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वन मित्र भर्ती में आरक्षण को गायब करने के परिणाम होंगे गंभीर : कौंडल
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- कहा, भाजपा के नक्शे कदम पर चलने का प्रयास कर रही है कांग्रेस सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति, ओबीसी, अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा जिला बिलासपुर इकाई के प्रधान एवं सेवानिवृत्त डीएसपी सीता राम कौंडल ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी भाजपा सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए आरक्षित वर्गों के हकों पर सुनियोजित ढंग से डाका डाल रही है। मसला आरक्षण और तय हक का है इसलिए मोर्चा संघर्ष करने से भी नहीं चूकेगा।
प्रेस को जारी बयान में सीता राम कौंडल ने कहा कि वर्तमान हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वन विभाग में 2061 वन मित्र पदों को भरने की मंजूरी दी है, लेकिन हैरानी की बात है कि इन पदों के लिए एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान हीं नहीं रखा गया है। इसका संयुक्त संघर्ष मोर्चा कड़ा विरोध करता है। कहा कि यह संविधान में दिए गए प्रावधान अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 16-4 का उल्लंघन है। उपरोक्त वर्गों की भागीदारी को समाप्त किया गया है। इस संबंध में सरकार से अनुरोध है कि संविधान के अनुसार तथा रोस्टर को लागू करके इन भर्तियों को किया जाए, ताकि इन वंचित वर्गों को उनका हक मिल सके और समानता की अवधारणा भी बनी रहे। वन मित्र पदों को भरने के लिए अंक प्रणाली को रखने की कवायद चल रही है, जबकि आरक्षित वर्गों को भी पहले से तय अंक दिए जाएंगे। कहा कि इससे किसी भी लिहाज से पारदर्शिता नहीं बनेगी। यही नहीं पर्सनल इंटरव्यू भी अंकों के आधार पर रखा गया है। इसमें चोर दरवाजे से अपने चहेतों को नौकरी पर रखने का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा इसका कड़ा विरोध करता है।
सीता राम कौंडल ने कहा कि वन मित्र के प्रस्तावित 2061 पदों में करीब तीन सौ से ज्यादा अनुसूचित जाति, इतने ही ओबीसी, करीब 150 पद अनुसूचित जन जाति के भरे जाने हैं। ऐसे में सरकार ने जो गलत कदम उठाया है, मोर्चा उसका हर मंच से विरोध करेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें अंक नहीं हक चाहिए। सीता राम कौंडल ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने भी मल्टी टास्क वर्कर्स की भर्ती में भी इसी प्रकार की नीति को अपनाया था। नतीजा सबके सामने है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन भर्तियों में रोस्टर को लागू करके जितनी हिस्सेदारी आरक्षित वर्गों की बनती है,उनको आरक्षण देकर भर्ती किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस अधिसूचना को रद्द कर संशोधन नहीं करती है तो संयुक्त संघर्ष मोर्चा आंदोलन की राह अपनाएगा, जिसकी सारी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति, ओबीसी, अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा जिला बिलासपुर इकाई के प्रधान एवं सेवानिवृत्त डीएसपी सीता राम कौंडल ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी भाजपा सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए आरक्षित वर्गों के हकों पर सुनियोजित ढंग से डाका डाल रही है। मसला आरक्षण और तय हक का है इसलिए मोर्चा संघर्ष करने से भी नहीं चूकेगा।
प्रेस को जारी बयान में सीता राम कौंडल ने कहा कि वर्तमान हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वन विभाग में 2061 वन मित्र पदों को भरने की मंजूरी दी है, लेकिन हैरानी की बात है कि इन पदों के लिए एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान हीं नहीं रखा गया है। इसका संयुक्त संघर्ष मोर्चा कड़ा विरोध करता है। कहा कि यह संविधान में दिए गए प्रावधान अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 16-4 का उल्लंघन है। उपरोक्त वर्गों की भागीदारी को समाप्त किया गया है। इस संबंध में सरकार से अनुरोध है कि संविधान के अनुसार तथा रोस्टर को लागू करके इन भर्तियों को किया जाए, ताकि इन वंचित वर्गों को उनका हक मिल सके और समानता की अवधारणा भी बनी रहे। वन मित्र पदों को भरने के लिए अंक प्रणाली को रखने की कवायद चल रही है, जबकि आरक्षित वर्गों को भी पहले से तय अंक दिए जाएंगे। कहा कि इससे किसी भी लिहाज से पारदर्शिता नहीं बनेगी। यही नहीं पर्सनल इंटरव्यू भी अंकों के आधार पर रखा गया है। इसमें चोर दरवाजे से अपने चहेतों को नौकरी पर रखने का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा इसका कड़ा विरोध करता है।
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सीता राम कौंडल ने कहा कि वन मित्र के प्रस्तावित 2061 पदों में करीब तीन सौ से ज्यादा अनुसूचित जाति, इतने ही ओबीसी, करीब 150 पद अनुसूचित जन जाति के भरे जाने हैं। ऐसे में सरकार ने जो गलत कदम उठाया है, मोर्चा उसका हर मंच से विरोध करेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें अंक नहीं हक चाहिए। सीता राम कौंडल ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने भी मल्टी टास्क वर्कर्स की भर्ती में भी इसी प्रकार की नीति को अपनाया था। नतीजा सबके सामने है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन भर्तियों में रोस्टर को लागू करके जितनी हिस्सेदारी आरक्षित वर्गों की बनती है,उनको आरक्षण देकर भर्ती किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस अधिसूचना को रद्द कर संशोधन नहीं करती है तो संयुक्त संघर्ष मोर्चा आंदोलन की राह अपनाएगा, जिसकी सारी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी।
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