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Bilaspur News: डिजिटल रिकॉर्ड की सुस्त चाल से दांव पर किसानों का सम्मान

Mon, 05 Jan 2026 11:45 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 05 Jan 2026 11:45 PM IST
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Farmers' dignity at stake due to slow pace of digital records
किसान शीला देवी।
पड़ताल
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बड़गांव के 70 फीसदी किसान परिवारों की किसान निधि की किस्त पर संकट
क्षेत्र में 600 किसान परिवार, अधिकतर का जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं
राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन न होने से जनरेट नहीं बन सकी यूनिक आईडी

मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। एक तरफ केंद्र सरकार इसी महीने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर जिले की ग्राम पंचायत बड़गांव के किसान एक बड़ी तकनीकी मुसीबत में फंस गए हैं। सरकार ने अब हर किसान के लिए किसान रजिस्ट्री और यूनिक किसान आईडी अनिवार्य कर दी है, लेकिन बड़गांव के किसानों के लिए यह नियम गले की फांस बन गया है।
पंचायत के करीब 600 किसान परिवारों में से लगभग 70 फीसदी का जमीनी रिकॉर्ड सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध ही नहीं है। लोक मित्र केंद्र के संचालक संदीप कुमार बताते हैं कि जब किसान पंजीकरण के लिए आते हैं, तो राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन न होने की वजह से उनकी यूनिक आईडी नहीं बन पाती है। यही वजह है कि किस्त जारी होने में कुछ ही समय शेष है, मगर और किसानों का पंजीकरण तक नहीं हो सका है। खास बात यह है कि किसान आईडी बनाने के लिए लोकमित्र केंद्रों के चक्कर तो काट रहे हैं, लेकिन जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन न होने के कारण उनकी आईडी बन ही नहीं पा रही है। किसानों को डर है कि अगर समय से आईडी नहीं बनी तो उन्हें किसान निधि की किस्त नहीं मिलेगी। यह सब तब हो रहा है जब सरकार डिजिटल इंडिया के दावे तो करती है, लेकिन लोगों को परेशान करने के अलावा इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता है। किसान लोक मित्र केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। योजना की 22वीं किस्त इसी माह बैंक खातों में भेजी जानी है। यदि अगले एक-दो हफ्तों में राजस्व विभाग ने फुर्ती नहीं दिखाई, तो बड़गांव के करीब 400 किसान परिवार सुविधा से वंचित हो जाएंगे। संवाद
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इनसेट
किस्त इसी महीने आनी है, लेकिन लोक मित्र केंद्र वाले कहते हैं कि आपका रिकॉर्ड ही ऑनलाइन नहीं है। हम बेबस हैं। परेशान होने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। - जगदीप चंदेल
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इनसेट
सरकार ने आईडी अनिवार्य कर दी, पर उसे बनाने का रास्ता ही बंद है। तकनीकी अड़चनों ने हमारी नींद उड़ा दी है। समय पर आईडी नहीं बनी तो योजना का लाभ नहीं मिलेगा। - रमेश चंदेल
इनसेट
हम किसान हैं, हमारा काम खेतों में होना चाहिए, लेकिन हम पटवार खाने और लोक मित्र केंद्रों की धूल फांक रहे हैं। सुविधा सुस्त प्रशासन की भेंट चढ़ रही है। - मस्तराम
इनसेट
अगर समय पर आईडी नहीं बनी, तो हमें सरकारी लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। यह हमारे साथ अन्याय है। घरों का काम छोड़ लोकमित्र केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन रिकॉर्ड न होने ये यूनिक आईडी नहीं बन रही है। -शीला देवी

कोट
मैंने उपमंडल के सभी राजस्व अधिकारियों और पटवारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी किसानों का पंजीकरण करना अनिवार्य है। पटवारियों को अपने सर्कल में किसानों की जमीन को तुरंत ऑनलाइन करने को कहा गया है। हम बहुत जल्द क्षेत्र में विशेष शिविर लगाएंगे, ताकि किसानों को जागरूक किया जा सके और उनकी समस्याओं का मौके पर ही निपटारा हो। - विपिन कुमार, तहसीलदार झंडूता
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