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Bilaspur News: मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों के आश्वासन के बाद भी बेसहारा हैं रेल टनल प्रभावित

Fri, 18 Jul 2025 11:43 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 18 Jul 2025 11:43 PM IST
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Despite the assurances of the Chief Minister, Minister and MLAs, the affected railway tunnels are still helpless
बध्यात में टनल के बाहर धरना देते प्रभावित। संवाद
डेढ़ माह से धरने पर बैठे परिवारों की समस्या का नहीं निकला समाधान
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टनल निर्माण से घरों में दरारें आने के बाद धरने पर हैं बध्यात के कई परिवार

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानु पल्ली-बैरी रेलवे लाइन के तहत बध्यात में टनल प्रभावितों परिवाराें से मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक सभी मिल चुके हैं, लेकिन प्रभावितों को अभी तक कोई सहारा और न ही समाधान मिला है। नेताओं से अभी तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। ऐसे में टनल के बाहर प्रभावितों का धरना जारी है।

प्रभावित टनल के बाहर 48 दिन से धरना दे रहे हैं। वहीं 35 दिन क्रमिक अनशन करते हुए भी हो गए हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस है। इस मामले में मुख्यमंत्री और मंत्री तक ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन कोई भी सहायता इन लोगों को नहीं मिली है। नेताओं ने प्रशासन को समाधान करने के निर्देश तो दिए, लेकिन वो कहीं पर भी लागू नहीं हो सके। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि टनल निर्माण के कारण उनके घर गिरने की कगार पर हैं। प्रशासन ने कई बार घरों का निरीक्षण किया है। घरों में दरारें साफ दिखाई देती हैं। जब लोगों को कहीं से कोई सहायता नहीं मिली तो मजबूरन उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जहां से राहत की उम्मीद है। प्रभावितों का कहना है कि टनल निर्माण से उनके घरों में दरारें आ चुकी हैं। घर रहने के लिए असुरक्षित हो गए हैं। इसके लिए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। प्रभावितों ने टनल के कार्य को पूरी तरह बंद करा दिया था, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने प्रभावितों को वहां से हटाया और काम शुरू कराया। इसके बाद प्रभावित टनल के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि जब तक मांगे पूरी नहीं होती, वह धरने से नहीं हटेंगे। हर दिन लोग सुबह धरने पर बैठते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि शायद कोई आएगा और उनके दर्द को महसूस कर उनकी समस्या का समाधान करेगा। लेकिन शाम को सूरज ढलने के साथ उनकी उम्मीदों की रोशनी भी खत्म हो जाती है। अगले दिन फिर से वहीं सिलसिला शुरू हो जाता है। हैरानी का विषय यह है कि जहां सरकारें आमजन को हर सुख सुविधा मुहैया कराने के दावे करती रहती हैं, वहीं इतने परिवारों की सिसकती आंखों का दर्द कोई नहीं देख पा रहा है। प्रभावितों का धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। शुक्रवार को रेखा देवी, केसरी देवी, शारदा देवी, बंती देवी और मीना देवी क्रमिक अनशन पर बैठे।
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