरी तरह से जैविक है और इसकी सब जगह अधिक मांग रहती है। निदेशक मत्स्य सतपाल मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश के सामान्य जलाशयों में 16 जून से 15 अगस्त तक किसी भी प्रकार के मछली शिकार व बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जलाशयों एवं सामान्य नदी नालों व इनकी सहायक नदियों में 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली पकड़ कर अपनी रोजी रोटी कमाने में लगे हैं। मछुआरों की सुविधा के लिए कोल जलाशय में कसोल, बेरल, व सुन्नी में तीन मत्स्य आवतरण केन्द्रों का निर्माण किया गया है। इस अवसर पर सहायक निदेशक मत्स्य श्याम लाल शर्मा, पंकज ठाकुर, बीडीसी सदस्य हरनोड़ा अशोक कुमार, हरनोड़ा के पूर्व प्रधान रमेश कौंडल, फिश को-ऑपरेटिव सोसाइटी कसोल के बाल मुकुंद सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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वीरवार को कसोल में जनसभा को संबोधित करते हुए विधायक ने यह जानकारी दी। उन्होंने 12 मछुआरों को अनुदान सहायता के रूप में जाल भी वितरित किए।
उन्होंने कहा कि गोबिंद सागर जलाशय में 36 सहकारी सभाओं के माध्यम से लगभग 2,737 तथा कोल जलाशय में पांच मत्स्य सहकारी सभाओं के माध्यम से लगभग 254 मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। मछुआरों के कल्याण के लिए मत्स्य विभाग ने नीली क्रांति योजना के अंतर्गत 254 मछुआरों को आवास निर्माण के लिए 75 हजार व एक लाख तीस हजार की दर से लगभग तीन करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की।
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सुभाष ठाकुर ने कहा कि कोल जलाशय तथा गोबिंद सागर में पाई जाने वाली मछली पूरी तरह से जैविक है और इसकी सब जगह अधिक मांग रहती है। निदेशक मत्स्य सतपाल मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश के सामान्य जलाशयों में 16 जून से 15 अगस्त तक किसी भी प्रकार के मछली शिकार व बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जलाशयों एवं सामान्य नदी नालों व इनकी सहायक नदियों में 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली पकड़ कर अपनी रोजी रोटी कमाने में लगे हैं। मछुआरों की सुविधा के लिए कोल जलाशय में कसोल, बेरल, व सुन्नी में तीन मत्स्य आवतरण केन्द्रों का निर्माण किया गया है। इस अवसर पर सहायक निदेशक मत्स्य श्याम लाल शर्मा, पंकज ठाकुर, बीडीसी सदस्य हरनोड़ा अशोक कुमार, हरनोड़ा के पूर्व प्रधान रमेश कौंडल, फिश को-ऑपरेटिव सोसाइटी कसोल के बाल मुकुंद सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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