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बिलासपुर में 9.30 बजे आया भारी भूकंप, शहर में हड़कंप

Fri, 13 Mar 2020 11:30 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2020 11:30 PM IST
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बिलासपुर में मॉकड्रिल के दौरान व्यक्ति को सुरक्षित जगह पहुंचाते होमगार्ड के जवान। - फोटो : BILASPUR
बिलासपुर। आपदाएं कभी भी आ सकती हैं, पहले से योजना बनाना महत्वपूर्ण होता है ताकि आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसके लिए एनडीआरएफ 7वीं बटालियन और होम गार्ड के जवानों की ओर से आपदा प्रबंधन के दौरान किए जाने वाले बचाव कार्यों और त्वरित कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर बिलासपुर में मॉकड्रिल का आयोजन किया गया।
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एडीएम विनय धीमान ने बताया कि जिला बिलासपुर के राजकीय महाविद्यालय में भूकंप का और उपायुक्त परिसर में आगजनी का सिनेरियो तैयार करके मॉकड्रिल की गई। प्रात: 9:30 बजे हूटर बजने के तुरंत बाद जिले में आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, स्वयंसेवी तथा आमजन निर्धारित स्टेजिंग एरिया कॉलेज ग्राउंड में पहुंच गए, जहां से आकलन और राहत कार्य में जुटी टीमों को घटना स्थल पर भेज दिया गया।
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उन्होंने बताया कि घटना के उपरांत बचाव कार्य को इंसीडैंट रिंसपोंस सिस्टम की तर्ज पर पूर्ण किया गया जिसके तहत सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई थी। इसमें आपदा के दौरान प्रयोग में लाए जाने वाले विभिन्न संसाधनों, रणनीति, कमांड, ऑप्रेशन, योजना, क्षमता तथा लक्ष्य इत्यादि के संदर्भ में कार्य योजना तैयार करके परिस्थिति से निपटने के लिए घटना स्थल पर राहत टीमों को आवश्यक उपकरणों के साथ भेजा गया ताकि प्रभावित लोगों को शीघ्र राहत प्रदान करके होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मॉकड्रिल का उद्देश्य यह रहता है कि किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए क्या-क्या सुविधाएं हैं और क्या कमियां हैं ताकि उनकी गहनता से समीक्षा करके भविष्य के लिए उनमें सुधार लाया जा सके। उन्होंने कहा कि मॉकड्रिल के दौरान उजागर हुई विभिन्न कमियों और कठिनाइयों को दूर करने के लिए संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की आपदा के दौरान बेहतर राहत कार्य किया जा सके।

एनडीआरएफ 7वीं बटालियन के इंस्पेक्टर मनोज कुमार भारद्वाज ने बताया कि एनडीआरएफ का मुख्य कार्यालय भटिंडा में है। जबकि आपदा के दौरान शीघ्र आपदा स्थल पर पहुंचने के लिए क्षेत्रीय प्रतिक्रिया सेंटर आरआरसी भी है। हिमाचल के लिए कांगड़ा जिले के नुरपूर में है और पिंजौर, लुधियाणा और श्रीनगर में भी आरआरसी स्थापित की गई हैं।
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