{"_id":"6a5f5208ce399c64b00a368b","slug":"court-decession-bilaspur-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-164076-2026-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: घुमारवीं मार्केट यार्ड की 30 साल की लीज रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: घुमारवीं मार्केट यार्ड की 30 साल की लीज रद्द
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने भी खारिज की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में एम/एस राज कम्युनिकेशन कंपनी को झटका लगा है। अदालत ने एपीएमसी बिलासपुर के मार्केट यार्ड घुमारवीं की 30 वर्षीय लीज रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। कंपनी की सिविल अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया गया है, जिसमें वादपत्र को सुनवाई योग्य नहीं माना गया था। अदालत ने कहा कि कंपनी ने कानून में तय अपील का रास्ता नहीं अपनाया और सीधे सिविल अदालत में वाद दायर किया।
एपीएमसी बिलासपुर ने वर्ष 2020 में घुमारवीं मार्केट यार्ड परिसर को राज कम्युनिकेशन को 30 वर्ष के लिए लीज पर दिया था। इसका वार्षिक किराया 48 हजार रुपये और जीएसटी तय किया गया था। कंपनी ने दावा किया कि उसने भवन की मरम्मत और अन्य कार्यों पर करीब 24.59 लाख रुपये खर्च किए। कंपनी का तर्क था कि उसने लीज की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। हालांकि, एपीएमसी ने निरीक्षण के दौरान लीज शर्तों के विपरीत परिवर्तन पाए। इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और 28 अक्तूबर 2022 को लीज रद्द कर दी गई। लीज रद्द होने पर कंपनी ने सिविल अदालत में वाद दायर किया। कंपनी ने लीज निरस्तीकरण को अवैध घोषित करने और बेदखली पर रोक लगाने की मांग की थी। कंपनी ने राजनीतिक दबाव और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया। निचली अदालत ने मई 2026 में वादपत्र खारिज कर दिया था।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम की धारा 68 के तहत सचिव के आदेश के विरुद्ध स्पष्ट अपीलीय व्यवस्था उपलब्ध है। अपीलकर्ता ने इस वैधानिक उपाय का उपयोग किए बिना सीधे सिविल अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कानून में विशेष अपील का प्रावधान मौजूद है, तो पहले उसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। रिकॉर्ड से यह भी प्रतीत नहीं होता कि कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
विज्ञापन
विभाग ने निरीक्षण कराया, कारण बताओ नोटिस जारी किया और कंपनी से जवाब भी लिया। इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध नहीं होता। इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने सिविल अपील को खारिज कर दिया। राज कम्युनिकेशन ने दलील दी थी कि भवन अत्यंत जर्जर अवस्था में था। उसने व्यवसाय के अनुरूप उपयोग योग्य बनाने के लिए करीब 24.59 लाख रुपये मरम्मत, फर्नीचर और विद्युत फिटिंग पर खर्च किए। कंपनी ने यह भी कहा कि उसने कृषि उत्पादों, मत्स्य बीज आपूर्ति और ई-ट्रेडिंग जैसे कृषि से जुड़े कार्य किए। कंपनी का तर्क था कि उसने लीज की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि उसके खिलाफ राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की गई। निरीक्षण रिपोर्ट बाद में तैयार की गई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ। लीज डीड में विवादों के निपटारे के लिए सिविल अदालत का अधिकार क्षेत्र भी निर्धारित किया गया था। एपीएमसी ने दावा किया कि निरीक्षण के दौरान भवन में लीज शर्तों के विपरीत परिवर्तन पाए गए। इसके बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जवाब लेने के बाद 28 अक्तूबर 2022 को लीज रद्द कर दी गई। एपीएमसी ने निचली अदालत में दायर आवेदन में कहा था कि अधिनियम के तहत सचिव के आदेश के खिलाफ पहले समिति के समक्ष अपील का प्रावधान है। ऐसे में सीधे सिविल अदालत में वाद दायर करना कानून के अनुरूप नहीं था। इस आधार पर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश घुमारवीं ने मई 2026 में वाद पत्र को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया था। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 27 मई 2026 को निचली अदालत के इस आदेश को यथावत बरकरार रखा।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में एम/एस राज कम्युनिकेशन कंपनी को झटका लगा है। अदालत ने एपीएमसी बिलासपुर के मार्केट यार्ड घुमारवीं की 30 वर्षीय लीज रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। कंपनी की सिविल अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया गया है, जिसमें वादपत्र को सुनवाई योग्य नहीं माना गया था। अदालत ने कहा कि कंपनी ने कानून में तय अपील का रास्ता नहीं अपनाया और सीधे सिविल अदालत में वाद दायर किया।
एपीएमसी बिलासपुर ने वर्ष 2020 में घुमारवीं मार्केट यार्ड परिसर को राज कम्युनिकेशन को 30 वर्ष के लिए लीज पर दिया था। इसका वार्षिक किराया 48 हजार रुपये और जीएसटी तय किया गया था। कंपनी ने दावा किया कि उसने भवन की मरम्मत और अन्य कार्यों पर करीब 24.59 लाख रुपये खर्च किए। कंपनी का तर्क था कि उसने लीज की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। हालांकि, एपीएमसी ने निरीक्षण के दौरान लीज शर्तों के विपरीत परिवर्तन पाए। इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और 28 अक्तूबर 2022 को लीज रद्द कर दी गई। लीज रद्द होने पर कंपनी ने सिविल अदालत में वाद दायर किया। कंपनी ने लीज निरस्तीकरण को अवैध घोषित करने और बेदखली पर रोक लगाने की मांग की थी। कंपनी ने राजनीतिक दबाव और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया। निचली अदालत ने मई 2026 में वादपत्र खारिज कर दिया था।
विज्ञापन
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम की धारा 68 के तहत सचिव के आदेश के विरुद्ध स्पष्ट अपीलीय व्यवस्था उपलब्ध है। अपीलकर्ता ने इस वैधानिक उपाय का उपयोग किए बिना सीधे सिविल अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कानून में विशेष अपील का प्रावधान मौजूद है, तो पहले उसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। रिकॉर्ड से यह भी प्रतीत नहीं होता कि कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
विज्ञापन
विभाग ने निरीक्षण कराया, कारण बताओ नोटिस जारी किया और कंपनी से जवाब भी लिया। इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध नहीं होता। इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने सिविल अपील को खारिज कर दिया। राज कम्युनिकेशन ने दलील दी थी कि भवन अत्यंत जर्जर अवस्था में था। उसने व्यवसाय के अनुरूप उपयोग योग्य बनाने के लिए करीब 24.59 लाख रुपये मरम्मत, फर्नीचर और विद्युत फिटिंग पर खर्च किए। कंपनी ने यह भी कहा कि उसने कृषि उत्पादों, मत्स्य बीज आपूर्ति और ई-ट्रेडिंग जैसे कृषि से जुड़े कार्य किए। कंपनी का तर्क था कि उसने लीज की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि उसके खिलाफ राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की गई। निरीक्षण रिपोर्ट बाद में तैयार की गई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ। लीज डीड में विवादों के निपटारे के लिए सिविल अदालत का अधिकार क्षेत्र भी निर्धारित किया गया था। एपीएमसी ने दावा किया कि निरीक्षण के दौरान भवन में लीज शर्तों के विपरीत परिवर्तन पाए गए। इसके बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जवाब लेने के बाद 28 अक्तूबर 2022 को लीज रद्द कर दी गई। एपीएमसी ने निचली अदालत में दायर आवेदन में कहा था कि अधिनियम के तहत सचिव के आदेश के खिलाफ पहले समिति के समक्ष अपील का प्रावधान है। ऐसे में सीधे सिविल अदालत में वाद दायर करना कानून के अनुरूप नहीं था। इस आधार पर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश घुमारवीं ने मई 2026 में वाद पत्र को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया था। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 27 मई 2026 को निचली अदालत के इस आदेश को यथावत बरकरार रखा।