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जिला में मक्की पर सुंडी कीट का हमला
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शाहतलाई में मक्की के भुट्टे को लगी सुंडी।
- फोटो : BILASPUR
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शाहतलाई (बिलासपुर)। जिले में मक्की की फसल पर सुंडी कीट का हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पौधे खाने के बाद कीट अब बचे मक्की के दानों को भी चटक करने लगे हैं। सुंडी कीट होने से मक्की की पौध को पशुओं को अब चारे के तौर पर भी नहीं दिया जा रहा है।
बिलासपुर जिले में करीब 65 हजार किसान परिवारों की रोजी रोटी का मुख्य साधन मक्की और गेहूं की फसल है। इस वर्ष किसानों ने करीब 32 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई की है। सुंडी कीट के हमले के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इस बार मक्की बेचना तो दूर की बात लेकिन परिवार के पूरे साल के खाने के दाने भी नहीं हो पाएंगे। किसान प्रकाश चंद, वीरी सिंह वर्मा, सोमदत शर्मा, ज्ञान चंद शर्मा, प्रेम चंद शर्मा, राजकुमार शर्मा, किशोरी लाल शर्मा, कुलदीप कुमार, राकेश शर्मा, मदन लाल, सुशील शर्मा, विजय कुमार शर्मा, ठाकुर ओंकार सिंह, संजय भारद्वाज, बर्फी राम ने बताया कि उनका व्यवसाय ही किसानी है।
इस बार मक्की की पौध को जो सुंडी लगी, उससे छुटकारा नहीं मिल पाया है। चार से पांच बार दवाईयों का छिड़काव होने के बावजूद सुंडी के खत्म होने का नाम नहीं है।
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किसानों का कहना है यह पता भी नहीं चल पाया कि सुंडी आ कहां से रही है। कृषि विशेषज्ञों के सभी सुझाव फेल हो गए हैं। किसानों का कहना है कि मक्की की पौध पर दाना आ गया है तो अब सुंडी उस दाने को चट करने में लग पड़ी है। किसानों का कहना है कि मक्की का भुटटा देखने को साफ लगता है। लेकिन जब खोला जाता है तो उसे सुंडी ने आधे से अधिक भाग को दागी कर दिया है। किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें आर्थिक मदद देकर नुकसान की भरपाई की जाए। साथ ही फसल बीमा राशि का भुगतान भी दिलाया जाए।
उधर कृषि विभाग के विषयवाद् विशेषज्ञ अशोक कुमार ने कहा कि सुंडी कीटों की जनसंख्या बढ़ गई है। एक सुंडी हजार अंडे देती है। विभाग पंचायत स्तर पर सर्वे करा कर उपनिदेशक और सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजेगा।
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बिलासपुर जिले में करीब 65 हजार किसान परिवारों की रोजी रोटी का मुख्य साधन मक्की और गेहूं की फसल है। इस वर्ष किसानों ने करीब 32 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई की है। सुंडी कीट के हमले के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। इस बार मक्की बेचना तो दूर की बात लेकिन परिवार के पूरे साल के खाने के दाने भी नहीं हो पाएंगे। किसान प्रकाश चंद, वीरी सिंह वर्मा, सोमदत शर्मा, ज्ञान चंद शर्मा, प्रेम चंद शर्मा, राजकुमार शर्मा, किशोरी लाल शर्मा, कुलदीप कुमार, राकेश शर्मा, मदन लाल, सुशील शर्मा, विजय कुमार शर्मा, ठाकुर ओंकार सिंह, संजय भारद्वाज, बर्फी राम ने बताया कि उनका व्यवसाय ही किसानी है।
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इस बार मक्की की पौध को जो सुंडी लगी, उससे छुटकारा नहीं मिल पाया है। चार से पांच बार दवाईयों का छिड़काव होने के बावजूद सुंडी के खत्म होने का नाम नहीं है।
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किसानों का कहना है यह पता भी नहीं चल पाया कि सुंडी आ कहां से रही है। कृषि विशेषज्ञों के सभी सुझाव फेल हो गए हैं। किसानों का कहना है कि मक्की की पौध पर दाना आ गया है तो अब सुंडी उस दाने को चट करने में लग पड़ी है। किसानों का कहना है कि मक्की का भुटटा देखने को साफ लगता है। लेकिन जब खोला जाता है तो उसे सुंडी ने आधे से अधिक भाग को दागी कर दिया है। किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें आर्थिक मदद देकर नुकसान की भरपाई की जाए। साथ ही फसल बीमा राशि का भुगतान भी दिलाया जाए।
उधर कृषि विभाग के विषयवाद् विशेषज्ञ अशोक कुमार ने कहा कि सुंडी कीटों की जनसंख्या बढ़ गई है। एक सुंडी हजार अंडे देती है। विभाग पंचायत स्तर पर सर्वे करा कर उपनिदेशक और सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजेगा।