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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन की अधिग्रहीत जमीन के इंतकालों की दुरुस्ती पर फिर उलझे विभाग

Sun, 10 May 2026 11:18 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sun, 10 May 2026 11:18 PM IST
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Departments again embroiled in rectifying the mutations of the acquired land for the Kiratpur-Nerchowk four-lane.
क्षेत्रीय अभिकरण की ताजा रिपोर्ट में बिना नियमानुसार आदेश करूकान दुरुस्ती से किया इनकार
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रिपोर्ट में कहा, करूकान विसंगतियां दूर होने के बाद ही संभव होगी दुरूस्ती
एनएचएआई की प्रस्तावना के बाद फिर उठे भू अर्जन अधिकारी के अधिकारों पर सवाल
पहले भी ततिमाजात और इंतकाल प्रक्रिया को लेकर आमने-सामने आ चुके हैं विभाग
फोरलेन रिकॉर्ड में पाई गई त्रुटियों ने बढ़ाई प्रशासनिक और कानूनी उलझन

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में अधिग्रहीत भूमि से जुड़े इंतकालों में पाई गई अनियमितताओं और करूकान दुरुस्ती को लेकर एक बार फिर विभागों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस बार क्षेत्रीय अभिकरण की ताजा रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि रिकॉर्ड में पाई गई करूकान विसंगतियों और अस्पष्ट प्रविष्टियों की नियमानुसार दुरुस्ती के बाद ही आगे संशोधन प्रक्रिया संभव होगी।
क्षेत्रीय अभिकरण द्वारा जारी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि उक्त फोरलेन से संबंधित मामलों की जांच के दौरान यह पाया गया कि कई प्रविष्टियों में करूकान या तो स्पष्ट नहीं है या उनमें विसंगतियां मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिन प्रविष्टि नंबरों में यह स्थिति पाई गई है, उनकी सूची तैयार कर संबंधित पत्रावली के साथ संलग्न की गई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दुरुस्ती आदेश के उपरांत ही करूकान दुरुस्ती की जा सकती है। इसके साथ ही आगामी कार्रवाई के लिए रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की बात भी कही गई है। दरअसल, पूरा विवाद उस समय फिर उभर कर सामने आया जब एनएचएआई की विशेष इकाई के भू अर्जन अधिकारी, मुख्यालय बिलासपुर की ओर से तहसीलदार झंडूता को करूकान दुरुस्ती करने संबंधी प्रस्तावना भेजा गया। इसकी प्रतिलिपि एसडीएम झंडूता को भी प्रेषित की गई थी। प्रस्तावना में इंतकालों में पाई गई अनियमितताओं को दुरुस्त करने की बात कही गई थी। हालांकि अब क्षेत्रीय अभिकरण की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि दुरुस्ती के लिए नियमानुसार आदेश आवश्यक हैं, तो फिर बिना स्पष्ट आदेशों के प्रस्तावना भेजे जाने का औचित्य क्या है। प्रशासनिक हलकों में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि क्या भू अर्जन अधिकारी को इस प्रकार की दुरुस्ती प्रक्रिया शुरू करवाने का अधिकार प्राप्त है या नहीं। बताते चलें कि इससे पहले भी फोरलेन इंतकालों से जुड़े ततिमाजात को लेकर विवाद सामने आ चुका है। उस दौरान एनएचएआई के तहसीलदार द्वारा एसडीएम सदर और एसडीएम घुमारवीं को पत्र भेजकर यह कहा गया था कि इंतकालों के साथ संलग्न ततिमाजात में करूकान पढ़ने योग्य नहीं है। ऐसे में हाथ से तैयार अतिरिक्त ततिमाजात संलग्न करने की अनुमति मांगी गई थी।
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इस पर तत्कालीन एसडीएम घुमारवीं ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा था कि इंतकाल प्रक्रिया एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है और इस प्रकार की अनुमति साधारण कागज पर नहीं दी जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया था कि ततिमाजात में पाई गई अनियमितताओं को दुरुस्त करने के लिए नियमानुसार प्रक्रिया अपनाना आवश्यक होगा। वहीं, तत्कालीन एसडीएम सदर ने भी भू अर्जन अधिकारी से विधिवत अनुमति लेने की बात कही थी। इसके जवाब में एनएचएआई के तहसीलदार ने कथित तौर पर यह कहा था कि भू अर्जन अधिकारी की शक्तियां केवल भूमि अधिग्रहण और मुआवजा आवंटन तक ही सीमित हैं। बाद में उक्त पत्राचार पर कोई अंतिम निर्णय न होने के चलते मामला निरस्त कर दिया गया था। अब एक बार फिर करूकान दुरुस्ती की प्रस्तावना और क्षेत्रीय अभिकरण की ताजा रिपोर्ट ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। रिकॉर्ड में पाई गई त्रुटियों, अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र और नियमानुसार दुरुस्ती प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक व कानूनी बहस तेज हो गई है।
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