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नियमों को ताक पर रख कर छोड़े तंबाकू कारोबारी
Updated Tue, 05 Dec 2017 10:47 PM IST
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बिलासपुर। जिला में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई हैं। विभाग ने सोमवार को छापामारी के दौरान दो बोरे तंबाकू उत्पादों के पकड़े थे। लेकिन हैरत की बात है कि इस संबंध में विभाग की ओर से किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के रेगुलेशन 2.3.4 के अनुसार तंबाकू उत्पाद पकड़े जाने पर किसी को चेतावनी देकर नहीं छोड़ा जा सकता है।
ऐसे मामलों में विभाग को पूरी प्रक्रिया को अपना कर ज्यूडिशियल कोर्ट में चालान पेश करना होता है और मामले में सजा का प्रावधान है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कारोबारियों पर मेहरबानी दिखाते हुए मात्र चेतावनी देकर छोड़ दिया।
ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह संदेह के घेरे में है। वहीं मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो इस प्रकार के मामले हर हाल में कोर्ट में भेजना जरूरी है। कोई अधिकारी अपने स्तर पर तंबाकू के उत्पादन पकड़े जाने पर चेतावनी देकर नहीं छोड़ सकता। ऐसे में बिलासपुर में विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
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उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग ने शहर में छापामारी कर तंबाकू का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। विभाग का दावा था कि इस दौरान करीब दो बोरे तंबाकू उत्पादों के पकड़े गए। जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया गया। वहीं कारोबारियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
एमएस डॉ. राजेश आहलुवालिया का कहना है कि विभिन्न दुकानों में छापामारी के दौरान करीब दो बोरियां तंबाकू उत्पादों की पकड़ी गई हैं। तंबाकू उत्पादों को जलाकर नष्ट कर दिया गया है। यह पूछे जाने पर की किसी नियम के तहत चेतावनी देकर कारोबारियों को छोड़ा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नियम की जानकारी नहीं है। उच्च अधिकारियों से अब इस संबंध में बात करेंगे।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के रेगुलेशन 2.3.4 के अनुसार तंबाकू अनसेफ फूड में आता है। अधिनियन के अनुसार इस मामले में कम से कम 6 महीने और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।
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ऐसे मामलों में विभाग को पूरी प्रक्रिया को अपना कर ज्यूडिशियल कोर्ट में चालान पेश करना होता है और मामले में सजा का प्रावधान है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कारोबारियों पर मेहरबानी दिखाते हुए मात्र चेतावनी देकर छोड़ दिया।
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ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह संदेह के घेरे में है। वहीं मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो इस प्रकार के मामले हर हाल में कोर्ट में भेजना जरूरी है। कोई अधिकारी अपने स्तर पर तंबाकू के उत्पादन पकड़े जाने पर चेतावनी देकर नहीं छोड़ सकता। ऐसे में बिलासपुर में विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
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उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग ने शहर में छापामारी कर तंबाकू का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। विभाग का दावा था कि इस दौरान करीब दो बोरे तंबाकू उत्पादों के पकड़े गए। जिन्हें बाद में नष्ट कर दिया गया। वहीं कारोबारियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
एमएस डॉ. राजेश आहलुवालिया का कहना है कि विभिन्न दुकानों में छापामारी के दौरान करीब दो बोरियां तंबाकू उत्पादों की पकड़ी गई हैं। तंबाकू उत्पादों को जलाकर नष्ट कर दिया गया है। यह पूछे जाने पर की किसी नियम के तहत चेतावनी देकर कारोबारियों को छोड़ा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नियम की जानकारी नहीं है। उच्च अधिकारियों से अब इस संबंध में बात करेंगे।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के रेगुलेशन 2.3.4 के अनुसार तंबाकू अनसेफ फूड में आता है। अधिनियन के अनुसार इस मामले में कम से कम 6 महीने और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।