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बिलासपुर के मेकेनिकल इंजीनियर ने 20 बीघा में तैयार किया चाय का बगीचा
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बिलासपुर जिला के बेकल गांव में लहलारता हुआ चाय का बगीचा।
- फोटो : BILASPUR
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घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल के पटेर पंचायत के बेकल गांव निवासी मेकेनिकल इंजीनियर जतिन ठाकुर ने 20 बीघा जमीन में चाय का बगीचा तैयार कर मिसाल पेश की है। उन्होंने इस जमीन पर करीब दस हजार पौधे रोपे हैं। तीन साल पहले लगाए गए इन पौधों से सितंबर माह में पहली बार चायपत्ति का तुड़ान किया जाएगा।
इसके बाद सितंबर महीने में यह चाय बाजार में आएगी। जतिन की इस नई सोच ने जिले के अन्य किसानों को भी नई दिशा दिखाई है। दो बार पौधों की कटिंग कर दी गई है। बरसात के मौसम में अंतिम कटिंग करने के बाद पत्तियों को तोड़कर चायपत्ति तैयार की जाएगी। जतिन ठाकुर ने बताया कि चाय का बगीचा तैयार हो चुका है। बरसात के दिनों में जरूरत के अनुसार एक बार फिर पौधों की कटिंग की जाएगी। सितंबर महीने में पौधों से पत्तियों को निकालकर चाय को बाजार में उतारा जाएगा।
बगीचे में दस महीने होगी पैदावार, गुणवत्ता भी होगी बेहतर
टी बोर्ड ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने कई बार बगीचे का निरीक्षण किया है। इस दौरान अधिकारियों की ओर से जरूरी सुझाव भी दिए गए हैं। इससे पौधे तीव्र गति से वृद्धि करें और उनकी देखभाल भी अच्छे तरीके से हो। टी बोर्ड ऑफ इंडिया के अधिकारियों के अनुसार इस बगीचे में जो पौधे तैयार हो रहे हैं, उनकी पैदावार पालमपुर और ठंडे इलाकों से अधिक होगी। पालमपुर के चाय के बगीचों में फसल की आठ महीने पैदावार होती है। जतिन के बगीचे में यह पैदावार दस महीने होगी और गुणवत्ता भी अच्छी होगी।
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तैयार होगी चार किस्म की चाय
जिले के बेकल में लगाए चाय के बगीचे में चार किस्म की चाय तैयार होगी। बगीचे में उच्च गुणवत्ता के पौधे लगाए गए हैं। इनसे ग्रीन टी, व्हाइट टी, ब्लैक टी और ओलोंग टी निकाली जाएगी। बिलासपुर के शुष्क और अधिक गर्मी वाले वातावरण में तैयार की गई चाय अलग पहचान बनाएगी।
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इसके बाद सितंबर महीने में यह चाय बाजार में आएगी। जतिन की इस नई सोच ने जिले के अन्य किसानों को भी नई दिशा दिखाई है। दो बार पौधों की कटिंग कर दी गई है। बरसात के मौसम में अंतिम कटिंग करने के बाद पत्तियों को तोड़कर चायपत्ति तैयार की जाएगी। जतिन ठाकुर ने बताया कि चाय का बगीचा तैयार हो चुका है। बरसात के दिनों में जरूरत के अनुसार एक बार फिर पौधों की कटिंग की जाएगी। सितंबर महीने में पौधों से पत्तियों को निकालकर चाय को बाजार में उतारा जाएगा।
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बगीचे में दस महीने होगी पैदावार, गुणवत्ता भी होगी बेहतर
टी बोर्ड ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने कई बार बगीचे का निरीक्षण किया है। इस दौरान अधिकारियों की ओर से जरूरी सुझाव भी दिए गए हैं। इससे पौधे तीव्र गति से वृद्धि करें और उनकी देखभाल भी अच्छे तरीके से हो। टी बोर्ड ऑफ इंडिया के अधिकारियों के अनुसार इस बगीचे में जो पौधे तैयार हो रहे हैं, उनकी पैदावार पालमपुर और ठंडे इलाकों से अधिक होगी। पालमपुर के चाय के बगीचों में फसल की आठ महीने पैदावार होती है। जतिन के बगीचे में यह पैदावार दस महीने होगी और गुणवत्ता भी अच्छी होगी।
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तैयार होगी चार किस्म की चाय
जिले के बेकल में लगाए चाय के बगीचे में चार किस्म की चाय तैयार होगी। बगीचे में उच्च गुणवत्ता के पौधे लगाए गए हैं। इनसे ग्रीन टी, व्हाइट टी, ब्लैक टी और ओलोंग टी निकाली जाएगी। बिलासपुर के शुष्क और अधिक गर्मी वाले वातावरण में तैयार की गई चाय अलग पहचान बनाएगी।