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मशरूम उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी : वेद प्रकाश
Mon, 24 Mar 2025 11:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 24 Mar 2025 11:23 PM IST
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बिलासपुर के खनोट स्कूल में मशरूम उत्पादन व विपणन प्रशिक्षण जागरूकता शिविर के समापन समारोह में क
-मशरूम के सेवन से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
-बोले, कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है मशरूम उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मशरूम उत्पादन एवं विपणन रिसर्च संस्थान निदेशालय, चंबाघाट (सोलन) के निदेशक डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि मशरूम उत्पादन न केवल पोषण का अच्छा स्रोत है, बल्कि यह किसानों और बागवानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो सकता है। चीन मशरूम उत्पादन में नंबर एक पर है और वहां प्रति व्यक्ति सालाना 27 किलो मशरूम खाया जाता है, जिससे उनकी औसत आयु 80 से 90 वर्ष तक होती है। वहीं, भारत में मशरूम की खपत काफी कम है और औसत आयु केवल 60 वर्ष है।
वेद प्रकाश मंडी और बिलासपुर जिले की सीमा पर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खनोट में आयोजित अनुसूचित जाति के एक दिवसीय मशरूम उत्पादन एवं विपणन प्रशिक्षण जागरुकता शिविर के समापन समारोह में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मशरूम एक इंडोर फसल है, जिसे 20 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान और 85 प्रतिशत आर्द्रता में उगाया जाता है। बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से 40 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि मशरूम का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसे हफ्ते में कम से कम पांच बार खाना चाहिए। मशरूम को सब्जी, आचार, हर्बल पाउडर और सूप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश में बटन मशरूम, श्वेत खुंब, ढींगरी खुंब, दूधिया खुंब, शिटाके खुंब और ऋषि खुंब जैसी विभिन्न किस्मों का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने किसानों और बागवानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। इसे छोटे पैमाने पर शुरू कर किसान धीरे-धीरे बड़े स्तर पर उत्पादन कर सकते हैं और अपने उत्पादों को अन्य राज्यों में बेचकर अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
इनसेट
92 वर्षीय समाजसेवी जेडी शर्मा सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान घुमारवीं ब्लॉक के 100 गरीब परिवारों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाया गया। निदेशक डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने इन परिवारों को मशरूम उत्पादन किट और स्प्रे पंप वितरित कर सम्मानित किया। 92 वर्षीय समाजसेवी जेडी शर्मा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
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इनसेट
स्कूल को 11 हजार की आर्थिक सहायता
डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने खनोट स्कूल को 11 हजार रुपये देने की घोषणा भी की। स्कूल के प्रधानाचार्य आदित्य रतन ने उन्हें शॉल, टोपी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
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-बोले, कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है मशरूम उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मशरूम उत्पादन एवं विपणन रिसर्च संस्थान निदेशालय, चंबाघाट (सोलन) के निदेशक डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि मशरूम उत्पादन न केवल पोषण का अच्छा स्रोत है, बल्कि यह किसानों और बागवानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो सकता है। चीन मशरूम उत्पादन में नंबर एक पर है और वहां प्रति व्यक्ति सालाना 27 किलो मशरूम खाया जाता है, जिससे उनकी औसत आयु 80 से 90 वर्ष तक होती है। वहीं, भारत में मशरूम की खपत काफी कम है और औसत आयु केवल 60 वर्ष है।
वेद प्रकाश मंडी और बिलासपुर जिले की सीमा पर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खनोट में आयोजित अनुसूचित जाति के एक दिवसीय मशरूम उत्पादन एवं विपणन प्रशिक्षण जागरुकता शिविर के समापन समारोह में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मशरूम एक इंडोर फसल है, जिसे 20 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान और 85 प्रतिशत आर्द्रता में उगाया जाता है। बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से 40 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि मशरूम का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसे हफ्ते में कम से कम पांच बार खाना चाहिए। मशरूम को सब्जी, आचार, हर्बल पाउडर और सूप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश में बटन मशरूम, श्वेत खुंब, ढींगरी खुंब, दूधिया खुंब, शिटाके खुंब और ऋषि खुंब जैसी विभिन्न किस्मों का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने किसानों और बागवानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। इसे छोटे पैमाने पर शुरू कर किसान धीरे-धीरे बड़े स्तर पर उत्पादन कर सकते हैं और अपने उत्पादों को अन्य राज्यों में बेचकर अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
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92 वर्षीय समाजसेवी जेडी शर्मा सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान घुमारवीं ब्लॉक के 100 गरीब परिवारों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाया गया। निदेशक डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने इन परिवारों को मशरूम उत्पादन किट और स्प्रे पंप वितरित कर सम्मानित किया। 92 वर्षीय समाजसेवी जेडी शर्मा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
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स्कूल को 11 हजार की आर्थिक सहायता
डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने खनोट स्कूल को 11 हजार रुपये देने की घोषणा भी की। स्कूल के प्रधानाचार्य आदित्य रतन ने उन्हें शॉल, टोपी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।