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धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोपी को तीन साल का कारावास
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घुमारवीं (बिलासपुर)। अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी घुमारवीं विक्रांत कौंडल की अदालत ने धोखाधड़ी तथा आपराधिक षड्यंत्र रचने के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि मामले की दूसरी आरोपी महिला सुरभि अदालत से उद्घोषित अपराधी हो चुकी है। पुलिस के पीओ सेल की टीम को उसे पकड़ने की जिम्मेवारी सौंपी गई है।
असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटार्नी भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि इस मामले की शिकायत बलीराम पुत्र कृपाराम निवासी गांव बौणी डाकघर भपराल तहसील घुमारवीं ने पुलिस थाना भराड़ी में दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता की शिकायत पर भराड़ी पुलिस ने मामले के आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व 120बी के तहत आपराधिक मामला दर्ज करके मामले की तहकीकात शुरू की थी।
जांच के दौरान पाया गया कि बलीराम ने अपने तथा अपनी पत्नी के नाम बैंक के माध्यम से दो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। मामले के आरोपियों ने एक जाल बिछाकर फोन के माध्यम से शिकायतकर्ता को कहा कि उनकी पॉलिसी घाटे में चल रही हैं। कुछ धनराशि उनके बताए गए बैंक खाते में डालने को कहा। तहकीकात में आया कि आरोपी दो अलग-अलग नामों से शिकायतकर्ता को फोन करते थे।
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आरोपियों ने शिकायतकर्ता से कुल 15 लाख रुपये आपराधिक षड्यंत्र रच कर लूट लिए। इस मामले में नामजद आरोपी करनदीप पुत्र कुलदीप कुमार ब्लॉक गली नंबर 4-5 विष्णु गार्डन न्यू दिल्ली ने एटीएम के माध्यम से 60 हजार रुपये निकाल लिए। उसी दिन आरोपी ने बताए गए खाते से 5 लाख रुपये की निकासी की। इसके अलावा उसने 5 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से अपनी पत्नी सुरभि भसीन के खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस तफ्तीश में आया कि सुरभि भसीन ने 5 लाख रुपये में से 4 लाख रुपये की निकासी कर ली तथा बकाया 1 लाख रुपये की निकासी एटीएम के माध्यम से कर ली। मामले के आरोपियों ने यह धनराशि उन खातों से निकाली जिन खातों में उन्होंने शिकायतकर्ता से पैसा ट्रांसफर करवाया था। भराड़ी पुलिस की टीम ने दिल्ली जाकर संबंधित बैंकों से आरोपियों के खातों की स्टेटमेंट प्राप्त की तथा दोनों को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया।
मजिस्ट्रेट के समक्ष दोनों के हस्ताक्षर नमूने लिए गए जिनका मिलान आरोपियों द्वारा बैंक में भरे गए निकासी फार्म से किया गया। भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मामले के आरोपियों ने शिकायतकर्ता को झांसे में लेकर अलग-अलग योजनाओं में पैसे निवेश करने के लिए भी कहा था। जब आरोपियों ने शिकायतकर्ता की फोन कॉल्स उठाना बंद कर दी तब जाकर शिकायतकर्ता ने पुलिस थाना भराड़ी में आपराधिक मामला दर्ज करवाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 20 गवाह पेश किए। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर मामले के आरोपी करनदीप को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व धारा 120 बी के तहत तीन वर्ष के कारावास तथा 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की सूरत में आरोपी को 1 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। इस मामले में नामजद दूसरी आरोपी सुरभि भसीन अदालत से उद्घोषित अपराधी हो चुकी है।
असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटार्नी भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि इस मामले की शिकायत बलीराम पुत्र कृपाराम निवासी गांव बौणी डाकघर भपराल तहसील घुमारवीं ने पुलिस थाना भराड़ी में दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता की शिकायत पर भराड़ी पुलिस ने मामले के आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व 120बी के तहत आपराधिक मामला दर्ज करके मामले की तहकीकात शुरू की थी।
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जांच के दौरान पाया गया कि बलीराम ने अपने तथा अपनी पत्नी के नाम बैंक के माध्यम से दो लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। मामले के आरोपियों ने एक जाल बिछाकर फोन के माध्यम से शिकायतकर्ता को कहा कि उनकी पॉलिसी घाटे में चल रही हैं। कुछ धनराशि उनके बताए गए बैंक खाते में डालने को कहा। तहकीकात में आया कि आरोपी दो अलग-अलग नामों से शिकायतकर्ता को फोन करते थे।
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आरोपियों ने शिकायतकर्ता से कुल 15 लाख रुपये आपराधिक षड्यंत्र रच कर लूट लिए। इस मामले में नामजद आरोपी करनदीप पुत्र कुलदीप कुमार ब्लॉक गली नंबर 4-5 विष्णु गार्डन न्यू दिल्ली ने एटीएम के माध्यम से 60 हजार रुपये निकाल लिए। उसी दिन आरोपी ने बताए गए खाते से 5 लाख रुपये की निकासी की। इसके अलावा उसने 5 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से अपनी पत्नी सुरभि भसीन के खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस तफ्तीश में आया कि सुरभि भसीन ने 5 लाख रुपये में से 4 लाख रुपये की निकासी कर ली तथा बकाया 1 लाख रुपये की निकासी एटीएम के माध्यम से कर ली। मामले के आरोपियों ने यह धनराशि उन खातों से निकाली जिन खातों में उन्होंने शिकायतकर्ता से पैसा ट्रांसफर करवाया था। भराड़ी पुलिस की टीम ने दिल्ली जाकर संबंधित बैंकों से आरोपियों के खातों की स्टेटमेंट प्राप्त की तथा दोनों को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया।
मजिस्ट्रेट के समक्ष दोनों के हस्ताक्षर नमूने लिए गए जिनका मिलान आरोपियों द्वारा बैंक में भरे गए निकासी फार्म से किया गया। भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मामले के आरोपियों ने शिकायतकर्ता को झांसे में लेकर अलग-अलग योजनाओं में पैसे निवेश करने के लिए भी कहा था। जब आरोपियों ने शिकायतकर्ता की फोन कॉल्स उठाना बंद कर दी तब जाकर शिकायतकर्ता ने पुलिस थाना भराड़ी में आपराधिक मामला दर्ज करवाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 20 गवाह पेश किए। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर मामले के आरोपी करनदीप को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420 व धारा 120 बी के तहत तीन वर्ष के कारावास तथा 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की सूरत में आरोपी को 1 माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। इस मामले में नामजद दूसरी आरोपी सुरभि भसीन अदालत से उद्घोषित अपराधी हो चुकी है।