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Bilaspur News: तलाक के बाद बेटे की कस्टडी मां के पास रहेगी

Thu, 29 Oct 2026 11:20 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:20 PM IST
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After the divorce, the son's custody will remain with the mother.
बिलासपुर पारिवारिक न्यायालय ने सुनाया फैसला, शिक्षा और इलाज संबंधी दस्तावेजों के लिए भी दिया अधिकार
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पारिवारिक न्यायालय बिलासपुर ने तलाक के बाद करीब नौ साल से मां के साथ रह रहे नाबालिग बेटे की कस्टडी मां के पास बरकरार रखने के आदेश दिए हैं। अदालत ने मां को बेटे की शिक्षा, इलाज और जरूरी दस्तावेजों के लिए उसका प्रतिनिधित्व करने तथा आवेदन पर हस्ताक्षर करने का अधिकार भी दिया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला बच्चे को गोद लेने की अनुमति नहीं है और इससे जैविक पिता के अधिकार समाप्त नहीं होंगे।
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय बिलासपुर ने 28 अक्तूबर को यह फैसला सुनाया। याचिका के अनुसार, महिला का विवाह 23 मई 2011 को हुआ था और 31 मई 2012 को बेटे परमजीत सिंह का जन्म हुआ। दोनों का विवाह 9 दिसंबर 2017 को न्यायालय के आदेश से समाप्त हो गया था। इसके बाद से बेटा मां के साथ रह रहा है।
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महिला ने अदालत को बताया कि उसके वर्तमान पति ने बेटे को अपने बच्चे की तरह अपनाया है और उसकी पढ़ाई, स्वास्थ्य व अन्य जरूरतों का खर्च उठा रहे हैं। महिला के अनुसार, जैविक पिता ने पालन-पोषण के लिए नियमित आर्थिक सहायता नहीं दी। उसने 25 अक्तूबर 2024 को कानूनी नोटिस भेजकर वर्तमान पति को बेटे को गोद लेने के लिए सहमति मांगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दूसरे राज्य से जारी कुछ दस्तावेजों के कारण स्कूल और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े कामों में भी परेशानी हो रही थी।
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न्यायालय के अनुसार, प्रतिवादी को याचिका का नोटिस विधिवत तामील कराया गया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। मां और उसके पिता ने गवाह के रूप में बयान दिए कि बच्चे का पालन-पोषण मां और उसके वर्तमान पति कर रहे हैं।
अदालत ने कहा कि कस्टडी तय करते समय बच्चे के कल्याण, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। करीब नौ साल से मां के साथ रह रहे बच्चे की मौजूदा व्यवस्था बदलने का कोई आधार नहीं मिला। इसलिए उसकी कस्टडी मां के पास रखने का फैसला सुनाया गया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चा बालिग होने तक या सक्षम न्यायालय के अगले आदेश तक मां की कस्टडी में रहेगा। गोद लेने की प्रक्रिया के लिए अलग से कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा। इस आदेश से जैविक पिता की भरण-पोषण संबंधी जिम्मेदारियां और बच्चे के जन्म से जुड़े अन्य अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
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