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Bilaspur News: बसें श्रावण अष्टमी मेलों में, यात्री हो रहे परेशान
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मेले के चलते स्वारघाट जाने वाली बसों के रूट बदले, लोग परेशान
- कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और विद्यार्थी को करने पड़ रहीं टैक्सियां
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट (बिलासपुर)। स्वारघाट के लिए चल रहीं बसों को एचआरटीसी ने श्री नयना देवी जी में चल श्रावण अष्टमी मेलों में लगा दिया है। इस कारण स्वारघाट में रोजाना स्कूल, कॉलेज जाने वाले बच्चों, सरकारी कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी समय पर पहुंचने के लिए टैक्सियां किराये पर करनी पड़ रही हैं। हालात यह हैं कि आईटीआई स्वारघाट तक आने के लिए प्रशिक्षुओं को फोरलेन की कैंचीमोड़ टनल से स्वारघाट तक का आठ किलोमीटर का पैदल सफर तक करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार एचआरटीसी के बिलासपुर डिपो की ओर से कई बसों के रूट बदलकर श्री नयनादेवी जी में चल रहे श्रावण अष्टमी मेले में भेजा जा रहा है। इसी व्यवस्था के कारण पिछले तीन दिनों से बिलासपुर से स्वारघाट तक और कैंचीमोड़ से स्वारघाट तक आने वाले लोगों और स्वारघाट से नयना देवी तक रोजाना आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि फोरलेन बन जाने के बाद से अधिकतर बस रूट एचआरटीसी स्वारघाट से बदल दिए हैं। अब एक या दो बस रूट ही स्वारघाट की ओर से चलाए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें भी श्री नयना देवी जी के मेलों में सवारी ढोने के लिए भेजा जा रहा है। स्वारघाट, बनेर, कैंचीमोड़ टनल, गंभर पुल, जामली, छड़ोल, कल्लर और श्री नयना देवी जी तक आने-जाने वाले लोग परिवहन महकमे की इस कुव्यवस्था के चलते बेहद नाराज हैं। स्कूल, कॉलेज के छात्र-छात्राओं, आईटीआई के प्रशिक्षुओं और कर्मचारियों में भी रोष व्याप्त है। मौजूदा समय में बिलासपुर से श्री नयना देवी वाया स्वारघाट एकमात्र बस रूट सुबह के समय आ रहा है। यही बस शाम के समय श्री नयना देवी से वापस बिलासपुर को वापस आ रही है। दोपहर 2:30 बजे बिलासपुर-नंगल बस रूट वाया स्वारघाट होकर चलता था, उसे भी तीन दिनों से बंद कर दिया गया है। बिलासपुर बस अड्डे से सुबह 8 बजे के बाद स्वारघाट की तरफ आने वाले लोगों के लिए 10 बजे नाहन-टीहरा बस है। इसके बाद शाम 5:00 बजे आखिरी बस बिलासपुर से भाखड़ा आती है। लोगों ने एचआरटीसी बिलासपुर प्रबंधन से बदले गए बस रूटों को तुरंत शुरू करने की मांग की है।
एचआरटीसी बिलासपुर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक विवेक लखनपाल ने बताया कि श्री नयनादेवी जी मेलों के चलते रूट बदले गए हैं। मेलों के बाद फिर से पुराने रूट पर बसों को चलाया जाएगा।
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- कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और विद्यार्थी को करने पड़ रहीं टैक्सियां
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट (बिलासपुर)। स्वारघाट के लिए चल रहीं बसों को एचआरटीसी ने श्री नयना देवी जी में चल श्रावण अष्टमी मेलों में लगा दिया है। इस कारण स्वारघाट में रोजाना स्कूल, कॉलेज जाने वाले बच्चों, सरकारी कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी समय पर पहुंचने के लिए टैक्सियां किराये पर करनी पड़ रही हैं। हालात यह हैं कि आईटीआई स्वारघाट तक आने के लिए प्रशिक्षुओं को फोरलेन की कैंचीमोड़ टनल से स्वारघाट तक का आठ किलोमीटर का पैदल सफर तक करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार एचआरटीसी के बिलासपुर डिपो की ओर से कई बसों के रूट बदलकर श्री नयनादेवी जी में चल रहे श्रावण अष्टमी मेले में भेजा जा रहा है। इसी व्यवस्था के कारण पिछले तीन दिनों से बिलासपुर से स्वारघाट तक और कैंचीमोड़ से स्वारघाट तक आने वाले लोगों और स्वारघाट से नयना देवी तक रोजाना आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि फोरलेन बन जाने के बाद से अधिकतर बस रूट एचआरटीसी स्वारघाट से बदल दिए हैं। अब एक या दो बस रूट ही स्वारघाट की ओर से चलाए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें भी श्री नयना देवी जी के मेलों में सवारी ढोने के लिए भेजा जा रहा है। स्वारघाट, बनेर, कैंचीमोड़ टनल, गंभर पुल, जामली, छड़ोल, कल्लर और श्री नयना देवी जी तक आने-जाने वाले लोग परिवहन महकमे की इस कुव्यवस्था के चलते बेहद नाराज हैं। स्कूल, कॉलेज के छात्र-छात्राओं, आईटीआई के प्रशिक्षुओं और कर्मचारियों में भी रोष व्याप्त है। मौजूदा समय में बिलासपुर से श्री नयना देवी वाया स्वारघाट एकमात्र बस रूट सुबह के समय आ रहा है। यही बस शाम के समय श्री नयना देवी से वापस बिलासपुर को वापस आ रही है। दोपहर 2:30 बजे बिलासपुर-नंगल बस रूट वाया स्वारघाट होकर चलता था, उसे भी तीन दिनों से बंद कर दिया गया है। बिलासपुर बस अड्डे से सुबह 8 बजे के बाद स्वारघाट की तरफ आने वाले लोगों के लिए 10 बजे नाहन-टीहरा बस है। इसके बाद शाम 5:00 बजे आखिरी बस बिलासपुर से भाखड़ा आती है। लोगों ने एचआरटीसी बिलासपुर प्रबंधन से बदले गए बस रूटों को तुरंत शुरू करने की मांग की है।
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एचआरटीसी बिलासपुर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक विवेक लखनपाल ने बताया कि श्री नयनादेवी जी मेलों के चलते रूट बदले गए हैं। मेलों के बाद फिर से पुराने रूट पर बसों को चलाया जाएगा।
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