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मंडी भराड़ी से लेकर नागचला तक का फोरलेन प्लान मात्र फोटो कॉपी
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान नियमों की सरेआम अनदेखी की गई है जिसका खुलासा अब भू-अर्जन अधिकारी की रिपोर्ट से भी हो गया। भू-अर्जन अधिकारी एनएचएआई ने पत्र संख्या एलएओ(एसएलएयू)एनएचएआरई-1028 के माध्यम से बताया कि बिलासपुर जिले के मंडी भराड़ी से लेकर मंडी जिले के नागचला तक जो भूमि अधिग्रहण हुआ है उसके करूकान दर्ज नहीं है। पूरा प्लान एक फोटो कॉपी है। इस कारण उसकी पैमाइश नहीं हो पा रही है क्योंकि उसमें पैमाना सही नहीं लग रहा है।
संबंधित विभाग ने रिपोर्ट में यह भी माना कि पैमाना न लगने से जमीन की सही पैमाइश नहीं हो पाएगी जिस कारण कितनी जमीन का अधिग्रहण हुआ है उसका केवल मात्र अंदाजा ही लगाया जा सका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब अगर करूकान दर्ज करने पड़े तो इसके लिए लंबा समय लगेगा। वह अब केवल ततीमा के आधार पर ही हो पाएगा। इसके लिए अधिकारियों की मंजूरी भी जरूरी होगी। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि जिस आधार पर मंडी भराड़ी से नागचला तक का रिकॉर्ड है उसमें पारदर्शिता नहीं है। ऐसे में अब सवाल है कि अगर भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता ही नहीं है तो फिर लोगों की जमीन का किस आधार पर अधिग्रहण किया गया है।
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इसी संबंध में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, राकेश कुमार, चिंता देवी, सीता राम, सदा राम, महेंद्र सिंह, जगदीश राम, बलदेव, जगत राम और महासचिव व पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा का कहना है कि अगर जब करूकान ही दर्ज नहीं है तो किस आधार पर सही पता लग पाएगा कि लोगों की कितनी जमीन फोरलेन निर्माण में आई है। कहा कि मंडी भराड़ी से लेकर नागचला तक के सैकड़ों लोगों से भूमि अधिग्रहण के नाम पर छलावा किया गया है। कहा कि एनएचएआई ने एक फोटो स्टेट प्लान को आधार मान कर बिना करूकान दर्ज किए और बिना पैमाइश किए कैसे जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। इस संबंध में समिति ने अब उपायुक्त बिलासपुर को शिकायत दी है।
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संबंधित विभाग ने रिपोर्ट में यह भी माना कि पैमाना न लगने से जमीन की सही पैमाइश नहीं हो पाएगी जिस कारण कितनी जमीन का अधिग्रहण हुआ है उसका केवल मात्र अंदाजा ही लगाया जा सका है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि अब अगर करूकान दर्ज करने पड़े तो इसके लिए लंबा समय लगेगा। वह अब केवल ततीमा के आधार पर ही हो पाएगा। इसके लिए अधिकारियों की मंजूरी भी जरूरी होगी। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि जिस आधार पर मंडी भराड़ी से नागचला तक का रिकॉर्ड है उसमें पारदर्शिता नहीं है। ऐसे में अब सवाल है कि अगर भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता ही नहीं है तो फिर लोगों की जमीन का किस आधार पर अधिग्रहण किया गया है।
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इसी संबंध में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, राकेश कुमार, चिंता देवी, सीता राम, सदा राम, महेंद्र सिंह, जगदीश राम, बलदेव, जगत राम और महासचिव व पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा का कहना है कि अगर जब करूकान ही दर्ज नहीं है तो किस आधार पर सही पता लग पाएगा कि लोगों की कितनी जमीन फोरलेन निर्माण में आई है। कहा कि मंडी भराड़ी से लेकर नागचला तक के सैकड़ों लोगों से भूमि अधिग्रहण के नाम पर छलावा किया गया है। कहा कि एनएचएआई ने एक फोटो स्टेट प्लान को आधार मान कर बिना करूकान दर्ज किए और बिना पैमाइश किए कैसे जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। इस संबंध में समिति ने अब उपायुक्त बिलासपुर को शिकायत दी है।