{"_id":"6749bb40eaf032f0e805ce46","slug":"chc-harlog-with-the-support-of-a-doctor-bilaspur-news-c-92-1-ssml1003-127361-2024-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: एक चिकित्सक के सहारे सीएचसी हरलोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: एक चिकित्सक के सहारे सीएचसी हरलोग
Fri, 29 Nov 2024 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 29 Nov 2024 11:29 PM IST
विज्ञापन
घुमारवीं के तहत आने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरलोग का भवन । स्रोत : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
10 पंचायतों का जिम्मा संभाले हुए है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
- चिकित्सक के छुट्टी होने या रात को गंभीर स्थिति में आने वाले मरीज को करना पड़ता है रेफर
- चिकित्सकों के दो ही पद हैं स्वीकृत, साल भर से एक ही चिकित्सक दे रहे सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की 10 पंचायतों की जिम्मा संभालने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरलोग एक चिकित्सक के सहारे चल रहा है। इस अस्पताल में दो ही चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन उनमें से भी एक खाली चल रहा है। अब हालात ऐसे हैं कि चिकित्सक के छुट्टी वाले दिन या रात को कोई मरीज आपातकालीन स्थिति में आ जाए तो सीधा रेफर ही करना पड़ता है।
पिछले एक साल से इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक चिकित्सक ही सेवा दे रहा है। जबकि क्षेत्र की करीब 10 पंचायत के 20 हजार लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा इसी स्वास्थ्य केंद्र पर है। लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना तब करना पड़ता है, जब केंद्र में चिकित्सक को अचानक छुट्टी पर जाना पड़े। चिकित्सक के छुट्टी पर चले जाने के बाद क्षेत्र के लोगों को इलाज नहीं मिल पाता है, इस वजह से उन्हें दूर दराज के अस्पतालों में जाकर इलाज करवाना पड़ता है। हालांकि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लैब और एक्सरे मशीन सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को इन सुविधाओं का भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। स्थानीय लोग लंबे समय से एक विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग करते आ रहे हैं ताकि लोगों को यहां पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज करवाने के लिए घुमारवीं और बिलासपुर के अस्पताल में चक्कर काटने पड़ते हैं या फिर उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। अस्पताल में मौजूद एकमात्र चिकित्सक या तो दिन में ही सेवाएं दे पाएगा या फिर रात को। यदि चिकित्सक दिन में अपनी सेवाएं दे रहा है तो रात में आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
अभी हाल ही में अस्पताल में रात के समय एक युवक को बेहोशी की हालात में लाया गया था, लेकिन उसे सीधा रेफर कर दिया गया। इसके बाद युवक को घुमारवीं अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। यदि इस अस्पताल में उस युवक को उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान भी बच सकती थी।
विज्ञापन
कोट्
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरलोग में चिकित्सकों के दो पद हैं, जिनमें से एक पद अभी रिक्त है। एक चिकित्सक अस्पताल में मौजूद है। यदि किसी कारण वश चिकित्सक को छुट्टी पर जाना पड़े तो उसकी जगह प्रति नियुक्ति के तौर पर अन्य स्थान से चिकित्सक भेज दिया जाता है ताकि लोगों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
डॉ. महेश जसवाल, खंड चिकित्सा अधिकारी, घुमारवीं
विज्ञापन
- चिकित्सक के छुट्टी होने या रात को गंभीर स्थिति में आने वाले मरीज को करना पड़ता है रेफर
- चिकित्सकों के दो ही पद हैं स्वीकृत, साल भर से एक ही चिकित्सक दे रहे सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की 10 पंचायतों की जिम्मा संभालने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरलोग एक चिकित्सक के सहारे चल रहा है। इस अस्पताल में दो ही चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन उनमें से भी एक खाली चल रहा है। अब हालात ऐसे हैं कि चिकित्सक के छुट्टी वाले दिन या रात को कोई मरीज आपातकालीन स्थिति में आ जाए तो सीधा रेफर ही करना पड़ता है।
पिछले एक साल से इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक चिकित्सक ही सेवा दे रहा है। जबकि क्षेत्र की करीब 10 पंचायत के 20 हजार लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा इसी स्वास्थ्य केंद्र पर है। लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना तब करना पड़ता है, जब केंद्र में चिकित्सक को अचानक छुट्टी पर जाना पड़े। चिकित्सक के छुट्टी पर चले जाने के बाद क्षेत्र के लोगों को इलाज नहीं मिल पाता है, इस वजह से उन्हें दूर दराज के अस्पतालों में जाकर इलाज करवाना पड़ता है। हालांकि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लैब और एक्सरे मशीन सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को इन सुविधाओं का भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। स्थानीय लोग लंबे समय से एक विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग करते आ रहे हैं ताकि लोगों को यहां पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज करवाने के लिए घुमारवीं और बिलासपुर के अस्पताल में चक्कर काटने पड़ते हैं या फिर उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। अस्पताल में मौजूद एकमात्र चिकित्सक या तो दिन में ही सेवाएं दे पाएगा या फिर रात को। यदि चिकित्सक दिन में अपनी सेवाएं दे रहा है तो रात में आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
अभी हाल ही में अस्पताल में रात के समय एक युवक को बेहोशी की हालात में लाया गया था, लेकिन उसे सीधा रेफर कर दिया गया। इसके बाद युवक को घुमारवीं अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। यदि इस अस्पताल में उस युवक को उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान भी बच सकती थी।
विज्ञापन
कोट्
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरलोग में चिकित्सकों के दो पद हैं, जिनमें से एक पद अभी रिक्त है। एक चिकित्सक अस्पताल में मौजूद है। यदि किसी कारण वश चिकित्सक को छुट्टी पर जाना पड़े तो उसकी जगह प्रति नियुक्ति के तौर पर अन्य स्थान से चिकित्सक भेज दिया जाता है ताकि लोगों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
डॉ. महेश जसवाल, खंड चिकित्सा अधिकारी, घुमारवीं