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Bilaspur News: प्राथमिक स्कूल हरनोड़ा को बिजली बोर्ड ने थमाया 22 हजार का बिल
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बिलासपुर। बिलासपुर के सदर खंड की प्राथमिक पाठशाला हरनोड़ा को बिजली बोर्ड ने 22 हजार का बिल थमाया है। जब स्कूल प्रबंधन इतनी बड़ी बिल की रकम जमा नहीं करवा पाया तो बिजली बोर्ड ने स्कूल का कनेक्शन काट दिया। जिसके चलते अब स्कूल में बिजली की सुविधा नहीं है और बच्चों को भारी ठंड में कमरों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
स्कूल अध्यापक शशि पाल शर्मा ने बताया कि स्कूल में दो कमरों का भवन है। कोरोना काल में दो साल स्कूल लगातार बंद रहा। उसके बाद भी स्कूल में हर माह 50 से 60 यूनिट बिजली ही खर्च होती है। पिछले तीन माह की बात करें तो स्कूल में एक माह तो एक यूनिट बिजली ही खर्च हुई है। लेकिन बिजली बोर्ड ने स्कूल को 22 हजार का बिल थमाया है। कहा कि बोर्ड के अनुसार यह बिल पिछले कुछ अरसे का है जो जमा नहीं करवाया गया था। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने बीच में चार हजार बिल जमा करवाया था। हैरानी का विषय है कि अगर कोरोना काल के समय से यह बिल है तो यह बहुत बड़ी राशि है।अध्यापक ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने बिजली बोर्ड के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मीटर कनेक्शन को काटने के लिए आवेदन भी किया था और नया मीटर लगाने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा कि स्कूल की सालाना ग्रांट ही 10 हजार रुपये है। ऐसे में इतनी बड़ी बिल की राशि को अदा करना मुश्किल होगा। बिजली बोर्ड ने बिल जमा नहीं करने पर स्कूल से बिजली का कनेक्शन भी काट दिया है। बच्चों को सर्दियों के दिनों में स्कूल में हीटर की जरूरत होती है लेकिन इस स्कूल के बच्चें ठंड में ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बिजली बोर्ड सुंदरनगर के सहायक अभियंता मनीष राव ने कहा कि स्कूल का मीटर ठीक है। उन्होंने जांच की थी। लंबे समय से स्कूल का बिल जमा नहीं हुआ है। जिसके चलते अब बोर्ड ने कनेक्शन काटा है। कहा कि अगर मीटर में खराबी होती तो नया मीटर लगा सकते थे। लेकिन ऐसा कोई मामला नहीं है। स्कूल प्रबंधन को बिल जमा करवाना ही होगा। यह बिल कितने समय का है वो फाइल देखकर ही बताया जा सकता है।
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स्कूल अध्यापक शशि पाल शर्मा ने बताया कि स्कूल में दो कमरों का भवन है। कोरोना काल में दो साल स्कूल लगातार बंद रहा। उसके बाद भी स्कूल में हर माह 50 से 60 यूनिट बिजली ही खर्च होती है। पिछले तीन माह की बात करें तो स्कूल में एक माह तो एक यूनिट बिजली ही खर्च हुई है। लेकिन बिजली बोर्ड ने स्कूल को 22 हजार का बिल थमाया है। कहा कि बोर्ड के अनुसार यह बिल पिछले कुछ अरसे का है जो जमा नहीं करवाया गया था। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने बीच में चार हजार बिल जमा करवाया था। हैरानी का विषय है कि अगर कोरोना काल के समय से यह बिल है तो यह बहुत बड़ी राशि है।अध्यापक ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने बिजली बोर्ड के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मीटर कनेक्शन को काटने के लिए आवेदन भी किया था और नया मीटर लगाने का आग्रह किया था।
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उन्होंने कहा कि स्कूल की सालाना ग्रांट ही 10 हजार रुपये है। ऐसे में इतनी बड़ी बिल की राशि को अदा करना मुश्किल होगा। बिजली बोर्ड ने बिल जमा नहीं करने पर स्कूल से बिजली का कनेक्शन भी काट दिया है। बच्चों को सर्दियों के दिनों में स्कूल में हीटर की जरूरत होती है लेकिन इस स्कूल के बच्चें ठंड में ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बिजली बोर्ड सुंदरनगर के सहायक अभियंता मनीष राव ने कहा कि स्कूल का मीटर ठीक है। उन्होंने जांच की थी। लंबे समय से स्कूल का बिल जमा नहीं हुआ है। जिसके चलते अब बोर्ड ने कनेक्शन काटा है। कहा कि अगर मीटर में खराबी होती तो नया मीटर लगा सकते थे। लेकिन ऐसा कोई मामला नहीं है। स्कूल प्रबंधन को बिल जमा करवाना ही होगा। यह बिल कितने समय का है वो फाइल देखकर ही बताया जा सकता है।
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