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औषधीय पौधों की खेती करने पर हजारों रुपये की वितीय सहायता मिलेगी
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भराड़ी(बिलासपुर)। औषधीय जड़ी बूटियों की खेती करने पर अब किसानों को सरकार की ओर से वित्तीय सहायता मिलेगी। किसानों को तुलसी की खेती करने पर 13 हजार प्रति हेक्टेयर, अश्वगंधा की खेती करने पर दस हजार प्रति हेक्टेयर, सर्पगंधा की खेती करने पर 45 हजार प्रति हेक्टेयर और शताबरी की खेती करने पर 13 हजार प्रति हेक्टेयर के तहत सरकार की तरफ से अनुदान दिया जाएगा।
खास बात यह है कि अगर किसी किसान के पास एक हेक्टेयर भूमि नहीं है तो किसान समूह बनाकर भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इस समूह के लिए 15 किलोमीटर के दायरे के किसान जुड़ सकते हैं। किसानों को औषधीय और जड़ी बूटी की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की यह बड़ी योजना है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को जमीन की नकल ततिमा, आधार कार्ड, बैंक कॉपी, पंचायत की तरफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र और एक एफिडेविट औषधीय पौधों को लगाने के बारे में देना होगा। बताते चलें कि इस समय जिले के कुछ किसान तुलसी, अश्वगंधा, सर्पगंधा, शताबरी, अतिश और कटुकी की खेती कर रहे हैं। अब समूह बनाकर किसान जड़ी बूटी और औषधीय खेती कर सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान का लाभ ले सकते हैं।
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नोडल अधिकारी औषधीय पादप बोर्ड बिलासपुर डॉ. अभिषेक ठाकुर ने बताया कि जिले के कई किसान औषधीय खेती से जुड़े हैं। वे अच्छा कार्य कर अपनी आर्थिकी को उन्नत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य किसान भी औषधीय और जड़ी बूटी की खेती में जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि औषधीय और जड़ी बूटी की खेती करने के कई लाभ हैं। इस प्रकार की खेती को न जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं, न ही इस खेती को करने से आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि बाजार में दाम भी बेहतर मिलते हैं। इस प्रकार की खेती से किसान बीमारियों से भी बच सकते हैं। अश्वगंधा का एक पता खाने से वायु विकार जैसे रोगों से बचा जा सकता है। सरकार इस प्रकार की खेती करने के लिए वित्तीय सहायता भी किसानों को दे रही है।
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खास बात यह है कि अगर किसी किसान के पास एक हेक्टेयर भूमि नहीं है तो किसान समूह बनाकर भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इस समूह के लिए 15 किलोमीटर के दायरे के किसान जुड़ सकते हैं। किसानों को औषधीय और जड़ी बूटी की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की यह बड़ी योजना है।
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इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को जमीन की नकल ततिमा, आधार कार्ड, बैंक कॉपी, पंचायत की तरफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र और एक एफिडेविट औषधीय पौधों को लगाने के बारे में देना होगा। बताते चलें कि इस समय जिले के कुछ किसान तुलसी, अश्वगंधा, सर्पगंधा, शताबरी, अतिश और कटुकी की खेती कर रहे हैं। अब समूह बनाकर किसान जड़ी बूटी और औषधीय खेती कर सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान का लाभ ले सकते हैं।
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नोडल अधिकारी औषधीय पादप बोर्ड बिलासपुर डॉ. अभिषेक ठाकुर ने बताया कि जिले के कई किसान औषधीय खेती से जुड़े हैं। वे अच्छा कार्य कर अपनी आर्थिकी को उन्नत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य किसान भी औषधीय और जड़ी बूटी की खेती में जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि औषधीय और जड़ी बूटी की खेती करने के कई लाभ हैं। इस प्रकार की खेती को न जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं, न ही इस खेती को करने से आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि बाजार में दाम भी बेहतर मिलते हैं। इस प्रकार की खेती से किसान बीमारियों से भी बच सकते हैं। अश्वगंधा का एक पता खाने से वायु विकार जैसे रोगों से बचा जा सकता है। सरकार इस प्रकार की खेती करने के लिए वित्तीय सहायता भी किसानों को दे रही है।