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Bilaspur News: परिवारों की सेहत सुधारने को खानपान की आदत बदलने पर दिया जोर
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रष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर मार्कंड सिविल अस्पताल में 100 स्वास्थ्यकर्मियों को दिया प्रशिक्षण
मातृ-शिशु पोषण और संतुलित आहार पर चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के तहत सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग, एम्स बिलासपुर की ओर से सोमवार को सिविल अस्पताल मार्कंड में पोषण जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें करीब 100 स्वास्थ्य पेशेवरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया। इनमें कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ), आशा कार्यकर्ता, मेडिकल ऑफिसर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को परिवारों के खानपान और जीवनशैली में व्यावहारिक एवं स्थायी बदलाव लाने के लिए तैयार करना रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि परिवारों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि क्या खाना चाहिए। उनकी दिनचर्या और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ऐसे बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है, जिन्हें वे लंबे समय तक जारी रख सकें। सिविल अस्पताल मार्कंड एम्स बिलासपुर के ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी कार्य करता है। कार्यक्रम एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. दलजीत सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. मीनल एम. ठाकरे ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया। कार्यक्रम का संचालन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुरिंदर सिंह बावा के नेतृत्व में किया गया। सत्र में मातृ पोषण, आयरन-फोलिक एसिड की सलाह, गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त पोषण और प्रसव के बाद मां एवं बच्चे के पोषण पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य कर्मियों को छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने और इसके बाद उचित पूरक आहार शुरू करने की जानकारी दी गई। बच्चों के भोजन में विविधता और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। संतुलित आहार में मिलेट्स की भूमिका भी बताई गई।
नमक-चीनी कम करने की सलाह
मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के लिए पोषण परामर्श को भी प्रमुखता दी गई। नमक और चीनी का सेवन कम करने तथा अस्वास्थ्यकर खानपान से बचने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने क्षेत्र में परिवारों के साथ काम करने के दौरान सामने आने वाली चुनौतियां और अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में व्यवहार परिवर्तन संचार और क्षेत्रीय कार्यों से जुड़े वास्तविक मामलों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि पोषण जागरूकता का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को व्यावहारिक और टिकाऊ बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित करना होना चाहिए।
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मातृ-शिशु पोषण और संतुलित आहार पर चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के तहत सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग, एम्स बिलासपुर की ओर से सोमवार को सिविल अस्पताल मार्कंड में पोषण जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें करीब 100 स्वास्थ्य पेशेवरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया। इनमें कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ), आशा कार्यकर्ता, मेडिकल ऑफिसर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को परिवारों के खानपान और जीवनशैली में व्यावहारिक एवं स्थायी बदलाव लाने के लिए तैयार करना रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि परिवारों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि क्या खाना चाहिए। उनकी दिनचर्या और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ऐसे बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है, जिन्हें वे लंबे समय तक जारी रख सकें। सिविल अस्पताल मार्कंड एम्स बिलासपुर के ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी कार्य करता है। कार्यक्रम एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. दलजीत सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. मीनल एम. ठाकरे ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया। कार्यक्रम का संचालन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुरिंदर सिंह बावा के नेतृत्व में किया गया। सत्र में मातृ पोषण, आयरन-फोलिक एसिड की सलाह, गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त पोषण और प्रसव के बाद मां एवं बच्चे के पोषण पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य कर्मियों को छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने और इसके बाद उचित पूरक आहार शुरू करने की जानकारी दी गई। बच्चों के भोजन में विविधता और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। संतुलित आहार में मिलेट्स की भूमिका भी बताई गई।
नमक-चीनी कम करने की सलाह
मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के लिए पोषण परामर्श को भी प्रमुखता दी गई। नमक और चीनी का सेवन कम करने तथा अस्वास्थ्यकर खानपान से बचने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने क्षेत्र में परिवारों के साथ काम करने के दौरान सामने आने वाली चुनौतियां और अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में व्यवहार परिवर्तन संचार और क्षेत्रीय कार्यों से जुड़े वास्तविक मामलों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि पोषण जागरूकता का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को व्यावहारिक और टिकाऊ बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित करना होना चाहिए।
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