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जिले में लगे हैं 500 से ज्यादा हैंडपंप, आधे से ज्यादा खराब

Sun, 03 Jan 2021 11:38 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2021 11:38 PM IST
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बरठीं (बिलासपुर)। करोड़ों की पेयजल योजनाएं और प्राकृतिक जलस्रोत जब हांफने लगे तो सरकार ने इससे निपटने के लिए हैंडपंपों का प्रचलन शुरू किया था। लेकिन चार पंचायतों बड़गांव, सुन्हाणी, बरठीं और बलोह में लगाए गए हैंडपंप लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। कुछ हैंडपंप तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़े हैं तो कइयों में मटमैला पानी निकल रहा है जो पीने योग्य नहीं है। क्षेत्र के लोगों ने इस समस्या को कई बार भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के समक्ष रखा, लेकिन लोगों को केवल आश्वासन ही मिले। लोगों की समस्या को लेकर न नेता गंभीर हैं और न ही सरकारी महकमा। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत जिले में 500 से ज्यादा हैंडपंप लगे हैं, इनमें से आधे से ज्यादा हैंडपंप खराब पड़े हैं। कइयों में मटमैला पानी आ रहा है। विभागीय लापरवाही और देखरेख के अभाव में सरकार का लाखों रुपये जमीन में जंग खा रहा है।
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लोगों की ओर से बार-बार सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के पास शिकायत करने के बावजूद कोई सुध नहीं ली जा रही है। वहीं कई हैंडपंप ऐसे हैं जिनमें लाल रंग का पानी निकल रहा है। इस कारण ग्रामीण इन हैंडपंपों को प्रयोग में लाने से परहेज करते हैं। कुछ हैंडपंप ऐसे हैं जिनसे पानी निकालने के लिए अच्छी खासी कसरत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि आईपीएच महकमे ने क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बावड़ियों का सर्वेक्षण भी बहुत पहले किया था। लेकिन इनके रखरखाव, सफाई व दवाई डालने के लिए कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई है। यदि पेयजल स्रोतों में दवाई डालकर इनका पानी पीने लायक कर दिया जाता है तो पेयजल समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
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