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बच्चे स्वयं नशे से दूर रहें, अपने साथियों को भी इससे बचाएं : राजकुमारी

Mon, 22 Dec 2025 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 22 Dec 2025 11:31 PM IST
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Children should stay away from drugs themselves and save their friends from it too: Rajkumari
पीएम श्री जेएनवी कोठीपुरा में आयोजित जागरूकता कार्यशाला में उपस्थित बच्चे व अन्य। स्रोत: स्कूल
विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में दी जानकारी
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पीएम श्री जेएनवी कोठीपुरा में जागरूकता कार्यशाला आयोजित

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय कोठीपुरा में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति को लेकर एक जागरूकता कार्यशाला हुई, जिसका मुख्य विषय यदि समय रहते नशे पर शिकंजा नहीं कसा गया तो इसके दुष्परिणाम बच्चों और समाज के लिए घातक सिद्ध होंगे था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजकुमारी ने शिरकत की। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशा आज के समय में एक विकराल सामाजिक समस्या बन चुका है, जिसकी चपेट में अब स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी आ रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों के मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक विकास पर पड़ रहा है। नशे के कारण बच्चों के संस्कार, अनुशासन और सहनशीलता में लगातार गिरावट आ रही है, जिसका प्रभाव परिवार, समाज और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। हिमाचल जैसे छोटे प्रदेश में नशा मकड़ी के जाल की तरह फैलता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले समय में बच्चों का भविष्य प्रश्नचिह्न बनकर रह जाएगा। जो बच्चे कल समाज के कर्णधार होंगे, वह समाज का हित कैसे कर पाएंगे यह गंभीर सोच का विषय है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वह स्वयं नशे से दूर रहें और अपने साथियों को भी इससे बचने के लिए प्रेरित करें। नशे की लत के चलते कई बच्चे अपनी लत पूरी करने के लिए माता-पिता के गहने, वाहन, जमीन और मकान तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
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नशे से ग्रसित बच्चों की स्थिति कई बार मृत्यु से भी बदतर हो जाती है। उन्होंने प्रधानाचार्य, प्राध्यापकों और शिक्षक वर्ग से आग्रह किया कि यदि कोई बच्चा नशे की गिरफ्त में दिखाई दे, तो उसकी जानकारी साझा कर परामर्श के माध्यम से उसे सही दिशा दी जाए। जन सहयोग, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और शैक्षणिक संस्थानों के संयुक्त प्रयास से ही इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाया जा सकता है। समय-समय पर स्कूलों में नशा विरोधी जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन आवश्यक है। इस अवसर पर विद्यालय के कार्यवाह प्रधानाचार्य, प्राध्यापक, शिक्षक वर्ग, स्टाफ और सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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