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Bilaspur News: दो वन खंडों में 2,460 खैर के पेड़ों को काटने की मिली मंजूरी
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- 20 साल बाद होगा कटान, सरकार को होगी करोड़ों की आमदनी
- मार्च से पहले पूरा होगा कटान, विभाग ने की मार्किंग
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता(बिलासपुर)। झंडूता वन परिक्षेत्र के दो वन खंडों में 2,460 खैर के पेड़ों को काटने की मंजूरी मिली है। इन खंडों में करीब 20 साल बाद कटान होगा। इससे सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी होगी। वन विभाग ने मार्किंग का काम पूरा कर दिया है। मार्च से पहले कटान भी पूरा कर लिया जाएगा।
समोह वन खंड के तहत जंगल नाला का सिद्ध में 1,601, जंगल टिकरी में 193, वन खंड गोचर घंढीर के जंगल कल्लर में 666 खैर के पेड़ों की मार्किंग की गई है। अरण्यपाल कार्यालय की ओर से इसकी सूची प्रदेश सरकार को भी भेज दी है। अब सरकार के आदेश पर नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें कि खैर के पेड़ से कत्था मिलता है। कत्थे से औषधियां बनती हैं। इसकी लकड़ी से रेशम के कपड़ों की रंगाई भी होती है। ये चमड़ा उद्योग में भी काम आता है। पान और पान मसाला में भी कत्थे का प्रयोग होता है। इसके विविध उपयोग होने से एक पेड़ की कीमत हजारों रुपये में होती है। इन्हें काटने की अनुमति मिलने पर सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी होगी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को सरकारी वन भूमि पर 10 वन मंडलों में खैर के पेड़ काटने की अनुमति दी है। इस फैसले से प्रदेश सरकार को बड़ी राहत मिली है। फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के प्रावधानों के तहत वन भूमि से किसी भी तरह के पेड़ काटने से पहले विभिन्न स्तरों पर अनुमति लेनी होती है। उधर, मुख्य अरण्यपाल बिलासपुर अनिल कुमार ने बताया कि झंडूता वन परिक्षेत्र के दो वन खंडों में खैर पेड़ों के कटान की मंजूरी मिली है। 2,460 पेड़ों की निशानदेही कर सूची सरकार को भेज दी गई है।
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- मार्च से पहले पूरा होगा कटान, विभाग ने की मार्किंग
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता(बिलासपुर)। झंडूता वन परिक्षेत्र के दो वन खंडों में 2,460 खैर के पेड़ों को काटने की मंजूरी मिली है। इन खंडों में करीब 20 साल बाद कटान होगा। इससे सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी होगी। वन विभाग ने मार्किंग का काम पूरा कर दिया है। मार्च से पहले कटान भी पूरा कर लिया जाएगा।
समोह वन खंड के तहत जंगल नाला का सिद्ध में 1,601, जंगल टिकरी में 193, वन खंड गोचर घंढीर के जंगल कल्लर में 666 खैर के पेड़ों की मार्किंग की गई है। अरण्यपाल कार्यालय की ओर से इसकी सूची प्रदेश सरकार को भी भेज दी है। अब सरकार के आदेश पर नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें कि खैर के पेड़ से कत्था मिलता है। कत्थे से औषधियां बनती हैं। इसकी लकड़ी से रेशम के कपड़ों की रंगाई भी होती है। ये चमड़ा उद्योग में भी काम आता है। पान और पान मसाला में भी कत्थे का प्रयोग होता है। इसके विविध उपयोग होने से एक पेड़ की कीमत हजारों रुपये में होती है। इन्हें काटने की अनुमति मिलने पर सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी होगी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को सरकारी वन भूमि पर 10 वन मंडलों में खैर के पेड़ काटने की अनुमति दी है। इस फैसले से प्रदेश सरकार को बड़ी राहत मिली है। फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के प्रावधानों के तहत वन भूमि से किसी भी तरह के पेड़ काटने से पहले विभिन्न स्तरों पर अनुमति लेनी होती है। उधर, मुख्य अरण्यपाल बिलासपुर अनिल कुमार ने बताया कि झंडूता वन परिक्षेत्र के दो वन खंडों में खैर पेड़ों के कटान की मंजूरी मिली है। 2,460 पेड़ों की निशानदेही कर सूची सरकार को भेज दी गई है।
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