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Bilaspur News: चरस बरामदगी मामले में अदालत ने आरोपी को किया बरी
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चरस बरामदगी मामले में अदालत ने आरोपी को किया बरी - अदालत ने गवाहों के बयानों में नहीं पाई विश्वसनीयता
- साल 2020 में विशेष टीम ने बरामद की थी 2.468 किलोग्राम चरस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने चरस बरामदगी मामले के एक आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ दिया है। अदालत ने टिप्पणी की है कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान एक दूसरे से अलग-अलग हैं। उनके बयानों में विश्वसनीयता नहीं पाई गई है।
मामला 26 जुलाई 2020 को हुआ था। विशेष टीम ने गंभर पुल के पास नाका लगाया था। इसी बीच एक पिकअप कार को रोका गया। तलाशी लेने पर 2.468 किलोग्राम चरस बरामद हुई। पिकअप चालक कुल्लू के निवासी रामलाल को मामले में गिरफ्तार किया गया। अदालत ने निर्णय देते हुए टिप्पणी की है कि सरकारी गवाहों और स्वतंत्र गवाह की गवाही विश्वास पैदा नहीं करती है। बयानों में विरोधाभास ने स्थिति को और उलझा दिया है। सबूत भी पर्याप्त नहीं पाए गए हैं। हालांकि स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन पक्ष का समर्थन करने का प्रयास किया है, लेकिन उसकी गवाही ऊपर चर्चा किए गए महत्वपूर्ण और प्रमुख मुद्दों पर कमजोर है। गवाही में सच्चाई का आभास होना चाहिए और उस पर स्पष्ट और विश्वसनीय रूप से भरोसा किया जा सके।
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- साल 2020 में विशेष टीम ने बरामद की थी 2.468 किलोग्राम चरस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने चरस बरामदगी मामले के एक आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ दिया है। अदालत ने टिप्पणी की है कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान एक दूसरे से अलग-अलग हैं। उनके बयानों में विश्वसनीयता नहीं पाई गई है।
मामला 26 जुलाई 2020 को हुआ था। विशेष टीम ने गंभर पुल के पास नाका लगाया था। इसी बीच एक पिकअप कार को रोका गया। तलाशी लेने पर 2.468 किलोग्राम चरस बरामद हुई। पिकअप चालक कुल्लू के निवासी रामलाल को मामले में गिरफ्तार किया गया। अदालत ने निर्णय देते हुए टिप्पणी की है कि सरकारी गवाहों और स्वतंत्र गवाह की गवाही विश्वास पैदा नहीं करती है। बयानों में विरोधाभास ने स्थिति को और उलझा दिया है। सबूत भी पर्याप्त नहीं पाए गए हैं। हालांकि स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन पक्ष का समर्थन करने का प्रयास किया है, लेकिन उसकी गवाही ऊपर चर्चा किए गए महत्वपूर्ण और प्रमुख मुद्दों पर कमजोर है। गवाही में सच्चाई का आभास होना चाहिए और उस पर स्पष्ट और विश्वसनीय रूप से भरोसा किया जा सके।
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