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50 साल से वाल्मीकि समुदाय के नाम नहीं हुई जमीन
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बिलासपुर। जिले के लोअर निहाल और डियारा सेक्टर में वाल्मीकि समुदाय के 60 परिवार गुजर बसर कर रहे हैं। इनको 50 साल पहले यहां बसाया गया था, लेकिन जमीन अभी तक इनके नाम नहीं हो पाई है। इससे समुदाय के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतने अरसे के बाद भी जमीन नाम न होने से प्रशासन और प्रदेश सरकार इन्हें राजस्व रिकॉर्ड में शामिल नहीं कर पाए हैं।
कांग्रेस के जिला महासचिव संदीप सांख्यान ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में शामिल न होने के चलते समुदाय के लोगों को प्रमाण पत्रों से लेकर कुछ अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। इसका खामियाजा समुदाय के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी नौकरियों की परीक्षा पास करने के बाद जब इनसे प्रमाण-पत्र मांगे जाते हैं तो उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। जबकि इस समुदाय के लोगों का बिलासपुर की उन्नति में योगदान है। इतना ही नहीं समुदाय के लोगों के आशियानों की जमीन उनके नाम न होने से बिजली-पानी के रेगुलर कनेक्शन लेने में भी दिक्कतों का सामना पड़ता है। कुछ तो महज अस्थायी कनेक्शनों के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं।
जमीन को उनके नाम करने के लिए समुदाय का प्रतिनिधिमंडल कुछ साल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिला था। उस समय बिलासपुर के एकमात्र कैबिनेट मंत्री एवं 20 सूत्रीय कार्यक्रम के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर ने भी इनके कब्जों को नियमित करने के लिए आवाज उठाई थी। लोअर निहाल और डियारा सेक्टर में वाल्मीकि समुदाय के लगभग 45 से 60 परिवार रह रहे हैं। अभी तक जमीन को इनके नाम करने की फाइलें दफ्तरों में ही धूल फांक रही हैं। सांख्यान ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मसले पर पुनर्विचार किया जाए। ताकि वाल्मीकि बस्ती के बाशिंदों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।
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कांग्रेस के जिला महासचिव संदीप सांख्यान ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में शामिल न होने के चलते समुदाय के लोगों को प्रमाण पत्रों से लेकर कुछ अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। इसका खामियाजा समुदाय के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी नौकरियों की परीक्षा पास करने के बाद जब इनसे प्रमाण-पत्र मांगे जाते हैं तो उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। जबकि इस समुदाय के लोगों का बिलासपुर की उन्नति में योगदान है। इतना ही नहीं समुदाय के लोगों के आशियानों की जमीन उनके नाम न होने से बिजली-पानी के रेगुलर कनेक्शन लेने में भी दिक्कतों का सामना पड़ता है। कुछ तो महज अस्थायी कनेक्शनों के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं।
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जमीन को उनके नाम करने के लिए समुदाय का प्रतिनिधिमंडल कुछ साल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिला था। उस समय बिलासपुर के एकमात्र कैबिनेट मंत्री एवं 20 सूत्रीय कार्यक्रम के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर ने भी इनके कब्जों को नियमित करने के लिए आवाज उठाई थी। लोअर निहाल और डियारा सेक्टर में वाल्मीकि समुदाय के लगभग 45 से 60 परिवार रह रहे हैं। अभी तक जमीन को इनके नाम करने की फाइलें दफ्तरों में ही धूल फांक रही हैं। सांख्यान ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मसले पर पुनर्विचार किया जाए। ताकि वाल्मीकि बस्ती के बाशिंदों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।
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