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Bilaspur News: सराकरी भूमि पर 147 अवैध निर्माणों को 2 करोड़ 23 लाख का मुआवजा
Tue, 05 Nov 2024 11:20 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Tue, 05 Nov 2024 11:20 PM IST
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-दधोल-लदरौर, रघुनाथपुरा-हरपुरा-भराड़ी सड़कों के चौड़ीकरण का मामला
-सरकारी भूमि पर बने थे सभी स्ट्रक्चर, किरायेदारों तक को दिया गया है पैसा
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना विकास निगम (एचपीआरआईडीसी) की दधोल-लदरौर, रघुनाथपुरा-हरपुरा-भराड़ी सड़कों के चौड़ीकरण के लिए किया मुआवजा आवंटन विवादों के घेरे में आ गया है। परियोजनाओं में सरकारी भूमि पर बने 147 अवैध निर्माणों के लिए कुल 2 करोड़ 23 लाख 22 हजार 755 रुपये का मुआवजा आवंटित किया गया है।
पत्र संख्या एचपीआरआईडीसी/एसआरपी-पीआईओ/2024-25-2161-25-10-2024 व 2198-28-10-2024 में निगम के जन सूचना अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। इसमें बताया है कि रघुनाथपुरा-हरपुरा-भराड़ी रोड पर सरकारी भूमि पर बने 13 मकानों को 5 लाख 53 हजार 119 रुपये मुआवजा आवंटन किया गया है। इसके अलावा दधोल-लदरौर सड़क के विस्तारीकरण के लिए सरकारी भूमि पर बने ग्राम पंचायत गाहर (ट्री प्लेटफॉर्म के लिए) के 39,851 रुपये, ग्राम पंचायत गतवाड़ को 56,606 रुपये, प्रधानाचार्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल भराड़ी को 9 लाख 67 हजार 408 रुपये, ग्राम पंचायत भराड़ी को 2 लाख 75 हजार 900 रुपये, रोगी कल्याण समिति, भराड़ी को 2 लाख 39 हजार 350 रुपये, एमएस सुधार समिति संतोषी माता मंदिर कमेटी लदरौर को 5 लाख 22 हजार 518 रुपये, व्यापार मंडल, लदरौर को 2 लाख 26 हजार 348 रुपये बांटे गए हैं। इसके अतिरिक्त, दधोल-लदरौर और रघुनाथपुरा-हरपुरा-भराड़ी सड़कों के चौड़ीकरण में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जाधारियों को भी मुआवजा दिया गया है, सारी राशि को मिलाकर कुल मुआवजा राशि 2 करोड़ 23 लाख 22 हजार 755 रुपये हो गई है।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव एवं आरटीआई प्रार्थी मदन शर्मा ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जाधारियों को मुआवजा देना उचित नहीं है। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को मुआवजा देकर सरकार ने अपनी ही नीतियों का उल्लंघन किया है। कहा कि मुआवजा आवंटन करने वाली एजेंसी ने अपने प्रभाव का उपयोग कर अवैध कब्जाधारियों को लाभ पहुंचाया है। समिति ने यह भी मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कहा कि इससे पहले किरतपुर-नेरचौक फोरलेन में भी अवैध ढांचों के लिए 5 करोड़ के मुआवजा आवंटन का खुलासा हुआ है। जिस पर कार्रवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने पर इसे कैग को भेजा है। 19 नवंबर को इसकी सुनवाई है। वहीं अब यह मामला सामने आ गया है।
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शर्मा ने कहा कि दधोल-लदरौर सड़क के विस्तारीकरण पर किरायेदारों को भी मुआवजा आवंटन हुआ है। लेकिन मटौर शिमला फोरलेन के प्रभावितों को इस तरह से मुआवजा नहीं आवंटित हुआ। इससे सरकारी नीतियों में असमानता साफ दिख रही है। संवाद
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-सरकारी भूमि पर बने थे सभी स्ट्रक्चर, किरायेदारों तक को दिया गया है पैसा
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश सड़क अवसंरचना विकास निगम (एचपीआरआईडीसी) की दधोल-लदरौर, रघुनाथपुरा-हरपुरा-भराड़ी सड़कों के चौड़ीकरण के लिए किया मुआवजा आवंटन विवादों के घेरे में आ गया है। परियोजनाओं में सरकारी भूमि पर बने 147 अवैध निर्माणों के लिए कुल 2 करोड़ 23 लाख 22 हजार 755 रुपये का मुआवजा आवंटित किया गया है।
पत्र संख्या एचपीआरआईडीसी/एसआरपी-पीआईओ/2024-25-2161-25-10-2024 व 2198-28-10-2024 में निगम के जन सूचना अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। इसमें बताया है कि रघुनाथपुरा-हरपुरा-भराड़ी रोड पर सरकारी भूमि पर बने 13 मकानों को 5 लाख 53 हजार 119 रुपये मुआवजा आवंटन किया गया है। इसके अलावा दधोल-लदरौर सड़क के विस्तारीकरण के लिए सरकारी भूमि पर बने ग्राम पंचायत गाहर (ट्री प्लेटफॉर्म के लिए) के 39,851 रुपये, ग्राम पंचायत गतवाड़ को 56,606 रुपये, प्रधानाचार्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल भराड़ी को 9 लाख 67 हजार 408 रुपये, ग्राम पंचायत भराड़ी को 2 लाख 75 हजार 900 रुपये, रोगी कल्याण समिति, भराड़ी को 2 लाख 39 हजार 350 रुपये, एमएस सुधार समिति संतोषी माता मंदिर कमेटी लदरौर को 5 लाख 22 हजार 518 रुपये, व्यापार मंडल, लदरौर को 2 लाख 26 हजार 348 रुपये बांटे गए हैं। इसके अतिरिक्त, दधोल-लदरौर और रघुनाथपुरा-हरपुरा-भराड़ी सड़कों के चौड़ीकरण में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जाधारियों को भी मुआवजा दिया गया है, सारी राशि को मिलाकर कुल मुआवजा राशि 2 करोड़ 23 लाख 22 हजार 755 रुपये हो गई है।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव एवं आरटीआई प्रार्थी मदन शर्मा ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जाधारियों को मुआवजा देना उचित नहीं है। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को मुआवजा देकर सरकार ने अपनी ही नीतियों का उल्लंघन किया है। कहा कि मुआवजा आवंटन करने वाली एजेंसी ने अपने प्रभाव का उपयोग कर अवैध कब्जाधारियों को लाभ पहुंचाया है। समिति ने यह भी मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कहा कि इससे पहले किरतपुर-नेरचौक फोरलेन में भी अवैध ढांचों के लिए 5 करोड़ के मुआवजा आवंटन का खुलासा हुआ है। जिस पर कार्रवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने पर इसे कैग को भेजा है। 19 नवंबर को इसकी सुनवाई है। वहीं अब यह मामला सामने आ गया है।
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शर्मा ने कहा कि दधोल-लदरौर सड़क के विस्तारीकरण पर किरायेदारों को भी मुआवजा आवंटन हुआ है। लेकिन मटौर शिमला फोरलेन के प्रभावितों को इस तरह से मुआवजा नहीं आवंटित हुआ। इससे सरकारी नीतियों में असमानता साफ दिख रही है। संवाद