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दो वर्ष के बाद ऑफलाइन परीक्षा देने पहुंचे तीसरी कक्षा के बच्चे
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश/बिलासपुर(बिलासपुर)। दो वर्ष के बाद जिले के स्कूलों में तीसरी कक्षा के विद्यार्थी ऑफलाइन परीक्षा देने पहुंचे। वीरवार को सरकारी और निजी स्कूलों को मिलाकर 1810 बच्चों ने हिंदी की परीक्षा दी।
बच्चे परीक्षा देकर काफी खुश नजर आए। परीक्षा केंद्रों में विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए मास्क लगाना भी अनिवार्य किया है। बता दें कि जिले के सभी स्कूलों में परीक्षाओं को लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली थी। सुबह बच्चे स्कूल पहुंचे।
इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन करने के बाद बच्चों को परीक्षा देने के लिए बिठाया। बच्चों ने बताया कि दो वर्ष के बाद स्कूल में आकर परीक्षा देकर वे खुश हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण ने बताया कि जिला के सरकारी स्कूलों के 220 और निजी स्कूलों के 1590 बच्चों ने हिंदी विषय की परीक्षा दी।
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ज्यादा अच्छा लगती है हिंदी : शिवानी
शिवानी ने कहा कि घर में पेपर देने का मजा नहीं आता है। स्कूल में पेपर देकर काफी मजा आया। हिंदी विषय बहुत ज्यादा अच्छा लगता है। पहले पेपर की शुरूआत अच्छी हुई।
ऑफलाइन पेपर देने से खुश हूं : मृदुल
मृदुल ने कहा कि उन्हें हिंदी का पेपर आसान लगता है। अध्यापक ने जो भी पढ़ाया था वह पेपर में आया भी था। स्कूल में ऑफलाइन तरीके से पेपर देकर वह काफी खुश हैं।
स्कूल में बैठकर पेपर देने में आया मजा : आयुषी
आयुषी ने कहा कि दो साल के बाद स्कूल पहुंच कर पेपर देने के लिए बैठे। अगर इस बार भी कोरोना होता तो घर में बैठ कर पेपर देना पडना था। स्कूल में बैठकर पेपर देने में मजा आया।
प्यार से पढ़ाते हैं टीचर : अतुल
अतुल ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण पढ़ने का मजा नहीं आता था। पेपर से पहले स्कूल खुल गए थे। हमारे टीचर हमें बड़े ही प्यार से पढ़ाते हैं। इसलिए स्कूल आने का मन करता है।
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ऋषिकेश/बिलासपुर(बिलासपुर)। दो वर्ष के बाद जिले के स्कूलों में तीसरी कक्षा के विद्यार्थी ऑफलाइन परीक्षा देने पहुंचे। वीरवार को सरकारी और निजी स्कूलों को मिलाकर 1810 बच्चों ने हिंदी की परीक्षा दी।
बच्चे परीक्षा देकर काफी खुश नजर आए। परीक्षा केंद्रों में विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए मास्क लगाना भी अनिवार्य किया है। बता दें कि जिले के सभी स्कूलों में परीक्षाओं को लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली थी। सुबह बच्चे स्कूल पहुंचे।
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इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन करने के बाद बच्चों को परीक्षा देने के लिए बिठाया। बच्चों ने बताया कि दो वर्ष के बाद स्कूल में आकर परीक्षा देकर वे खुश हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण ने बताया कि जिला के सरकारी स्कूलों के 220 और निजी स्कूलों के 1590 बच्चों ने हिंदी विषय की परीक्षा दी।
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ज्यादा अच्छा लगती है हिंदी : शिवानी
शिवानी ने कहा कि घर में पेपर देने का मजा नहीं आता है। स्कूल में पेपर देकर काफी मजा आया। हिंदी विषय बहुत ज्यादा अच्छा लगता है। पहले पेपर की शुरूआत अच्छी हुई।
ऑफलाइन पेपर देने से खुश हूं : मृदुल
मृदुल ने कहा कि उन्हें हिंदी का पेपर आसान लगता है। अध्यापक ने जो भी पढ़ाया था वह पेपर में आया भी था। स्कूल में ऑफलाइन तरीके से पेपर देकर वह काफी खुश हैं।
स्कूल में बैठकर पेपर देने में आया मजा : आयुषी
आयुषी ने कहा कि दो साल के बाद स्कूल पहुंच कर पेपर देने के लिए बैठे। अगर इस बार भी कोरोना होता तो घर में बैठ कर पेपर देना पडना था। स्कूल में बैठकर पेपर देने में मजा आया।
प्यार से पढ़ाते हैं टीचर : अतुल
अतुल ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण पढ़ने का मजा नहीं आता था। पेपर से पहले स्कूल खुल गए थे। हमारे टीचर हमें बड़े ही प्यार से पढ़ाते हैं। इसलिए स्कूल आने का मन करता है।