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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर में लगेगी अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ब्लड कंपोनेंट एक्सट्रैक्टर मशीन
Thu, 12 Mar 2026 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 12 Mar 2026 11:31 PM IST
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मशीन के लगने से रक्त के घटकों को अलग करना होगा आसान
एक यूनिट रक्त से कई मरीजों को मिल सकेगा उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में जल्द ही अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ब्लड कंपोनेंट एक्सट्रैक्टर मशीन स्थापित की जाएगी। इस मशीन के लगने से अस्पताल की ब्लड बैंक सेवाएं और मजबूत होंगी, मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। नई मशीन की मदद से रक्तदान से प्राप्त एक यूनिट रक्त को विभिन्न घटकों प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और लाल रक्त कोशिकाओं में अलग किया जा सकेगा। इससे एक ही यूनिट रक्त का उपयोग अलग-अलग मरीजों के उपचार में किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से गंभीर मरीजों, ऑपरेशन के मामलों, दुर्घटना पीड़ितों और प्लेटलेट्स की जरूरत वाले मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना आसान होगा। मशीन पूरी तरह स्वचालित तकनीक से काम करेगी, जिससे रक्त के घटकों को अलग करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक तेज और सटीक हो जाएगी। इससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को आवश्यक रक्त घटक जल्दी उपलब्ध हो सकेंगे। डेंगू, कैंसर, बड़ी सर्जरी और गंभीर बीमारियों के मामलों में प्लेटलेट्स और प्लाज्मा की आवश्यकता अधिक होती है। इस मशीन के लगने से ऐसे मरीजों को अस्पताल में ही आवश्यक घटक तुरंत उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा, जिससे इलाज में देरी नहीं होगी। अब तक कई बार विशेष रक्त घटकों की आवश्यकता होने पर मरीजों को अन्य बड़े शहरों या अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। नई मशीन स्थापित होने के बाद एम्स बिलासपुर में ही प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और अन्य रक्त घटकों को तैयार कर मरीजों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी। मशीन के सुचारू संचालन के लिए दो साल की वारंटी और उसके बाद आठ वर्ष तक व्यापक रखरखाव की व्यवस्था की गई है। यानी कुल दस वर्षों तक मशीन के रखरखाव की जिम्मेदारी विक्रेता कंपनी की होगी। साथ ही मशीन की स्थापना के बाद अस्पताल के ऑपरेटरों और तकनीकी स्टाफ को इसे चलाने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि मशीन का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। तकनीकी खराबी की स्थिति में कंपनी को पांच दिनों के भीतर मशीन को ठीक करना अनिवार्य होगा।
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एक यूनिट रक्त से कई मरीजों को मिल सकेगा उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में जल्द ही अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ब्लड कंपोनेंट एक्सट्रैक्टर मशीन स्थापित की जाएगी। इस मशीन के लगने से अस्पताल की ब्लड बैंक सेवाएं और मजबूत होंगी, मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। नई मशीन की मदद से रक्तदान से प्राप्त एक यूनिट रक्त को विभिन्न घटकों प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और लाल रक्त कोशिकाओं में अलग किया जा सकेगा। इससे एक ही यूनिट रक्त का उपयोग अलग-अलग मरीजों के उपचार में किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से गंभीर मरीजों, ऑपरेशन के मामलों, दुर्घटना पीड़ितों और प्लेटलेट्स की जरूरत वाले मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना आसान होगा। मशीन पूरी तरह स्वचालित तकनीक से काम करेगी, जिससे रक्त के घटकों को अलग करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक तेज और सटीक हो जाएगी। इससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को आवश्यक रक्त घटक जल्दी उपलब्ध हो सकेंगे। डेंगू, कैंसर, बड़ी सर्जरी और गंभीर बीमारियों के मामलों में प्लेटलेट्स और प्लाज्मा की आवश्यकता अधिक होती है। इस मशीन के लगने से ऐसे मरीजों को अस्पताल में ही आवश्यक घटक तुरंत उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा, जिससे इलाज में देरी नहीं होगी। अब तक कई बार विशेष रक्त घटकों की आवश्यकता होने पर मरीजों को अन्य बड़े शहरों या अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। नई मशीन स्थापित होने के बाद एम्स बिलासपुर में ही प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और अन्य रक्त घटकों को तैयार कर मरीजों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी। मशीन के सुचारू संचालन के लिए दो साल की वारंटी और उसके बाद आठ वर्ष तक व्यापक रखरखाव की व्यवस्था की गई है। यानी कुल दस वर्षों तक मशीन के रखरखाव की जिम्मेदारी विक्रेता कंपनी की होगी। साथ ही मशीन की स्थापना के बाद अस्पताल के ऑपरेटरों और तकनीकी स्टाफ को इसे चलाने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि मशीन का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। तकनीकी खराबी की स्थिति में कंपनी को पांच दिनों के भीतर मशीन को ठीक करना अनिवार्य होगा।
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