फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Farmers should complete sowing of gram in the first fortnight of November.

Bilaspur News: चने की बुवाई नवंबर के पहले पखवाड़े में पूरी करें किसान

Sat, 28 Oct 2023 04:10 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Oct 2023 04:10 PM IST
विज्ञापन
Farmers should complete sowing of gram in the first fortnight of November.
- जिले के लिए चने की एचसी-2 और एचपीजी-17 किस्म उपयुक्त
विज्ञापन

-एक बीघा में हो सकती है 70 किलोग्राम की पैदावार

संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। जिले में चने की बुवाई के लिए नवंबर महीने का पहला पखवाड़े का समय उपयुक्त है। किसान 15 नवंबर तक चने की बुवाई पूरी कर लें। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं के मृदा विभाग के वैज्ञानिक डॉ. गौरव ने दी

उन्होंने बताया कि चने की एचसी-2 और एचपीजी-17 किस्म की बुवाई अच्छी पैदावार देने वाली है। यह इस चने की एक बीघा में 60-70 किलोग्राम पैदावार होती है। एचसी-2 बारीक दाने का चना होता है और इसकी बीज की मात्रा तीन किलोग्राम प्रति बीघा होती है। एचपीजी-17 का दाना मोटा होता है और इसके बीज की मात्रा एक बीघा में छह किलोग्राम पड़ती है। जिले में चने की 30 हेक्टेयर पर चने की खेती होती है और करीब 40 मीट्रिक टन पैदावार होती है। बुवाई के लिए किसान खेत की तैयारी कर लें। चने की फसल के लिए मिट्टी को ज्यादा बारीक करने की जरूरत नहीं होती है। इस के लिए भुरभुरी मिट्टी की जरूरत होती है, ताकि पौधों की जड़ों में वायु का आदान-प्रदान होता रहे। चने की फसल में गोबर की गली सड़ी खाद एक टन प्रति बीघा डालें। इसके लिए यूरिया की जरूरत नहीं होती है। चने की फसल को लाइनों में बीजा जा सकता है। इसके लिए लाइन से लाइन की दूरी एक फीट और पौधे से पौधे की दूरी 10-12 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। चने के बीज को 7-8 सेंटीमीटर की गहराई तक बीजना चाहिए। अगर इससे कम गहराई पर बीज जाता है तो उखड़ा रोग लगने के कारण इसके पौधे सूख जाते है। अगर चने को गेहूं के साथ बीजा जाता है तो चार लाइन गेहूं और दो लाइन चने की बिजनी चाहिए। इससे यह गेहूं की फसल के लिए नाइट्रोजन का संग्रह भी करेगा और गेहूं की पैदावार में बढ़ोतरी होगी। चना का पौधा अपनी जड़ों में नाइट्रोजन का संग्रह करता है। इसकी जड़ों की गांठों में राइजोबियम नामक बैक्टीरिया होता है जो कि वातावरण से नाइट्रोजन इकट्ठा करता है। चना के पौधों में फली छेदक कीड़ा लगता है। इसकी रोकथाम के लिए किसान नीम युक्त कीटनाशक का प्रयोग करें या लेमड़ा नामक दवाई 15 लीटर पानी में आठ एमएल का घोल बना कर फसल में 50 प्रतिशत फूल आने की अवस्था में और इसके 15-20 दिन बाद छिड़काव करें। उधर कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं की प्रभारी डॉ. सीमा शाह ने बताया कि जिले के लिए चने की एचसी-2 एचपीजी-17 किस्म उपयुक्त है। किसान इससे अच्छी पैदावार ले सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed