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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन भूमि इंतकालों के नक्शाें में खामियां

Thu, 09 Apr 2026 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 09 Apr 2026 11:29 PM IST
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Defects in the maps of Kiratpur-Nerchowk four-lane land transfers
एक्सक्लूसिव
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त्रुटियों के चलते परियोजना सीमा के साथ जमीन की न तकसीम संभव, न निशानदेही
परियोजना के किनारे निजी जमीन और राइट ऑफ की सीमाएं भी नदारद
क्षेत्रीय अभिकरण और पटवारी हल्का समलेटा की रिपोर्ट में हुआ है खुलासा

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में गंभीर खामियों का मामला सामने आया है। केंद्र के पक्ष में दर्ज व तस्दीक किए गए इंतकालों की छानबीन में ऐसी त्रुटियां पाई गई हैं, जिनसे पूरी राजस्व प्रक्रिया प्रभावित हो गई है और जमीन से जुड़े कई अहम काम अटक गए हैं। वहीं प्रशासन ने बताया कि इसके कई दुष्प्रभाव हुए हैं।

मामला उस समय सामने आया जब फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने एसडीएम झंडूता को इंतकालों के नक्शा में त्रुटियों की शिकायत की। इस पर एसडीएम ने तहसीलदार से जवाब मांगा और आगे जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान क्षेत्रीय अभिकरण और पटवारी हल्का समलेटा की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मुहालों के कई खसरा नंबरों में करूकान दर्ज ही नहीं किए गए हैं, जबकि कई जगह कई करूकान को विभाजित कर दर्ज इंतकाल नहीं किए गए। इसके अलावा बड़ी संख्या में राजस्व रिकॉर्ड पढ़ने योग्य नहीं है। इन खामियों के चलते संबंधित मुहालों में जमीन की तकसीम (बंटवारा) और निशानदेही करना संभव नहीं रह गया है। सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई है कि भू-स्वामियों की बची हुई निजी जमीन की सही सीमाएं और फोरलेन के राइट ऑफ वे का भी स्पष्ट पता नहीं चल पा रहा है। इससे जमीन की असली स्थिति को समझना मुश्किल हो गया है और भविष्य में बड़े स्तर पर विवाद होने की आशंका बढ़ गई है। क्षेत्रीय कानूनगो ने भी अपनी जांच में स्पष्ट कहा है कि यदि इन त्रुटियों को तुरंत ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले समय में अनावश्यक भूमि विवाद खड़े होंगे। उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड को जल्द दुरुस्त करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा कानून के तहत हितधारकों को समय पर सूचित कर इंतकाल दर्ज किए जाते, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। समिति ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो प्रभावित लोगों को न्याय के लिए कोर्ट-कचहरी का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे उनका समय और मुआवजा दोनों बर्बाद होंगे। कुल मिलाकर, छानबीन रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि फोरलेन परियोजना के भूमि अधिग्रहण में हुई लापरवाही अब गंभीर रूप ले चुकी है और समय रहते सुधार नहीं किया गया तो यह मामला बड़े विवाद में बदल सकता है।
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