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Bilaspur News: बच्चों को सुधारने से पहले खुद सुधरे मां-बाप
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- आज होगा राम कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। शिव शरण श्री राम लंगर समिति घुमारवीं की ओर से आयोजित राम कथा के आठवें दिन आचार्य निखिल ने बताया कि अगर मां-बाप को अपने बच्चे सुधारने हैं तो पहले उन्हें खुद सुधारना होगा। इसके लिए उन्हें राम कथा सुननी होगी। राम के जीवन चरित्र को अपने चरित्र में ढालना होगा।
तब कही जाकर हमारे घरों में राम और भरत जैसी संतान उत्पन्न होगी। आचार्य ने राम कथा में प्रभु की ऐसी लीलाओं का वर्णन किया, जिनको सुनकर कलयुग का मानव सहजता से ईश्वर को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने राम, रावण और हनुमान के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने भीतर के रावण को मारना चाहिए। समाज के हर व्यक्ति को प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। हनुमान चालीसा के पाठ करने से सभी संकट समाप्त हो जाते हैं। शबरी के प्रसंग में महाराज ने कहा कि अगर वंदना करनी है तो ईश्वर की वंदना करो। अपने अंदर दास का भाव रखो। मित्र बनाना है तो ईश्वर को मित्र बनाओ। उन्होंने कहा कि संकट पर राम भगवान पर भी आया था। मानव जीवन हमेशा संकट भरा है। इसलिए हर भक्त को उठते-बैठते कार्य करते समय भी सुख से राम राम का उच्चारण करते रहना चाहिए। यही सबसे बड़ा उपाय है। राम कथा का समापन शुक्रवार को होगा। राम कथा के आयोजकों में पंडित नरेश भारद्वाज, राम राणा, एडवोकेट संयोग कश्यप, कुलभूषण शर्मा, अरविंद महाजन, हरि राम शर्मा, मुकेश गर्ग, रंचित शर्मा, विवेक कुमार, लेख राम शर्मा और अन्य शामिल है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। शिव शरण श्री राम लंगर समिति घुमारवीं की ओर से आयोजित राम कथा के आठवें दिन आचार्य निखिल ने बताया कि अगर मां-बाप को अपने बच्चे सुधारने हैं तो पहले उन्हें खुद सुधारना होगा। इसके लिए उन्हें राम कथा सुननी होगी। राम के जीवन चरित्र को अपने चरित्र में ढालना होगा।
तब कही जाकर हमारे घरों में राम और भरत जैसी संतान उत्पन्न होगी। आचार्य ने राम कथा में प्रभु की ऐसी लीलाओं का वर्णन किया, जिनको सुनकर कलयुग का मानव सहजता से ईश्वर को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने राम, रावण और हनुमान के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने भीतर के रावण को मारना चाहिए। समाज के हर व्यक्ति को प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। हनुमान चालीसा के पाठ करने से सभी संकट समाप्त हो जाते हैं। शबरी के प्रसंग में महाराज ने कहा कि अगर वंदना करनी है तो ईश्वर की वंदना करो। अपने अंदर दास का भाव रखो। मित्र बनाना है तो ईश्वर को मित्र बनाओ। उन्होंने कहा कि संकट पर राम भगवान पर भी आया था। मानव जीवन हमेशा संकट भरा है। इसलिए हर भक्त को उठते-बैठते कार्य करते समय भी सुख से राम राम का उच्चारण करते रहना चाहिए। यही सबसे बड़ा उपाय है। राम कथा का समापन शुक्रवार को होगा। राम कथा के आयोजकों में पंडित नरेश भारद्वाज, राम राणा, एडवोकेट संयोग कश्यप, कुलभूषण शर्मा, अरविंद महाजन, हरि राम शर्मा, मुकेश गर्ग, रंचित शर्मा, विवेक कुमार, लेख राम शर्मा और अन्य शामिल है।
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