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Bilaspur News: भराड़ी कृषि केंद्र से घटिया गेहूं का बीज मिलने पर किसान का आरोप
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-सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर विभाग पर उठाए सवाल
- बीज पर अंकित तिथि में हेरफेर करने की कही बात
- गेहूं के बीज की जांच कराने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी कृषि बीज विक्रय केंद्र से किसानों को बेचे गए गेहूं के बीज पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर एक किसान ने बीडीओ को टैग करते हुए आरोप लगाया है कि विक्रय केंद्र द्वारा दिया गया बीज घटिया गुणवत्ता का है और बीज की बोरी पर अंकित तिथि में हेर-फेर किया गया है।
जरोडा गांव के किसान प्राणनाथ ने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने कृषि विक्रय केंद्र भराड़ी से दो बोरी गेहूं का बीज खरीदा था। इसकी कीमत 1860 रुपये थी। उन्होंने रविवार को खेतों में बीज डाला तो देखा कि बीज के दाने टूटे हुए थे और उनकी गुणवत्ता बहुत खराब थी। प्राणनाथ का कहना था कि बीज में मिलावट भी थी। इससे फसल की पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
किसान ने यह भी आरोप लगाया कि गेहूं के बीज की बोरी पर पहले 2023 अंकित था, लेकिन बाद में उसे बदलकर 2024 कर दिया गया था। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह की लापरवाही क्यों बरती जा रही है और किसान के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
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इस मामले में एसएमएस घुमारवीं ब्रजेश पाल चंदेल ने कहा कि विक्रय केंद्र से बेचा जाने वाला बीज सर्टिफाइड होता है और गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। कहा कि बीज की बोरी पर बैच नंबर अंकित होता है और अगर किसानों को किसी प्रकार की शिकायत होती है तो उस बैच नंबर के आधार पर जांच की जाएगी।
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- बीज पर अंकित तिथि में हेरफेर करने की कही बात
- गेहूं के बीज की जांच कराने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी कृषि बीज विक्रय केंद्र से किसानों को बेचे गए गेहूं के बीज पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर एक किसान ने बीडीओ को टैग करते हुए आरोप लगाया है कि विक्रय केंद्र द्वारा दिया गया बीज घटिया गुणवत्ता का है और बीज की बोरी पर अंकित तिथि में हेर-फेर किया गया है।
जरोडा गांव के किसान प्राणनाथ ने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने कृषि विक्रय केंद्र भराड़ी से दो बोरी गेहूं का बीज खरीदा था। इसकी कीमत 1860 रुपये थी। उन्होंने रविवार को खेतों में बीज डाला तो देखा कि बीज के दाने टूटे हुए थे और उनकी गुणवत्ता बहुत खराब थी। प्राणनाथ का कहना था कि बीज में मिलावट भी थी। इससे फसल की पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
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किसान ने यह भी आरोप लगाया कि गेहूं के बीज की बोरी पर पहले 2023 अंकित था, लेकिन बाद में उसे बदलकर 2024 कर दिया गया था। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह की लापरवाही क्यों बरती जा रही है और किसान के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
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इस मामले में एसएमएस घुमारवीं ब्रजेश पाल चंदेल ने कहा कि विक्रय केंद्र से बेचा जाने वाला बीज सर्टिफाइड होता है और गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। कहा कि बीज की बोरी पर बैच नंबर अंकित होता है और अगर किसानों को किसी प्रकार की शिकायत होती है तो उस बैच नंबर के आधार पर जांच की जाएगी।