फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Due to the devotion of previous births, Kewat had the good fortune of touching the feet of Milaram: Pt. Puneet

पूर्व जन्मों की भक्ति से केवट को मिलाराम के चरण स्पर्श करने का सौभाग्य : पं. पुनीत

Mon, 28 Jul 2025 11:33 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 28 Jul 2025 11:33 PM IST
विज्ञापन
Due to the devotion of previous births, Kewat had the good fortune of touching the feet of Milaram: Pt. Puneet
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में चल रही श्री राम कथा का श्रवण करते हुए श्रध्दालु। स्रोत: जाग
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही कथा में रा-निषादराज केवट के प्रेम का सुनाया प्रसंग
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में चल रही श्री राम कथा के सातवें दिन कथावाचक पुनीत शर्मा ने प्रभु राम और निषादराज केवट के गूढ़ प्रेम रहस्य को उजागर किया।

उन्होंने कहा कि प्रभु निश्चल प्रेम का परिणाम अवश्य देते हैं। उन्होंने कहा कि एक समय भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शैया पर शयन कर रहे थे और माता लक्ष्मी उनके चरण दबा रही थीं। इतने में सागर में तैरते हुए एक कछुए ने प्रभु के चरणों को स्पर्श करने की चेष्टा की, लेकिन माता लक्ष्मी ने उसे अपने हाथों से दूर हटा दिया। यही क्रम बार-बार चलता रहा और जब कछुआ असफल रहा तो उसने सोचा कि क्यों न श्रीमुख के दर्शन कर लूं। यहां भी वहीं संकट आन खड़ा हुआ जैसे कछुआ आगे बढ़ता वैसे ही शेष नाग फुंकार कर उसे दूर कर देते। हताश कछुआ दूर जाकर मन ही मन में प्रभु से विनती करने लगा कि क्या आपकी सेवा करने का कार्यभार इन दोनों ने ले रखा है। मासूम कछुए की बात पर प्रभु ने कहा कि अगले जन्म में एक समय ऐसा आएगा जब तुम मेरी सेवा करोगे और ये दोनो दूर खड़े रहेंगे और कुछ भी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि कालांतर परिवर्तन में जब विष्णु अवतार भगवान श्री राम को वनवास हुआ तो सरयू नदी पार करने के लिए उन्हें मल्लाह की आवश्यकता पड़ी। मल्लाह यानि केवट निषादराज को जब इस बात का पता चला तो वह दौड़े-दौड़े आए और प्रभु के श्री चरणों में गिर पड़े। उन्होंने प्रभु से उनके चरण धोने की सेवा मांगी जिसे प्रभु ने सहर्ष स्वीकार किया। निषादराज केवट बड़े प्रेम से प्रभु के चरणों को धो रहे हैं तो भगवान राम ने शेष नाग के अवतार लक्ष्मण और माता लक्ष्मी की अवतार माता सीता से कहा कि यह वही कछुआ है जिसे आपने मेरी सेवा करने से दुत्कार दिया था। अब देखो यही कछुआ यानि निषादराज मेरी सेवा कर रहा है और आप दोनों दूर खड़े हो। इस पर माता सीता ने प्रभु राम की लीला को वंदन किया और सभी ने जय जयकार की। कथा समापन पर सभी को प्रसाद वितरण किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed