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Bilaspur News: छड़ोल पंचायत में एम्स ने नहीं फेंका था कूड़ा
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-मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एम्स प्रबंधन ने की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत छड़ोल के पास कूड़ा फेंकने के मामले में जांच के बाद यह पाया गया है कि कूड़ा एम्स संस्थान की ओर से नहीं फेंका गया है। मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एम्स प्रबंधन के अधिकारियों के साथ इसकी जांच की।
एम्स प्रबंधन की ओर से जारी बयान में बताया गया कि मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी 24 मई को एम्स बिलासपुर में निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने संस्थान में गीले और सूखे कचरे के निपटाने की विधि, प्रक्रिया और बायो मेडिकल वेस्ट के ट्रीटमेंट की संपूर्ण प्रक्रिया देखी। जांच के दौरान पाया गया कि संस्थान अपने सभी प्रकार के कचरे का निपटान वैज्ञानिक विधि से संस्थान के अंदर ही लगे ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य विधियों द्वारा करता है। संस्थान में निरीक्षण के बाद एम्स प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौके का मुआयना करने छड़ोल पंचायत गए। पंचायत के लोगों के सामने उस गीले कचरे के लिफाफे को खोलकर देखा तो पाया गया कि यह बायो मेडिकल वेस्ट नहीं है। यह घरेलू कचरा और बेकार खाना (जूठन) है। पंचायत प्रतिनिधियों को एम्स प्रबंधन ने आश्वस्त किया कि एम्स बिलासपुर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता और जिम्मेदारियों का बेहतरीन तरीके से निर्वहन करने के लिए संकल्पित है और ऐसा कोई भी कार्य नहीं करता है, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़े। प्रबंधन द्वारा लोगों को मौके पर कहा गया कि संस्थान में सभी तरह के गीले और सूखे कचरे बायो मेडिकल वेस्ट, फूड वेस्ट आदि को वैज्ञानिक विधियों द्वारा नष्ट किया जाता है। प्रबंधन ने कहा कि इसके बाद संस्थान ने सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए अपने संसाधनों से इस कचरे को तत्काल उठाकर निपटारे के लिए भेज दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत छड़ोल के पास कूड़ा फेंकने के मामले में जांच के बाद यह पाया गया है कि कूड़ा एम्स संस्थान की ओर से नहीं फेंका गया है। मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एम्स प्रबंधन के अधिकारियों के साथ इसकी जांच की।
एम्स प्रबंधन की ओर से जारी बयान में बताया गया कि मामले को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी 24 मई को एम्स बिलासपुर में निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने संस्थान में गीले और सूखे कचरे के निपटाने की विधि, प्रक्रिया और बायो मेडिकल वेस्ट के ट्रीटमेंट की संपूर्ण प्रक्रिया देखी। जांच के दौरान पाया गया कि संस्थान अपने सभी प्रकार के कचरे का निपटान वैज्ञानिक विधि से संस्थान के अंदर ही लगे ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य विधियों द्वारा करता है। संस्थान में निरीक्षण के बाद एम्स प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौके का मुआयना करने छड़ोल पंचायत गए। पंचायत के लोगों के सामने उस गीले कचरे के लिफाफे को खोलकर देखा तो पाया गया कि यह बायो मेडिकल वेस्ट नहीं है। यह घरेलू कचरा और बेकार खाना (जूठन) है। पंचायत प्रतिनिधियों को एम्स प्रबंधन ने आश्वस्त किया कि एम्स बिलासपुर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता और जिम्मेदारियों का बेहतरीन तरीके से निर्वहन करने के लिए संकल्पित है और ऐसा कोई भी कार्य नहीं करता है, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़े। प्रबंधन द्वारा लोगों को मौके पर कहा गया कि संस्थान में सभी तरह के गीले और सूखे कचरे बायो मेडिकल वेस्ट, फूड वेस्ट आदि को वैज्ञानिक विधियों द्वारा नष्ट किया जाता है। प्रबंधन ने कहा कि इसके बाद संस्थान ने सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए अपने संसाधनों से इस कचरे को तत्काल उठाकर निपटारे के लिए भेज दिया।
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