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Bilaspur News: कोहरे और सूखे के दिनों में फलदार पौधों की देखभाल और सुरक्षा जरूरी

Fri, 06 Dec 2024 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 06 Dec 2024 11:01 PM IST
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Care and protection of fruit plants is necessary during fog and drought.
-तापमान गिरने के साथ पौधों की कोशिकाओं में होता है पानी का जमाव
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-विशेषज्ञों ने बागवानों को बताए पौधों के संरक्षण के उपाय

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सर्दियों के मौसम में खासकर कोहरे और सूखे के दिनों में फलदार पौधों की देखभाल और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कोहरे का प्रभाव न केवल छोटे पौधों पर, बल्कि बड़े फलदार पौधों पर भी गहरा असर डालता है, जिसके कारण बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस नुकसान को रोकने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण उपाय सुझाए हैं।
कोहरे के कारण सर्दियों में तापमान गिरने के साथ पौधों की कोशिकाओं में पानी का जमाव होने लगता है, जिससे पौधों की कोशिकाएं फट जाती हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है। इसके परिणामस्वरूप फूल झड़ने और फल खराब होने लगते हैं। मुख्य रूप से आम, लीची, पपीता, अमरूद और नींबू जैसे फलदार पौधे कोहरे से प्रभावित होते हैं। आम के पौधे अत्यधिक कोहरे के कारण सूख कर मर सकते हैं, जबकि अन्य फलदार पौधों में वृद्धि कम हो जाती है। पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। प्रदेश में पिछले दो महीनों से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जिससे कोहरे के प्रभाव में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में, बागवानों को सलाह दी गई है कि वे अपने फलदार पौधों को कोहरे और सूखे से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। कोहरे से प्रभावित क्षेत्रों में बागवानों को ऐसे पौधों का चयन करना चाहिए जिनमें कोहरे के प्रति प्रतिरोधक क्षमता हो। छोटे फलदार पौधों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
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इन्हें सरकंडा घास, सूखी मक्की के डंठल या टाट की बोरी से ढक सकते हैं, साथ ही दक्षिण-पूर्व दिशा को खुला छोड़ें ताकि धूप और हवा मिल सके। कोहरे की संभावना में पौधों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए और साथ ही पानी का छिड़काव करें ताकि बगीचे का तापमान 1-2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सके। शाम के समय सूखे अवशिष्ट, घास और सूखे पत्तों को जलाकर बगीचे का तापमान बढ़ाया जा सकता है।
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आम की नर्सरी को कोहरे के प्रभाव से बचाने के लिए उन्हें नाइलोन की 50 फीसदी छायादार जाली से ढक देना चाहिए। अनुमोदित मात्रा में पोटाश खाद देने से पौधों की कोहरा सहने की क्षमता में वृद्धि होती है। बड़े फलदार पौधों के तनों में वहर्डो मिक्सचर (कॉपर सल्फेट और अनबुझा चूना) का मिश्रण लगाना चाहिए, जो तनों को कोहरे से बचाता है। जिले में प्रदेश शिवा परियोजना के तहत विभिन्न फलों के जो क्लस्टर लगाए गए हैं, उन पौधों को भी कोहरे और सूखे के प्रभाव से बचाने के लिए उपरोक्त उपायों का पालन करना चाहिए। अच्छे बागवानी प्रबंधन से ही बागवान कोहरे से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं, जिससे उन्हें बेहतर पैदावार मिल सकती है।

कोट
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. रमेश शर्मा ने कहा कि कोहरे के प्रभाव से बचने के लिए बागवानों को उचित सावधानियां बरतनी चाहिए। कोहरे से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने के लिए हमारे पास पर्याप्त उपाय हैं, जिन्हें अगर सही तरीके से लागू किया जाए तो बागवानों को नुकसान कम होगा और उत्पादन में वृद्धि होगी।
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