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नागरिक चिकित्सालय बना कोविड हेल्थ केंद्र, विरोध
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घुमारवीं(बिलासपुर)। स्थानीय प्रशासन के अनुसार निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं हिमाचल प्रदेश सरकार के 4 मई के आदेशानुसार जिला बिलासपुर के नागरिक चिकित्सालय घुमारवीं को डेडीकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर घोषित किया गया है। हालांकि इसकी स्थानीय स्तर पर कड़ी निंदा भी शुरू हो गई है। लोगों ने फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर शहर के बीचोबीच बनाए गए स्वास्थ्य केंद्र पर कड़ा एतराज जताया।
आदेश के अनुसार जिला बिलासपुर में कोरोना (कोविड-19) वायरस के संदिग्ध और ऐसे लोग जिनमें कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि होगी या संदिग्धों की देखभाल एवं उपचार इस अस्पताल में किया जाना निर्धारित किया गया है। यह जानकारी उपमंडल अधिकारी घुमारवीं शशि पाल शर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि आदेश के अनुसार 11 मई से नागरिक चिकित्सालय घुमारवीं में आपातकालीन मरीजों को अस्पताल में दाखिल कर उनका उपचार करने की सेवाएं बंद कर दी गई हैं। बताया कि सरकार के निर्देशानुसार कोविड-19 से संबंधित व्यक्तियों एवं मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा 5 टीमों का गठन कर लिया गया है। इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी घुमारवीं ने बताया कि उपमंडल की जनता स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भराड़ी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरलोग, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुठेड़ा या जिला अस्पताल बिलासपुर की सेवाएं जा सकते हैं।
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बताया कि जब तक इस अस्पताल में कोरोना वायरस को संक्रमित कोई व्यक्ति इलाज के लिए नहीं आता है तब तक अस्पताल प्रशासन ने आम जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक वाह्य रोगी विभाग की सेवाएं सुचारू रूप से बनाएं रखने का फैसला लिया है। लेकिन जैसे ही कोरोना वायरस से संक्रमित कोई रोगी अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल होता है। उसी समय बाह्य रोगी विभाग की यह सेवा भी तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाएगी।
हालांकि उपमंडल मुख्यालय में शहर के बीचोंबीच स्थित होने तथा सदर घुमारवीं तथा झंडूता का केंद्र बिंदु होने के चलते स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय पर लोगों में असहमति भी उभर कर सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर स्थानीय व्यापारियों ने भी इस निर्णय को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि इस इस निर्णय से स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी। वहीं शहर के बीचोबीच स्थित होने के चलते इस अस्पताल को कोविड-19 हेल्थ सेंटर बनाए जाने का विरोध किया है।
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आदेश के अनुसार जिला बिलासपुर में कोरोना (कोविड-19) वायरस के संदिग्ध और ऐसे लोग जिनमें कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि होगी या संदिग्धों की देखभाल एवं उपचार इस अस्पताल में किया जाना निर्धारित किया गया है। यह जानकारी उपमंडल अधिकारी घुमारवीं शशि पाल शर्मा ने दी।
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उन्होंने बताया कि आदेश के अनुसार 11 मई से नागरिक चिकित्सालय घुमारवीं में आपातकालीन मरीजों को अस्पताल में दाखिल कर उनका उपचार करने की सेवाएं बंद कर दी गई हैं। बताया कि सरकार के निर्देशानुसार कोविड-19 से संबंधित व्यक्तियों एवं मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा 5 टीमों का गठन कर लिया गया है। इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी घुमारवीं ने बताया कि उपमंडल की जनता स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भराड़ी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरलोग, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुठेड़ा या जिला अस्पताल बिलासपुर की सेवाएं जा सकते हैं।
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बताया कि जब तक इस अस्पताल में कोरोना वायरस को संक्रमित कोई व्यक्ति इलाज के लिए नहीं आता है तब तक अस्पताल प्रशासन ने आम जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक वाह्य रोगी विभाग की सेवाएं सुचारू रूप से बनाएं रखने का फैसला लिया है। लेकिन जैसे ही कोरोना वायरस से संक्रमित कोई रोगी अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल होता है। उसी समय बाह्य रोगी विभाग की यह सेवा भी तुरंत प्रभाव से बंद कर दी जाएगी।
हालांकि उपमंडल मुख्यालय में शहर के बीचोंबीच स्थित होने तथा सदर घुमारवीं तथा झंडूता का केंद्र बिंदु होने के चलते स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय पर लोगों में असहमति भी उभर कर सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर स्थानीय व्यापारियों ने भी इस निर्णय को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि इस इस निर्णय से स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी। वहीं शहर के बीचोबीच स्थित होने के चलते इस अस्पताल को कोविड-19 हेल्थ सेंटर बनाए जाने का विरोध किया है।