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Bilaspur News: चरस मामले में आरोपी की जमानत खारिज
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अदालत ने कहा- बरामदगी व्यावसायिक मात्रा से अधिक, धारा 37 की शर्तें पूरी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। 1.09 किलो चरस के मामले में आरोपी को अदालत से राहत नहीं मिली। स्पेशल जज-2 बिलासपुर नविश भारद्वाज की अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी के खिलाफ थाना सदर बिलासपुर में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 और 29 के तहत मामला दर्ज है।
पुलिस के अनुसार दो जुलाई 2026 को पडगल फोरलेन क्षेत्र में स्कूटी सवार दो युवकों को जांच के लिए रोका गया था। तलाशी में उनके पास से 1090.68 ग्राम चरस बरामद होने का दावा किया गया। सह आरोपियों के कथित खुलासे के आधार पर आरोपी की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार किया गया। उसके घर से भी 102.90 ग्राम चरस बरामद होने की बात पुलिस ने कही है, जिसकी फोरेंसिक जांच में चरस होने की पुष्टि हुई।
आरोपी की ओर से कहा गया कि मुख्य बरामदगी उसके कब्जे से नहीं हुई और उसके खिलाफ सह आरोपियों के बयान ही आधार हैं। अदालत ने कहा कि मुख्य बरामदगी एक किलो की व्यावसायिक मात्रा से अधिक है। धारा 29 के तहत केवल सीधे कब्जे से बरामदगी न होना जमानत का आधार नहीं बन सकता। परिसर से हुई बरामदगी भी प्रथमदृष्टया प्रासंगिक है। अदालत ने माना कि धारा 37 की शर्तें पूरी नहीं होतीं। इसके चलते जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। 1.09 किलो चरस के मामले में आरोपी को अदालत से राहत नहीं मिली। स्पेशल जज-2 बिलासपुर नविश भारद्वाज की अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी के खिलाफ थाना सदर बिलासपुर में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 और 29 के तहत मामला दर्ज है।
पुलिस के अनुसार दो जुलाई 2026 को पडगल फोरलेन क्षेत्र में स्कूटी सवार दो युवकों को जांच के लिए रोका गया था। तलाशी में उनके पास से 1090.68 ग्राम चरस बरामद होने का दावा किया गया। सह आरोपियों के कथित खुलासे के आधार पर आरोपी की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार किया गया। उसके घर से भी 102.90 ग्राम चरस बरामद होने की बात पुलिस ने कही है, जिसकी फोरेंसिक जांच में चरस होने की पुष्टि हुई।
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आरोपी की ओर से कहा गया कि मुख्य बरामदगी उसके कब्जे से नहीं हुई और उसके खिलाफ सह आरोपियों के बयान ही आधार हैं। अदालत ने कहा कि मुख्य बरामदगी एक किलो की व्यावसायिक मात्रा से अधिक है। धारा 29 के तहत केवल सीधे कब्जे से बरामदगी न होना जमानत का आधार नहीं बन सकता। परिसर से हुई बरामदगी भी प्रथमदृष्टया प्रासंगिक है। अदालत ने माना कि धारा 37 की शर्तें पूरी नहीं होतीं। इसके चलते जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
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